पीएम ई ड्राइव योजना क्या है और यह आपके लिए क्यों जरूरी है

PM E-Drive Scheme
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अगर आप आने वाले समय में एक नया वाहन खरीदने का विचार कर रहे हैं तो आपको सरकार की इस नई योजना के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। आज के समय में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने हर आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है। हर कोई चाहता है कि उसका सफर सस्ता हो और पर्यावरण भी साफ रहे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पीएम ई ड्राइव योजना की शुरुआत की है। इस योजना का पूरा नाम प्राइम मिनिस्टर इलेक्ट्रिक ड्राइव रेवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट है। आसान भाषा में कहें तो यह एक ऐसी सरकारी पहल है जो आपको इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते में खरीदने का मौका देती है और साथ ही सड़कों पर चार्जर लगाने का काम भी करती है।

पहले सरकार फेम योजना चलाती थी जो अब खत्म हो चुकी है। अब उसकी जगह इस नई योजना ने ले ली है जिसे अक्टूबर 2024 से शुरू किया गया है और यह मार्च 2026 तक चलेगी। सरकार ने इस पूरी योजना के लिए 10900 करोड़ रुपये का एक बहुत बड़ा बजट तय किया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को कम करना और बैटरी से चलने वाले वाहनों को अपनाना है। अगर आप एक स्कूटर या कोई कमर्शियल वाहन खरीदने की सोच रहे हैं तो यह योजना सीधे तौर पर आपके बैंक खाते और आपकी जेब से जुड़ी है।

इस नई योजना का कुल बजट और उसका सही बंटवारा

सरकार ने जो 10900 करोड़ रुपये का बजट पास किया है उसे बहुत ही सोच समझकर अलग अलग हिस्सों में बांटा गया है। इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा यानी 3679 करोड़ रुपये सीधे तौर पर आम जनता को सब्सिडी देने के लिए रखा गया है। यह पैसा इलेक्ट्रिक टू व्हीलर थ्री व्हीलर एंबुलेंस और ट्रकों की खरीद पर छूट के रूप में दिया जाएगा। इसके अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सुधारने के लिए 4391 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं जिनसे देश के बड़े शहरों में नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएंगी।

सबसे जरूरी बात यह है कि सरकार जानती है कि लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से इसलिए डरते हैं क्योंकि उन्हें चार्ज करने की जगह नहीं मिलती। इस डर को खत्म करने के लिए योजना में 2000 करोड़ रुपये सिर्फ पब्लिक चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए दिए गए हैं। इसके साथ ही 780 करोड़ रुपये का बजट देश की टेस्टिंग एजेंसियों को दिया गया है ताकि वे बाजार में आने वाले हर नए वाहन की सुरक्षा की कड़ी जांच कर सकें। यह बंटवारा साफ दिखाता है कि सरकार सिर्फ वाहन बेचने पर जोर नहीं दे रही बल्कि उसे चलाने के लिए एक मजबूत ढांचा भी तैयार कर रही है।

इलेक्ट्रिक टू व्हीलर खरीदने पर आपको कितना फायदा मिलेगा

अगर आप अपने रोज के काम या ऑफिस जाने के लिए एक इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं तो यह योजना आपके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है। सरकार का टारगेट है कि इस योजना के तहत लगभग 24 लाख 79 हजार इलेक्ट्रिक टू व्हीलर पर सब्सिडी दी जाए। लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें भी हैं। आपके स्कूटर में एक आधुनिक लिथियम आयन बैटरी होनी चाहिए। पुरानी तकनीक वाली लेड एसिड बैटरी वाले सस्ते स्कूटरों पर आपको कोई सरकारी छूट नहीं मिलेगी। इसके अलावा आपके स्कूटर की एक्स शोरूम कीमत 1 लाख 50 हजार रुपये से कम होनी चाहिए।

सब्सिडी का गणित बहुत आसान है। शुरुआत में सरकार आपको प्रति किलोवाट बैटरी क्षमता के हिसाब से पांच हजार रुपये की छूट दे रही है जिसकी अधिकतम सीमा दस हजार रुपये तय की गई है। मान लीजिए आप एक ऐसा स्कूटर खरीदते हैं जिसमें 2 किलोवाट का बैटरी पैक लगा है तो आपको पूरे दस हजार रुपये का सीधा फायदा मिलेगा। लेकिन आपको यह बात भी ध्यान रखनी होगी कि अगले वित्तीय वर्ष में यह छूट घटकर आधी हो जाएगी। तब आपको प्रति किलोवाट सिर्फ पच्चीस सौ रुपये की छूट मिलेगी और अधिकतम छूट की सीमा पांच हजार रुपये रह जाएगी। इसलिए अगर आप एक अच्छा इलेक्ट्रिक स्कूटर लेने का मन बना चुके हैं तो समय रहते इसे खरीदना आपके लिए एक समझदारी भरा फैसला होगा।

कमर्शियल वाहनों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर योजना का सीधा असर

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यह योजना सिर्फ आम आदमी के स्कूटर तक सीमित नहीं है बल्कि यह सड़कों पर चलने वाले भारी वाहनों को भी पूरी तरह से बदलने वाली है। रोजगार के लिए इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर और ई रिक्शा के लिए भी भारी बजट रखा गया है। सरकार का टारगेट लगभग 3 लाख 15 हजार ऐसे वाहनों को सब्सिडी देना है। इससे जो लोग माल ढुलाई या सवारी ले जाने का काम करते हैं उनकी रोज की कमाई बढ़ेगी क्योंकि उन्हें पेट्रोल या सीएनजी का महंगा खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।

इसके साथ ही देश के उन 9 बड़े शहरों में जहां आबादी 40 लाख से ज्यादा है वहां 14028 नई इलेक्ट्रिक बसें उतारी जाएंगी। इसके लिए 4391 करोड़ रुपये का इस्तेमाल होगा। जब ये बसें सड़कों पर दौड़ेंगी तो शहरों का प्रदूषण काफी कम हो जाएगा और आपका रोज का सफर बहुत शांत और आरामदायक हो जाएगा। इस योजना में पहली बार इलेक्ट्रिक एंबुलेंस के लिए 500 करोड़ रुपये रखे गए हैं ताकि मरीजों को बिना शोर और झटके के अस्पताल पहुंचाया जा सके। ट्रकों से होने वाले भारी प्रदूषण को रोकने के लिए भी 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जो पुराने ट्रकों को कबाड़ में बदलने वाले लोगों को दिया जाएगा।

ई वाउचर सिस्टम से तुरंत कैसे मिलेगा सब्सिडी का पैसा

पहले के समय में लोगों को सरकारी छूट का पैसा पाने के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता था और कई तरह के फॉर्म भरने पड़ते थे। पीएम ई ड्राइव योजना ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है। अब आपको किसी दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इसके लिए एक नया ई वाउचर सिस्टम शुरू किया है जो पूरी तरह से डिजिटल है।

जब आप अपना पसंदीदा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए शोरूम जाएंगे तो वहां का डीलर सरकारी पोर्टल पर आपकी जानकारी डालेगा। आपके आधार कार्ड के जरिए आपकी ई केवायसी की जाएगी और चेहरे की पहचान से आपका वेरिफिकेशन होगा। वेरिफिकेशन पूरा होते ही आपके मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आएगा जिसमें एक ई वाउचर का लिंक होगा। आपको अपने फोन पर ही उस वाउचर पर डिजिटल साइन करने होंगे। आपके साइन करते ही वह वाउचर मंजूर हो जाएगा और डीलर आपके फाइनल बिल में से सब्सिडी के पैसे तुरंत कम कर देगा। आपको सिर्फ बची हुई कीमत ही चुकानी होगी। बाद में वाहन बनाने वाली कंपनी वह पैसा सीधे सरकार से ले लेगी। यह सिस्टम आपका बहुत सारा समय बचाता है।

चार्जिंग स्टेशन की समस्या का एक बड़ा और पक्का समाधान

कोई भी ग्राहक जब इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने जाता है तो उसके मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि वह इसे रास्ते में कहां चार्ज करेगा। सड़कों पर चार्जर की कमी को रेंज एंजायटी कहा जाता है। सरकार ने इस परेशानी को हमेशा के लिए खत्म करने का पक्का इंतजाम कर लिया है। योजना के तहत 2000 करोड़ रुपये सिर्फ देश भर में नए और फास्ट चार्जर लगाने पर खर्च किए जा रहे हैं।

इस भारी भरकम बजट से सड़कों और हाईवे पर 22100 फास्ट चार्जर सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों के लिए लगाए जाएंगे। इसके अलावा 48400 चार्जर टू व्हीलर और थ्री व्हीलर के लिए होंगे और 1800 बड़े और बहुत शक्तिशाली चार्जर बसों के लिए लगाए जाएंगे। ये फास्ट चार्जर इतने आधुनिक होंगे कि ये आपकी कार के बैटरी पैक को कुछ ही घंटे में पूरी तरह से चार्ज कर देंगे। जब सड़कों पर हर थोड़ी दूरी पर चार्जर मौजूद होंगे तो आप बिना डरे लंबी दूरी की यात्राएं कर सकेंगे। इससे लोगों का इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर भरोसा बढ़ेगा और वे बेझिझक इन्हें खरीदेंगे।

पीएम ई ड्राइव योजना का पूरा बजट और वाहनों का टारगेट

आप नीचे दी गई टेबल में आसानी से देख सकते हैं कि सरकार किस वाहन पर कितना पैसा खर्च कर रही है और उसका क्या टारगेट है।

वाहन का प्रकारयोजना का टारगेटतय किया गया बजट
इलेक्ट्रिक टू व्हीलर24 लाख 79 हजार वाहन1772 करोड़ रुपये
इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर3 लाख 15 हजार वाहन907 करोड़ रुपये
पब्लिक ट्रांसपोर्ट बसें14 हजार 28 बसें4391 करोड़ रुपये
नई इलेक्ट्रिक एंबुलेंसजरूरत के अनुसार तय होगा500 करोड़ रुपये
कमर्शियल इलेक्ट्रिक ट्रकजरूरत के अनुसार तय होगा500 करोड़ रुपये
पब्लिक चार्जिंग स्टेशन72 हजार से ज्यादा चार्जर2000 करोड़ रुपये
टेस्टिंग सुविधा का विकाससभी सरकारी टेस्टिंग लैब780 करोड़ रुपये

प्राइवेट कार खरीदने वालों को सीधी सब्सिडी क्यों नहीं मिल रही है

कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि सरकार आम लोगों की इलेक्ट्रिक कारों पर सीधी छूट क्यों नहीं दे रही है। इसका एक बहुत सीधा और साफ कारण है। सरकार का मानना है कि जो लोग 15 या 20 लाख रुपये की कार खरीद सकते हैं उन्हें इस तरह की आर्थिक मदद की जरूरत नहीं है। भारत में इलेक्ट्रिक कारों का बाजार पहले ही अपनी रफ्तार पकड़ चुका है और लोग इन्हें अपनी पसंद से खरीद रहे हैं। सरकार का मुख्य लक्ष्य प्रदूषण को रोकना है और देश की सड़कों पर सबसे ज्यादा संख्या टू व्हीलर और बसों की होती है जो सबसे ज्यादा धुआं छोड़ते हैं।

भले ही आपको कार खरीदने पर सीधे पैसे न मिलें लेकिन आपको इसका एक बहुत बड़ा फायदा दूसरे रूप में मिल रहा है। सरकार जो 2000 करोड़ रुपये खर्च करके हजारों फास्ट चार्जर लगा रही है उसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल इलेक्ट्रिक कार चलाने वाले लोग ही करेंगे। इसके अलावा भारत में इलेक्ट्रिक कारों पर लगने वाला जीएसटी सिर्फ पांच प्रतिशत है जो आम पेट्रोल कारों पर लगने वाले टैक्स से बहुत कम है। यह कम टैक्स भी अपने आप में एक बहुत बड़ी छूट है जो आपकी कार की ऑन रोड कीमत को काफी कम कर देती है।

नई और पुरानी बैटरी की टेस्टिंग और सुरक्षा के नियम

इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों के मन में सुरक्षा का डर भी होता है। हमने कई बार खबरों में देखा है कि खराब क्वालिटी की बैटरी में आग लग जाती है। पीएम ई ड्राइव योजना के तहत सरकार ने इस खतरे से निपटने के लिए कड़े नियम बनाए हैं। योजना के कुल बजट में से 780 करोड़ रुपये सिर्फ उन सरकारी लैब्स को अपग्रेड करने के लिए दिए गए हैं जो इन गाड़ियों की टेस्टिंग करती हैं।

अब किसी भी कंपनी को अपने वाहन पर सब्सिडी तभी मिलेगी जब उसका वाहन इन टेस्टिंग लैब्स में सुरक्षा के सबसे कड़े मानकों को पार करेगा। इसके साथ ही सरकार ने बैटरी की वारंटी को लेकर भी नियम सख्त कर दिए हैं। टू व्हीलर बनाने वाली हर कंपनी को अपनी बैटरी पर कम से कम तीन साल या 20000 km तक की वारंटी देना अनिवार्य कर दिया गया है। थ्री व्हीलर के लिए यह लिमिट 40000 km से लेकर 80000 km तक रखी गई है। इससे आपको यह शांति मिलती है कि अगर आपकी गाड़ी का बैटरी पैक तय समय से पहले खराब होता है तो आपको अपनी जेब से पैसा नहीं लगाना पड़ेगा और कंपनी उसे मुफ्त में बदल कर देगी।

मेरी अंतिम सलाह और आपको आगे क्या करना चाहिए

अगर आप मुझसे पूछेंगे कि क्या आपको अभी नया वाहन खरीदना चाहिए या नहीं तो मेरा जवाब बहुत साफ है। पीएम ई ड्राइव योजना एक बहुत ही शानदार मौका है जो मार्च 2026 तक ही मौजूद है। अगर आपका रोज का सफर 15 से 20 km के बीच है तो आपको बिना ज्यादा सोचे एक इलेक्ट्रिक टू व्हीलर ले लेना चाहिए। जब आप इसे घर पर चार्ज करेंगे तो आपका महीने का खर्च पेट्रोल के मुकाबले बहुत कम हो जाएगा और आपकी जो बचत होगी उससे आप आसानी से अपनी नई गाड़ी की ईएमआई चुका सकेंगे।

अगले साल से सब्सिडी की रकम कम हो जाएगी इसलिए ज्यादा छूट पाने के लिए आपको अभी फैसला लेना होगा। आप अपने शहर के अलग अलग शोरूम में जाएं और वहां जाकर गाड़ियों की टेस्ट ड्राइव लें। आप डीलर से साफ पूछें कि जो मॉडल आप पसंद कर रहे हैं क्या वह पीएम ई ड्राइव योजना के पोर्टल पर रजिस्टर है या नहीं। अगर वह रजिस्टर है तो ई वाउचर बनवाएं और इस शानदार सरकारी छूट का पूरा फायदा उठाएं। यह सही समय है जब आप एक साफ पर्यावरण की ओर कदम बढ़ा सकते हैं और अपने पैसे भी बचा सकते हैं।

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