ईवी सब्सिडी कैसे अप्लाई करें भारत में इलेक्ट्रिक वाहन पर छूट पाने का पूरा तरीका

Subsidy On EV
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आज के समय में हर कोई पेट्रोल और डीजल के बढ़ते खर्चों से परेशान है और इसी कारण से लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। जब हम कोई नई इलेक्ट्रिक कार या इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने शोरूम जाते हैं तो उसकी कीमत देखकर एक बार के लिए हमारा मन थोड़ा पीछे हट जाता है। पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआती कीमत काफी ज्यादा होती है क्योंकि इनमें एक बहुत ही महंगा बैटरी पैक लगा होता है। लेकिन आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है क्योंकि भारत सरकार और अलग अलग राज्य सरकारें आपको ईवी खरीदने पर भारी छूट दे रही हैं जिसे हम आम भाषा में सब्सिडी कहते हैं। इस सब्सिडी के कारण आपकी गाड़ी की ऑन रोड कीमत काफी कम हो जाती है। मेंसइवी के आज के इस खास आर्टिकल में हम इसी विषय पर बहुत ही विस्तार से बात करेंगे कि भारत में ईवी सब्सिडी क्या है, यह कितने प्रकार की होती है और सबसे जरूरी बात कि आप अपनी नई गाड़ी पर इस सब्सिडी को क्लेम करने के लिए कैसे अप्लाई कर सकते हैं।

केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी में क्या अंतर होता है

भारत में जब आप कोई भी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते हैं तो आपको मुख्य रूप से दो तरह की सब्सिडी का फायदा मिलता है। पहली होती है केंद्र सरकार की सब्सिडी और दूसरी होती है राज्य सरकार की सब्सिडी। केंद्र सरकार पूरे देश के लिए एक समान नियम बनाती है। कुछ समय पहले तक सरकार फेम टू योजना के तहत भारी छूट दे रही थी लेकिन अब अप्रैल 2024 से सरकार ने ईएमपीएस 2024 नाम की एक नई योजना शुरू कर दी है। यह योजना मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक टू व्हीलर और थ्री व्हीलर के लिए है। दूसरी तरफ हर राज्य सरकार की अपनी अलग ईवी पॉलिसी होती है। जैसे अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं तो वहां के नियम अलग होंगे और अगर आप महाराष्ट्र या दिल्ली में रहते हैं तो वहां की छूट अलग होगी। इन दोनों सब्सिडी का मुख्य उद्देश्य यही है कि लोग ज्यादा से ज्यादा पर्यावरण के अनुकूल गाड़ियां खरीदें और पेट्रोल पर हमारी निर्भरता कम हो। आपको इन दोनों ही योजनाओं का फायदा एक साथ मिल सकता है।

ईएमपीएस 2024 योजना के तहत केंद्र की सब्सिडी कैसे मिलती है

केंद्र सरकार की सब्सिडी पाने की प्रक्रिया सबसे आसान है क्योंकि इसके लिए ग्राहक को खुद से कोई भी ऑनलाइन फॉर्म या कागजी कार्यवाही नहीं करनी पड़ती है। जब आप किसी भी ऑथराइज्ड डीलर के पास जाकर इलेक्ट्रिक स्कूटर या कार खरीदते हैं तो यह केंद्र सरकार वाली सब्सिडी आपको गाड़ी के बिल में ही पहले से कटकर मिलती है। इसे अपफ्रंट सब्सिडी कहा जाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी स्कूटर की असली कीमत ₹130000 है और उस पर ₹10000 की केंद्र सरकार की छूट है तो डीलर आपको वह स्कूटर सीधे ₹120000 में बेचेगा। बाद में वह डीलर खुद ही सरकार के पोर्टल पर जाकर वह पैसे अपने खाते में मंगवा लेता है।

आपको सिर्फ अपना आधार कार्ड और एक पक्का मोबाइल नंबर डीलर को देना होता है ताकि वह आपके नाम से गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कर सके। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि केंद्र सरकार की छूट सिर्फ उन्हीं गाड़ियों पर मिलती है जिनकी टॉप स्पीड 25 kmph से ज्यादा होती है। जो लो स्पीड वाले बिना रजिस्ट्रेशन के चलने वाले स्कूटर होते हैं उन पर कोई सरकारी छूट नहीं मिलती है। ईएमपीएस योजना के तहत सरकार बैटरी की क्षमता के हिसाब से ₹5000 प्रति किलोवाट की छूट देती है जो एक टू व्हीलर के लिए अधिकतम ₹10000 तक हो सकती है।

राज्य सरकार की सब्सिडी के लिए ऑनलाइन अप्लाई करने का तरीका

अब बात करते हैं राज्य सरकार की सब्सिडी की जिसके लिए अक्सर ग्राहकों को खुद से अप्लाई करना पड़ता है। हर राज्य का अपना एक अलग परिवहन विभाग का ऑनलाइन पोर्टल होता है। कुछ राज्यों में जैसे कि दिल्ली में डीलर ही आपका राज्य सब्सिडी का फॉर्म भी भर देता है और गाड़ी खरीदने के कुछ महीनों बाद सीधे आपके बैंक खाते में पैसे आ जाते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में नियम थोड़े अलग हैं। वहां गाड़ी खरीदने के बाद ग्राहक को खुद ही राज्य सरकार के ईवी पोर्टल पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होता है।

सब्सिडी के लिए अप्लाई करने से पहले आपको अपनी गाड़ी की पूरी पेमेंट करनी होती है और गाड़ी का आरटीओ से रजिस्ट्रेशन पूरा करवाना होता है। जब आपको आरटीओ की तरफ से अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी आरसी मिल जाती है उसके बाद ही आप सब्सिडी के लिए ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। अगर आप आरसी मिलने से पहले पोर्टल पर जाएंगे तो सिस्टम आपकी गाड़ी को पहचानेगा ही नहीं।

उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के पोर्टल पर सब्सिडी क्लेम करने के आसान स्टेप्स

MG ZS EV
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अगर आपको खुद से ऑनलाइन अप्लाई करना है तो आपको कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे। सबसे पहले आपको अपने राज्य के आधिकारिक ईवी सब्सिडी पोर्टल पर जाना होगा। इंटरनेट पर कई फर्जी वेबसाइट भी होती हैं इसलिए हमेशा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट ही खोलें। पोर्टल पर जाने के बाद आपको नया अकाउंट बनाने का विकल्प मिलेगा। वहां आपको अपना मोबाइल नंबर डालना होगा जिस पर एक ओटीपी आएगा। ओटीपी डालने के बाद आपका अकाउंट बन जाएगा।

अकाउंट में लॉगिन करने के बाद आपको अप्लाई फॉर सब्सिडी का बटन दिखेगा। इस पर क्लिक करते ही एक नया पेज खुलेगा जहां आपको अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर यानी आरसी नंबर डालना होगा। जैसे ही आप नंबर डालकर सर्च करेंगे, कंप्यूटर अपने आप आरटीओ के डेटाबेस से आपकी गाड़ी की पूरी जानकारी जैसे चेसिस नंबर, इंजन नंबर और आपकी गाड़ी का मॉडल स्क्रीन पर दिखा देगा।

इसके बाद आपको अपनी बैंक की जानकारी भरनी होगी। आपको अपना बैंक अकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड बहुत ही ध्यान से भरना होगा। यहीं पर आपको अपने बैंक की पासबुक या कैंसिल चेक की साफ फोटो अपलोड करनी होगी। सारे कागजात अपलोड करने के बाद आप फॉर्म सबमिट कर देते हैं। इसके बाद आरटीओ के अधिकारी आपके कागजों की जांच करते हैं। अगर सब कुछ सही पाया जाता है तो लगभग एक से दो महीने के अंदर सब्सिडी का पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आ जाता है।

सब्सिडी के लिए जरूरी कागजात की पूरी लिस्ट

ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आपको कुछ जरूरी कागजात स्कैन करके अपलोड करने होते हैं। आपके पास अपनी नई गाड़ी का ओरिजिनल बिल होना चाहिए जो डीलर ने आपको दिया है। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी आरसी की कॉपी भी बहुत जरूरी है। इसके अलावा आपका आधार कार्ड और पैन कार्ड भी लगता है। बैंक खाते का प्रमाण देने के लिए एक कैंसिल चेक या बैंक पासबुक के पहले पन्ने की फोटो चाहिए जिसमें आपका नाम, खाता संख्या और आईएफएससी कोड बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा हो। फॉर्म भरते समय यह ध्यान रखें कि सभी फाइलों का साइज पोर्टल पर बताई गई सीमा के अंदर ही हो वरना फाइल अपलोड नहीं होगी।

भारत के प्रमुख राज्यों में मिलने वाली ईवी सब्सिडी की टेबल

भारत के अलग अलग राज्यों में ईवी पॉलिसी के तहत मिलने वाली छूट बहुत अलग अलग है। किसी राज्य में प्रति किलोवाट बैटरी के हिसाब से पैसे मिलते हैं तो कहीं पर गाड़ी की कुल कीमत का एक तय प्रतिशत छूट के रूप में दिया जाता है। आपकी सुविधा के लिए हमने नीचे एक आसान टेबल तैयार की है जिसमें भारत के कुछ प्रमुख राज्यों में इलेक्ट्रिक टू व्हीलर और फोर व्हीलर पर मिलने वाली अनुमानित अधिकतम सब्सिडी की जानकारी दी गई है। यह नियम समय समय पर सरकार द्वारा बदले भी जा सकते हैं इसलिए गाड़ी खरीदने से पहले एक बार डीलर से पुष्टि जरूर कर लें।

राज्य का नामटू व्हीलर पर अधिकतम सब्सिडीफोर व्हीलर कार पर अधिकतम सब्सिडीसब्सिडी अप्लाई करने का तरीका
उत्तर प्रदेश₹5000 तक₹100000 तकग्राहक को खुद ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म भरना होता है
दिल्ली₹5000 तक (पॉलिसी के अनुसार)अब कारों पर छूट बंद हो चुकी हैडीलर द्वारा फॉर्म भरा जाता है
महाराष्ट्र₹10000 तक₹150000 तक (अर्ली बर्ड स्कीम के तहत)डीलर पॉइंट पर बिल में छूट मिल जाती है
गुजरात₹20000 तक₹150000 तकडीलर पॉइंट पर बिल में छूट मिल जाती है
राजस्थान₹10000 तक (बैटरी क्षमता के अनुसार)कारों पर छूट का नियम नहीं हैडीलर द्वारा फॉर्म भरा जाता है

रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन की बचत एक छुपी हुई सब्सिडी

ऊपर बताई गई नकद सब्सिडी के अलावा एक और बहुत बड़ी छूट है जो आपको इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर मिलती है और बहुत से लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। वह है रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस की पूरी माफी। जब आप कोई पेट्रोल कार खरीदते हैं तो आपको उसकी कीमत का आठ से दस प्रतिशत हिस्सा आरटीओ को रोड टैक्स के रूप में देना पड़ता है। एक पंद्रह लाख की कार पर यह टैक्स आसानी से ₹150000 तक बन जाता है।

लेकिन भारत के ज्यादातर राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर कोई रोड टैक्स नहीं लगता है। आपकी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन मात्र ₹1000 से ₹2000 की मामूली फीस में हो जाता है। यह अपने आप में एक बहुत बड़ी आर्थिक मदद है जो आपको सीधे तौर पर फायदा पहुंचाती है। आपको इसके लिए कोई अलग से फॉर्म नहीं भरना पड़ता है। जब डीलर आपकी गाड़ी का नंबर आरटीओ में अप्लाई करता है तो कंप्यूटर सिस्टम खुद ही रोड टैक्स को जीरो कर देता है और आपको सिर्फ नंबर प्लेट की मामूली फीस देनी होती है।

इनकम टैक्स में सेक्शन 80EEB के तहत मिलने वाली भारी छूट

अगर आप अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ी लोन पर खरीद रहे हैं तो भारत सरकार आपको इनकम टैक्स में भी एक बहुत ही शानदार छूट देती है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80EEB के तहत कोई भी व्यक्ति अपने इलेक्ट्रिक वाहन के लोन पर चुकाए गए ब्याज पर ₹150000 तक की टैक्स छूट का दावा कर सकता है। यह छूट सिर्फ पहले इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद पर ही लागू होती है और यह आपके सीए द्वारा आपकी साल भर की इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय क्लेम की जाती है। अगर आप ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में आते हैं तो यह छूट आपकी गाड़ी की असली कीमत को और भी ज्यादा कम कर देती है। इसलिए अगर आपके पास पूरा कैश मौजूद भी हो तब भी थोड़ा बहुत लोन लेकर इस टैक्स छूट का फायदा उठाना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।

सब्सिडी अप्लाई करते समय की जाने वाली आम गलतियां

ईवी सब्सिडी के लिए अप्लाई करते समय कई लोग अनजाने में कुछ छोटी छोटी गलतियां कर देते हैं जिसकी वजह से उनके पैसे अटक जाते हैं। सबसे पहली गलती यह है कि लोग आधार कार्ड में अपना नाम और बैंक खाते में अपना नाम चेक नहीं करते। अगर आपके आधार में नाम अलग है और बैंक पासबुक में अलग है तो सरकारी सिस्टम आपके पैसे रोक देगा। इसलिए गाड़ी खरीदने से पहले अपने सारे कागजात एक दम सही करवा लें। नाम की स्पेलिंग बिल्कुल एक जैसी होनी चाहिए।

दूसरी गलती यह है कि कुछ लोग बिना रिसर्च किए किसी अनजान कंपनी का ऐसा ई रिक्शा या इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीद लेते हैं जो सरकार के सब्सिडी पोर्टल पर रजिस्टर ही नहीं होता। हमेशा याद रखें कि सरकार हर गाड़ी पर छूट नहीं देती। गाड़ी को बनाने वाली कंपनी को पहले अपनी गाड़ी सरकारी लैब में पास करवानी होती है और उसकी क्वालिटी साबित करनी होती है। इसलिए शोरूम में पैसे देने से पहले डीलर से लिखित में मांगें कि यह मॉडल सरकार की सब्सिडी योजना के तहत अप्रूव है या नहीं।

तीसरी बड़ी गलती लोग दूसरे राज्य से गाड़ी खरीद कर करते हैं। मान लीजिए आप दिल्ली में रहते हैं और आप हरियाणा से गाड़ी खरीद लाते हैं। ऐसे में आपको न तो दिल्ली की राज्य सब्सिडी मिलेगी और न ही हरियाणा की। राज्य सरकार की छूट का पहला नियम यही है कि गाड़ी खरीदने वाला व्यक्ति उसी राज्य का निवासी होना चाहिए और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी उसी राज्य के आरटीओ में होना चाहिए। इसलिए हमेशा अपने गृह राज्य से ही गाड़ी खरीदें।

क्या घर पर चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए भी कोई छूट है

यह एक बहुत ही आम सवाल है जो लोग शोरूम में पूछते हैं। वर्तमान में भारत सरकार निजी घरों में अपनी कार के लिए चार्जिंग स्टेशन लगाने पर सीधे तौर पर कोई नकद सब्सिडी नहीं देती है। जब आप इलेक्ट्रिक कार खरीदते हैं तो कंपनी आपको एक 7.2 किलोवाट का वॉल बॉक्स चार्जर साथ में देती है जिसे इंस्टॉल करने का खर्च भी कंपनी ही उठाती है। अगर आप अपनी गाड़ी को इस चार्जर से घर पर चार्ज करते हैं तो उसमें लगभग 6 से 8 घंटे का समय लगता है। हालांकि कुछ राज्य सरकारें हाउसिंग सोसाइटी और कमर्शियल बिल्डिंग्स को बड़े पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए जरूर वित्तीय मदद दे रही हैं लेकिन एक आम आदमी के घर के चार्जर पर फिलहाल कोई अलग से छूट नहीं है।

आगे की राह

कुल मिलाकर देखा जाए तो सरकार की तरफ से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर बहुत अच्छी मदद मिल रही है। अगर आप सारी प्रक्रिया को सही तरीके से फॉलो करते हैं तो यह पैसे बिना किसी परेशानी के आपके खाते में आ जाते हैं। आप बस एक अच्छी रेंज वाली और भरोसेमंद कंपनी की गाड़ी चुनें। अपनी जरूरत के हिसाब से बड़ी या छोटी बैटरी पैक का चुनाव करें। अगर आप दिन भर में 50 km चलते हैं तो एक इलेक्ट्रिक स्कूटर आपके पेट्रोल का बहुत सारा खर्च बचा सकता है।

इस सरकारी सब्सिडी का फायदा उठाने का यह सबसे सही समय है क्योंकि जैसे जैसे भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियां आम होती जाएंगी वैसे वैसे सरकार यह छूट कम करती जाएगी या पूरी तरह से बंद कर देगी। कई राज्यों ने तो कारों पर मिलने वाली नकद छूट को बंद भी कर दिया है। इसलिए अगर आप नई गाड़ी लेने का प्लान बना रहे हैं तो अपने सारे कागजात बिल्कुल तैयार रखें, सही मॉडल का चुनाव करें और इस सरकारी योजना का पूरा लाभ उठाएं। इलेक्ट्रिक वाहन चलाकर आप न सिर्फ अपने मेहनत के पैसे बचा रहे हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हवा को भी साफ़ रख रहे हैं।

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