टाटा सिएरा ईवी VS सिएरा पेट्रोल-डीजल: जानिए आपके लिए कौन सी दमदार एसयूवी रहेगी सबसे बेहतरीन

Tata Sierra EV VS ICE
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भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में टाटा मोटर्स ने अपनी सबसे आइकॉनिक ब्रांड सिएरा को एक नए और आधुनिक अवतार में वापस लाकर धमाल मचा दिया है। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने इस गाड़ी को इलेक्ट्रिक और पारंपरिक इंटरनल कंबशन इंजन यानी पेट्रोल और डीजल दोनों ही विकल्पों में पेश किया है। जो लोग अपने लिए एक नई मिड साइज एसयूवी तलाश रहे हैं, उनके लिए यह तुलना बेहद रोमांचक हो गई है। हाल ही में लॉन्च हुई इस कार की शुरुआती कीमत इलेक्ट्रिक वर्जन के लिए ₹18.79 लाख तय की गई है। पहली नज़र में देखने पर दोनों गाड़ियाँ एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन इनके डिज़ाइन के कुछ खास हिस्सों, केबिन के फीचर्स, पावरट्रेन और ड्राइविंग परफॉर्मेंस में जमीन-आसमान का अंतर है। अगर आप भी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आपके दैनिक इस्तेमाल और बजट के हिसाब से कौन सा मॉडल बेस्ट रहेगा, तो इस पूरे लेख में हम आपको दोनों वेरिएंट्स की हर छोटी-बड़ी समानता और अंतर के बारे में विस्तार से समझाने वाले हैं।

बाहरी रूप-रंग और बनावट में दिखने वाले बदलाव

बाहरी डिज़ाइन की बात करें तो दोनों ही गाड़ियों में टाटा की नई बोल्ड और अपराइट स्टाइलिंग देखने को मिलती है, जो पुरानी सिएरा की याद दिलाती है। दोनों वर्जन में आपको बेहद पतले प्रोजेक्टर एलईडी हेडलाइट्स मिलते हैं जो ऊपर की तरफ एक लंबी कनेक्टेड एलईडी लाइट बार से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा वर्टिकल शेप में दिए गए एलईडी फॉग लैंप्स और नीचे की तरफ लगी सिल्वर फॉक्स स्किड प्लेट दोनों में एक समान है, जो गाड़ी को सामने से एक मस्कुलर और रफ-एंड-टफ लुक देती है।

लेकिन अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आपको इलेक्ट्रिक मॉडल के फ्रंट में कुछ बड़े बदलाव नजर आएंगे। इलेक्ट्रिक वर्जन में आगे की तरफ कोई वेंट या ग्रिल नहीं दी गई है, बल्कि बॉडी कलर की पूरी तरह से बंद यानी ब्लैंक्ड ऑफ ग्रिल मिलती है। वहीं पेट्रोल या डीजल मॉडल में ग्लॉस ब्लैक फिनिशिंग के साथ हवा आने-जाने के लिए खुली हुई फंक्शनल ग्रिल दी गई है जिस पर सिएरा की क्रोम या सिल्वर बैजिंग देखने को मिलती है। इलेक्ट्रिक एसयूवी के बंपर के निचले हिस्से में हेडलाइट के ठीक नीचे एक बड़ा ग्लॉस ब्लैक पैनल जोड़ा गया है, जबकि पारंपरिक मॉडल में इस हिस्से को बॉडी कलर में रखा गया है। यह छोटा सा बदलाव इलेक्ट्रिक वेरिएंट को एक भविष्यवादी और बेहद साफ-सुथरा लुक देता है।

साइड प्रोफाइल और पहियों की खास बातें

गाड़ी को किनारे से देखने पर दोनों मॉडल्स में अंतर करना काफी मुश्किल हो जाता है। टाटा ने दोनों ही वर्जन में आधुनिक दिखने वाले फ्लश डोर हैंडल्स दिए हैं जो बॉडी के साथ पूरी तरह फिट हो जाते हैं। इसके साथ ही सिएरा की सबसे बड़ी पहचान यानी पीछे की तरफ दी गई अल्पाइन स्टाइल बड़ी ग्लास विंडो दोनों ही मॉडल्स की शोभा बढ़ा रही है। व्हील आर्चेस और दरवाजों के निचले हिस्से पर मिलने वाली ग्लॉस ब्लैक क्लैडिंग भी दोनों में बिल्कुल एक जैसी है। यहाँ तक कि दोनों मॉडल्स में 19 इंच के बड़े डुअल-टोन अलॉय व्हील्स दिए गए हैं जिनका डिज़ाइन पूरी तरह समान है।

साइड प्रोफाइल में सिर्फ एक ही बड़ा अंतर है और वह है इसकी नेमप्लेट। इलेक्ट्रिक वेरिएंट में आगे वाले दोनों दरवाजों पर आपको टाटा की सिग्नेचर डॉट ईवी बैजिंग देखने को मिलती है, जबकि रेगुलर मॉडल में साधारण सिएरा लिखा होता है। दोनों ही गाड़ियों की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई एक बराबर होने की वजह से सड़क पर इनका दबदबा बेहतरीन रहता है। दोनों वेरिएंट्स का ग्राउंड क्लीयरेंस 205 mm है, जो भारतीय सड़कों के गड्ढों और स्पीड ब्रेकर्स को आसानी से पार करने के लिए बहुत बढ़िया माना जाता है।

पीछे का लुक और बैजिंग की कहानी

Sierra EV
Sierra EV

पीछे के हिस्से की बात करें तो यहाँ भी टाटा मोटर्स ने अपनी दोनों गाड़ियों में काफी हद तक एक जैसा डिज़ाइन रखा है। दोनों में ही पीछे की तरफ एक कोने से दूसरे कोने तक जाने वाली बेहद खूबसूरत और पतली एलईडी टेल लाइट बार दी गई है। बंपर का निचला हिस्सा ग्लॉस ब्लैक फिनिशिंग और रिफ्लेक्टर्स के साथ आता है और ऊपर की तरफ स्पोर्टी दिखने वाला रूफ माउंटेड स्पॉइलर दिया गया है। नीचे की तरफ दी गई सिल्वर फॉक्स स्किड प्लेट पीछे से भी गाड़ी के एसयूवी लुक को मजबूत बनाती है।

पीछे की तरफ पहचान का इकलौता जरिया केवल टेलगेट पर लिखी हुई ब्रांडिंग है। इलेक्ट्रिक मॉडल में टेल लाइट के ठीक नीचे सिएरा डॉट ईवी लिखा हुआ दिखाई देता है, जबकि पेट्रोल-डीजल मॉडल में केवल सिएरा लिखा होता है। इस तरह टाटा ने अपनी इस लीजेंडरी कार की मूल पहचान को बनाए रखते हुए इलेक्ट्रिक वर्जन को एक आधुनिक और अलग पहचान देने की सफल कोशिश की है।

इंटीरियर का लेआउट और केबिन की कलर थीम

जब आप इस गाड़ी के अंदर कदम रखते हैं, तो आपको दोनों ही गाड़ियों में डैशबोर्ड का बनावट ढांचा एक जैसा ही मिलेगा। दोनों में ही नया चार-स्पोक वाला स्टीयरिंग व्हील दिया गया है जिसके बीच में टाटा का चमकता हुआ लोगो मिलता है। सबसे बड़ी समानता इनका ट्रिपल स्क्रीन सेटअप है, जिसने इस गाड़ी के केबिन को बेहद आलीशान बना दिया है। इस सेटअप में ड्राइवर के लिए 10.25 इंच का डिजिटल डिस्प्ले, बीच में मुख्य मनोरंजन के लिए 12.3 इंच की टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट और ठीक उसके बगल में सह-यात्री यानी पैसेंजर के मनोरंजन के लिए एक और अलग से 12.3 इंच की स्क्रीन दी गई है। पैनोरमिक सनरुफ, वायरलेस फोन चार्जर, रंगीन हेड-अप डिस्प्ले, डॉल्बी एटमॉस के साथ आने वाला 12 स्पीकर का जेबीएल ब्लैक ऑडियो सिस्टम, डुअल ज़ोन क्लाइमेट कंट्रोल और वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स जैसी तमाम प्रीमियम सुविधाएं दोनों ही गाड़ियों के टॉप मॉडल्स में दी गई हैं।

हालाँकि केबिन के माहौल और रंगों के मामले में दोनों गाड़ियाँ एक दूसरे से बिल्कुल जुदा हैं। सिएरा के इलेक्ट्रिक वेरिएंट में कंपनी ने ग्रे और ऑफ-व्हाइट रंग के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल किया है, जिसमें सीटों की सिलाई पर हरे रंग के धागे का कंट्रास्ट दिया गया है। यह थीम देखने में बहुत ही आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल अहसास कराती है। दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल वेरिएंट में पारंपरिक तौर पर पसंद किया जाने वाला ब्लैक और बेज रंग का केबिन मिलता है, जो एक बहुत ही क्लासिक और लग्जरी लुक देता है।

इलेक्ट्रिक वर्जन के विशेष तकनीकी फीचर्स

भले ही केबिन का ढांचा एक जैसा हो, लेकिन इलेक्ट्रिक सिएरा में कुछ ऐसी आधुनिक तकनीक जोड़ी गई हैं जो आपको पेट्रोल या डीजल मॉडल में चाहकर भी नहीं मिल सकती हैं। इसमें सबसे बड़ा फीचर व्हीकल टू लोड और व्हीकल टू व्हीकल चार्जिंग क्षमता है। इसका मतलब यह है कि आप अपनी कार की बैटरी से किसी दूसरे के घर के बिजली उपकरण चला सकते हैं या किसी दूसरी खराब हुई इलेक्ट्रिक कार को चार्ज भी कर सकते हैं।

इसके अलावा सुरक्षा और पार्किंग को आसान बनाने के लिए इसमें अंडर-बोनट व्यू के साथ आने वाला विशेष 540 डिग्री कैमरा सिस्टम दिया गया है, जो आपको गाड़ी के नीचे की जमीन की लाइव तस्वीर दिखाता है। साथ ही इसमें ऑटो पार्क असिस्ट और समन मोड भी मिलता है, जिससे गाड़ी खुद-ब-खुद पार्क हो सकती है या आपके बुलाने पर पार्किंग से बाहर आ सकती है। हालांकि स्टैंडर्ड सुरक्षा के मामले में दोनों ही गाड़ियाँ बेहतरीन हैं, जिसमें 6 एयरबैग, लेवल 2 एडडास, ऑटो होल्ड के साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम जैसी चीजें शामिल हैं।

पावरट्रेन, इंजन और परफॉर्मेंस का बड़ा मुकाबला

सबसे बड़ा और असली अंतर दोनों गाड़ियों के इंजन और काम करने के तरीके में देखने को मिलता है। टाटा सिएरा का इलेक्ट्रिक वर्जन कंपनी के नए एक्टि डॉट ईवी प्लस आर्किटेक्चर पर आधारित है और यह दो अलग-अलग बैटरी पैक विकल्पों के साथ बाजार में उतरा है।

इसका पहला विकल्प 63 kWh की बैटरी के साथ आता है, जो रियर व्हील ड्राइव सेटअप से जुड़ा है। यह इंजन 238 PS की पावर और 315 Nm का टॉर्क पैदा करता है और एक बार पूरा चार्ज होने पर यह 565 km की दूरी तय कर सकता है। वहीं इसका बड़ा वेरिएंट 75 kWh की बैटरी के साथ आता है, जो रियर व्हील ड्राइव और ऑल व्हील ड्राइव दोनों विकल्पों में उपलब्ध है। इसका रियर व्हील ड्राइव वर्जन 209 PS की पावर देता है जबकि ऑल व्हील ड्राइव वेरिएंट में आगे और पीछे दोनों तरफ मोटर लगी होने के कारण यह पूरे 504 Nm का भारी-भरकम टॉर्क जनरेट करता है। यह ऑल व्हील ड्राइव वेरिएंट केवल 5.8 सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ्तार पकड़ सकता है, जिसके लिए इसमें एक विशेष बूस्ट मोड बटन दिया गया है। 75 kWh वाले रियर व्हील ड्राइव मॉडल की रेंज 665 km तक जाती है। इस गाड़ी को 120 kW के डीसी फास्ट चार्जर से मात्र 26 मिनट में 20 से 80 प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकता है।

इसके उलट पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वेरिएंट पूरी तरह से फ्रंट व्हील ड्राइव सेटअप पर काम करते हैं। इसमें आपको 1.5 लीटर का क्रायोजेट डीजल इंजन मिलता है जो 116 bhp की पावर और 280 Nm का टॉर्क देता है, जिसे 6-स्पीड मैनुअल या ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। वहीं पेट्रोल लवर्स के लिए इसमें 1.5 लीटर का पेट्रोल इंजन दिया गया है जिसे मैनुअल और 7-स्पीड डुअल क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ खरीदा जा सकता है। पारंपरिक इंजन उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो लंबी दूरी की यात्राओं में बिना चार्जिंग की चिंता किए तुरंत फ्यूल भरवाकर निकलना चाहते हैं, लेकिन इसमें आपको इलेक्ट्रिक कार जैसा तुरंत मिलने वाला पिकअप और पूरी तरह शांत केबिन का अनुभव नहीं मिल पाता है।

कीमत और वेरिएंट्स का पूरा गणित

गाड़ी खरीदते समय बजट सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यहाँ दोनों वेरिएंट्स के बीच एक बहुत बड़ा अंतर देखने को मिलता है। इलेक्ट्रिक सिएरा अपने साथ आने वाली महंगी और आधुनिक बैटरी तकनीक के कारण थोड़ी प्रीमियम रेंज में आती है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹18.79 लाख से शुरू होकर सबसे महंगे ऑल व्हील ड्राइव मॉडल के लिए ₹25.99 लाख तक जाती है।

इसके मुकाबले पेट्रोल और डीजल से चलने वाली रेगुलर सिएरा की कीमतें काफी आक्रामक रखी गई हैं। इसका बेस मॉडल ₹11.49 लाख की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर मिल जाता है और इसका सबसे टॉप मॉडल ₹21.29 लाख तक जाता है। यदि शुरुआती वेरिएंट्स की तुलना करें तो इलेक्ट्रिक मॉडल अपने पारंपरिक मॉडल से लगभग ₹7.30 लाख महंगा पड़ता है। हालांकि जैसे-जैसे आप ऊपर वाले वेरिएंट्स की तरफ बढ़ते हैं, यह अंतर थोड़ा कम हो जाता है, खासकर जब आप ऑल व्हील ड्राइव जैसी अनोखी क्षमता को देखते हैं जो केवल ईवी मॉडल में ही उपलब्ध है।

नीचे दी गई टेबल में आप दोनों गाड़ियों के सभी मुख्य वेरिएंट्स और उनकी एक्स-शोरूम कीमतों की तुलना आसानी से देख सकते हैं:

सिएरा ईवी के वेरिएंट्स (63 kWh और 75 kWh)एक्स-शोरूम कीमत (₹)पारंपरिक पेट्रोल / डीजल के वेरिएंट्सएक्स-शोरूम कीमत (₹)
प्योर (63 kWh RWD)₹18.79 लाखस्मार्ट प्लस पेट्रोल मैनुअल₹11.49 लाख
प्योर एस (63 kWh RWD)₹19.99 लाखस्मार्ट प्लस डीजल मैनुअल₹12.99 लाख
एडवेंचर (63 kWh RWD)₹20.99 लाखप्योर पेट्रोल मैनुअल₹12.99 लाख
एडवेंचर (75 kWh RWD)₹22.19 लाखप्योर पेट्रोल डीसीए (ऑटोमैटिक)₹14.49 लाख
एम्पावर्ड (63 kWh RWD)₹22.79 लाखएडवेंचर पेट्रोल मैनुअल₹15.29 लाख
एम्पावर्ड (75 kWh RWD)₹23.79 लाखप्योर प्लस डीजल मैनुअल₹15.99 लाख
एम्पावर्ड ए (75 kWh RWD)₹24.79 लाखएडवेंचर पेट्रोल डीसीए₹16.79 लाख
एम्पावर्ड ए QWD (75 kWh AWD)₹25.99 लाखएकम्प्लिश्ड डीजल ऑटोमैटिक₹21.29 लाख

व्यावहारिक ओनरशिप और ड्राइविंग का अनुभव

दोनों गाड़ियों को रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करने का अनुभव काफी अलग रहने वाला है। अगर आप सिएरा ईवी चुनते हैं तो आपको हर किलोमीटर पर होने वाला खर्च बहुत ही कम पड़ेगा। साथ ही इसमें कोई इंजन ऑयल या जटिल गियरबॉक्स न होने के कारण इसकी समय-समय पर होने वाली सर्विसिंग का खर्च भी पारंपरिक कार के मुकाबले बेहद कम आता है। टाटा मोटर्स इस गाड़ी की बैटरी पर पूरे 15 साल की लाइफटाइम वारंटी भी दे रही है, जो ग्राहकों की बहुत बड़ी चिंता को दूर कर देती है। इसके अलावा इसमें मिलने वाले छह अलग-अलग टेरेन मोड्स जैसे मड, सैंड और रॉक क्रॉल की वजह से यह खराब रास्तों और ऑफ-रोडिंग पर बेजोड़ साबित होती है।

दूसरी तरफ पेट्रोल या डीजल वेरिएंट उन लोगों के लिए आज भी सबसे व्यावहारिक विकल्प है जो अक्सर ऐसे ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में सफर करते हैं जहाँ अभी फास्ट चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क ठीक से स्थापित नहीं हो पाया है। इसे चलाने वाले ग्राहकों को केवल 5 मिनट में पेट्रोल या डीजल टैंक फुल कराके दोबारा हाईवे पर निकलने की आज़ादी मिलती है। डीजल वेरिएंट का माइलेज भी लगभग 20 kmpl तक का मिल जाता है, जो लंबी दूरी के सफर को बजट में रखता है।

आपके लिए कौन सी सिएरा रहेगी परफेक्ट?

टाटा सिएरा के दोनों ही रूप अपने आप में बेहतरीन हैं। दोनों में आपको एक जैसी मजबूत बिल्ड क्वालिटी, शानदार स्पेस, 622 लीटर का बड़ा बूट स्पेस और सड़क पर चलने पर एक शाही अहसास मिलता है। अगर आपका रोजाना का सफर शहर के अंदर 50 से 100 km के बीच है, आपके पास घर पर गाड़ी खड़ी करके चार्ज करने की सुरक्षित जगह उपलब्ध है और आप भविष्य की नई तकनीक, सुपरफास्ट पिकअप और प्रदूषण मुक्त ड्राइविंग का आनंद लेना चाहते हैं, तो आपको निश्चित रूप से कुछ पैसे अतिरिक्त खर्च करके सिएरा का इलेक्ट्रिक वर्जन ही चुनना चाहिए।

लेकिन इसके विपरीत यदि आपका बजट ₹15 लाख के आसपास है, आप अक्सर लंबी दूरी की अंतर-राज्यीय यात्राएं करते हैं और चार्जिंग के लिए रास्ते में 25-30 मिनट रुकना आपको पसंद नहीं है, तो आपके लिए पेट्रोल या डीजल से चलने वाली सिएरा ही सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा सौदा साबित होगी। बुकिंग करने से पहले अपने नजदीकी शोरूम पर जाकर दोनों गाड़ियों की टेस्ट ड्राइव जरूर लें ताकि आप इनके बीच के असली फर्क को खुद महसूस कर सकें।

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