भारत के ऑटोमोटिव मार्केट में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की डिमांड पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ी है। शुरुआत में लोगों को लगता था कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां सिर्फ धीमी रफ्तार वाले स्कूटर्स तक ही सीमित रहेंगी जिनका इस्तेमाल सिर्फ पास की दुकान से दूध या सब्जी लाने के लिए किया जा सकता है। लेकिन समय के साथ भारतीय ग्राहकों की सोच बदली है और अब लोग परफॉर्मेंस की मांग कर रहे हैं। अगर आप एक ऐसी इलेक्ट्रिक बाइक ढूंढ रहे हैं जो आपके डेली कम्यूट को आसान बनाने के साथ-साथ वीकेंड पर हाईवे पर पेट्रोल स्पोर्ट्स बाइक्स को भी कड़ी टक्कर दे सके, तो आपका ध्यान अल्ट्रावॉयलेट एफ77 पर जरूर गया होगा। बेंगलुरु की इस स्टार्टअप कंपनी ने अपनी इस बाइक का नया और अपडेटेड वर्जन अल्ट्रावॉयलेट एफ77 मैक 2 मार्केट में उतारा है। यह बाइक दिखने में किसी आधुनिक फाइटर जेट जैसी लगती है, जो सड़क पर चलते हुए हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींचती है। लेकिन एक समझदार खरीदार के तौर पर हमें सिर्फ बाहरी लुक पर नहीं जाना चाहिए। मेंसइवी के इस विस्तृत आर्टिकल में हम इस बाइक के सभी टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स, इसके नए फीचर्स, रियल वर्ल्ड रेंज, चार्जिंग से जुड़े खर्चों और इसके फायदे-नुकसान का पूरा विश्लेषण करेंगे ताकि आप यह तय कर सकें कि क्या इस बाइक पर दांव लगाना आपके लिए सही रहेगा।
मोटर, बैटरी और परफॉर्मेंस का पूरा लेखा-जोखा
अल्ट्रावॉयलेट एफ77 मैक 2 को कंपनी ने मुख्य रूप से दो बड़े वेरिएंट्स में पेश किया है। इसमें से पहला स्टैंडर्ड वेरिएंट है और दूसरा इसका ज्यादा पावरफुल रिकॉन वेरिएंट है। इन दोनों वेरिएंट्स के बीच मोटर की पावर और बैटरी की कैपेसिटी को लेकर काफी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। अगर हम इसके बेस यानी स्टैंडर्ड वेरिएंट की बात करें तो इसमें आपको 7.1 kWh का बैटरी पैक मिलता है जो एक 27 kW की इलेक्ट्रिक मोटर को पावर सप्लाई करता है। दूसरी तरफ इसके प्रीमियम रिकॉन वेरिएंट में कंपनी ने 10.3 kWh का बहुत बड़ा बैटरी पैक दिया है। आपको बता दें कि यह बैटरी पैक मौजूदा समय में भारत के किसी भी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर में मिलने वाला सबसे बड़ा बैटरी पैक है। यह बड़ी बैटरी एक पावरफुल 30 kW की मोटर के साथ जुड़ी हुई है जो लगभग 40.2 bhp की मैक्सिमम पावर और 100 Nm का टॉर्क जेनरेट करने की काबिलियत रखती है।
जब आप इस बाइक पर बैठकर इसके थ्रॉटल को थोड़ा सा भी घुमाते हैं, तो इसकी मोटर से मिलने वाला टॉर्क आपको तुरंत महसूस होता है। यह बाइक केवल 2.8 सेकंड के अंदर 0 से 60 kmph की रफ्तार पकड़ लेती है, जो कि शहर के ट्रैफिक में किसी भी गाड़ी को पीछे छोड़ने के लिए काफी है। वहीं 0 से 100 kmph की रफ्तार तक पहुंचने में इसे केवल 7.7 सेकंड का समय लगता है। कंपनी का दावा है कि इसकी टॉप स्पीड 155 kmph तक जाती है। अगर आपने पहले कभी केटीएम आरसी 390 या यामाहा आर3 जैसी तेज पेट्रोल स्पोर्ट्स बाइक चलाई हैं, तो आपको इस इलेक्ट्रिक बाइक की पावर डिलीवरी भी उतनी ही आक्रामक और मजेदार लगेगी। लेकिन पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले इसमें एक बड़ा फायदा यह है कि इसकी पावर डिलीवरी बिल्कुल लीनियर होती है। इलेक्ट्रिक मोटर होने के कारण इसमें आपको बार-बार गियर बदलने की कोई जरूरत नहीं पड़ती, जिससे शहर के भारी ट्रैफिक में भी आपकी राइडिंग बहुत आसान और बिना किसी थकावट के पूरी हो जाती है।
इस बाइक के पूरे स्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए कंपनी ने इसमें स्टील ट्रेलिस फ्रेम का इस्तेमाल किया है। इसके फ्रंट में आपको अपसाइड डाउन यानी इनवर्टेड फोर्क्स सस्पेंशन मिलते हैं और रियर हिस्से में एक प्री-लोड एडजस्टेबल मोनोशॉक सस्पेंशन दिया गया है। ब्रेकिंग को सुरक्षित बनाने के लिए इसके फ्रंट व्हील में 320 mm का बड़ा डिस्क ब्रेक और रियर व्हील में 230 mm का डिस्क ब्रेक मिलता है, जो कि बॉश कंपनी के डुअल चैनल एबीएस यानी एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम के साथ मिलकर काम करता है। इसके अलावा बाइक में अलग-अलग राइडिंग कंडीशंस के हिसाब से 3 मोड्स दिए गए हैं जिन्हें ग्लाइड, कॉम्बैट और बैलिस्टिक नाम दिया गया है। ग्लाइड मोड का इस्तेमाल मुख्य रूप से शहर के भारी ट्रैफिक में किया जाता है जहां रफ्तार से ज्यादा बैटरी की बचत पर ध्यान होता है। कॉम्बैट मोड सामान्य दिनों में सिटी और हाईवे दोनों जगह चलाने के लिए एक अच्छा बैलेंस प्रदान करता है। वहीं इसका सबसे पावरफुल बैलिस्टिक मोड बाइक की पूरी ताकत को बाहर निकाल देता है, हालांकि इस मोड में चलाने पर बैटरी बहुत तेजी से खत्म होती है। मैक 2 मॉडल में कंपनी ने एक और नया फीचर जोड़ा है जो कि 10 लेवल्स का रिजेनरेटिव ब्रेकिंग系统 है। इसका फायदा यह होता है कि जब भी आप चलती बाइक में थ्रॉटल को छोड़ते हैं, तो यह सिस्टम गाड़ी की काइनेटिक एनर्जी को बिजली में बदलकर वापस बैटरी पैक में भेज देता है, जिससे इसकी रेंज में कुछ km का इजाफा हो जाता है।
अल्ट्रावॉयलेट एफ77 मैक 2 टेक्निकल स्पेसिफिकेशन डिटेल्स
| फीचर | स्टैंडर्ड वेरिएंट | रिकॉन वेरिएंट |
| बैटरी पैक कैपेसिटी | 7.1 kWh | 10.3 kWh |
| मोटर की मैक्सिमम पावर | 27 kW | 30 kW |
| मैक्सिमम टॉर्क आउटपुट | 85 Nm | 100 Nm |
| 0 से 60 kmph का समय | 2.9 सेकंड | 2.8 सेकंड |
| 0 से 100 kmph का समय | 8.0 सेकंड | 7.7 सेकंड |
| क्लेम की गई टॉप स्पीड | 135 kmph | 155 kmph |
| कंपनी द्वारा दावा की गई रेंज | 211 km | 323 km |
| फ्रंट सस्पेंशन का प्रकार | इनवर्टेड फोर्क्स | Inverted Forks |
| रियर सस्पेंशन का प्रकार | मोनोशॉक | मोनोशॉक |
| ब्रेकिंग सिस्टम सेफ्टी | डुअल चैनल एबीएस | डुअल चैनल एबीएस |
| बाइक का कुल वजन | 197 kg | 207 kg |
सिटी VS हाईवे रेंज और चार्जिंग कॉस्ट का गणित

सरकारी नियमों के मुताबिक कागजों पर कंपनी इसके रिकॉन वेरिएंट की रेंज 323 km बताती है, लेकिन हम सभी जानते हैं कि असल जिंदगी की सड़कें और ट्रैफिक की स्थिति लैबोरेट्री जैसी नहीं होतीं। जब आप इस बाइक को असल दुनिया में लेकर निकलते हैं तो रेंज पूरी तरह से आपकी राइडिंग स्टाइल और शहर के माहौल पर निर्भर करती. है। उदाहरण के लिए अगर आप दिल्ली, मुंबई या भोपाल के भारी ट्रैफिक वाले रास्तों पर ग्लाइड मोड का इस्तेमाल करके अपनी बाइक को 40 से 50 kmph की औसत स्पीड पर चलाते हैं, जहां आपको बार-बार ब्रेक लगाने की जरूरत पड़ती है, तो वहां इसका रिजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम बहुत अच्छे से काम करता है। ऐसी स्थिति में आपको एक बार फुल चार्ज करने पर 250 से 260 km की रियल वर्ल्ड रेंज बहुत ही आसानी से मिल जाएगी, जो कि आपके रोज के आने-जाने के हिसाब से काफी ज्यादा है। इसके विपरीत, अगर आप अपनी बाइक को लेकर किसी एक्सप्रेसवे या खुले हाईवे पर निकल जाते हैं और वहां बैलिस्टिक मोड चालू करके लगातार 100 से 110 kmph की तेज रफ्तार पर क्रूज करते हैं, तो हवा के दबाव और हाई स्पीड के कारण बैटरी पर लोड बहुत बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में इसकी रेंज घटकर 160 से 180 km तक आ सकती है। इसलिए लंबे सफर पर निकलते समय आपको अपनी रफ्तार और मोड्स का चुनाव बहुत सोच-समझकर करना होगा।
अब बात करते हैं इस बाइक को चार्ज करने में लगने वाले समय की, क्योंकि कोई भी इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदते समय चार्जिंग टाइम एक बहुत बड़ा फैक्टर होता है। अल्ट्रावॉयलेट एफ77 के साथ कंपनी दो अलग-अलग तरह के चार्जर्स का ऑप्शन देती है। अगर आप इसके साथ मिलने वाले स्टैंडर्ड 1.3 kW के होम चार्जर का इस्तेमाल करते हैं, तो इसकी बड़ी बैटरी को 20 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक चार्ज होने में लगभग 5 घंटे का समय लग जाता है। इसका मतलब है कि आप इसे रात में चार्ज पर लगाकर सो सकते हैं और सुबह आपको बाइक पूरी तरह तैयार मिलेगी। लेकिन अगर आपको जल्दी चार्जिंग चाहिए, तो आप कंपनी से अलग से 3.0 kW का बूस्ट चार्जर खरीद सकते हैं। इस फास्ट चार्जर की मदद से वही चार्जिंग टाइम घटकर केवल 2.5 घंटे रह जाता है। इसके अलावा जो लोग अक्सर लंबे सफर पर जाना पसंद करते हैं, उनके लिए कंपनी अपने खुद के यूवी सुपरनोवा डीसी फास्ट चार्जिंग नेटवर्क को भी बढ़ा रही है। इस कमर्शियल फास्ट चार्जर की मदद से बाइक की बैटरी को सिर्फ 45 से 60 मिनट के समय में 20 से 80 प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकता है, जिससे आपका लंबा सफर ज्यादा प्रभावित नहीं होता।
बहुत से लोग इलेक्ट्रिक बाइक सिर्फ इसलिए खरीदते हैं ताकि उनका पेट्रोल पर होने वाला भारी-भरकम खर्च बच सके। आइए हम इसके रिकॉन वेरिएंट की चार्जिंग कॉस्ट और रनिंग कॉस्ट का एक सीधा सा हिसाब लगाते हैं। इस वेरिएंट में 10.3 kWh की बैटरी लगी है। मान लेते हैं कि आपके शहर में घरेलू बिजली का रेट 8 रुपये प्रति यूनिट है। इस हिसाब से अगर आप बैटरी को बिल्कुल जीरो से लेकर 100 प्रतिशत तक फुल चार्ज करते हैं, तो इसमें लगभग 11 यूनिट बिजली की खपत होगी। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि आपकी बाइक सिर्फ 88 रुपये के कुल खर्च में पूरी तरह से चार्ज हो जाएगी। अब अगर हम यह मानकर चलें कि एक फुल चार्ज में यह बाइक असल दुनिया में कम से कम 250 km की दूरी तय करती है, तो आपकी प्रति km की रनिंग कॉस्ट सिर्फ 35 पैसे के आसपास निकलकर आती है। इसके मुकाबले अगर आप मार्केट में मिलने वाली किसी भी 300cc या 400cc की पेट्रोल स्पोर्ट्स बाइक को चलाते हैं, तो वह बाइक बहुत से बहुत 30 kmpl का माइलेज दे पाती है। आज के समय में पेट्रोल की कीमतों को देखते हुए उस पेट्रोल बाइक को चलाने का खर्च लगभग 3.5 रुपये प्रति km आता है। इस साधारण से कैलकुलेशन से यह साफ हो जाता है कि लॉन्ग टर्म में अल्ट्रावॉयलेट एफ77 को चलाना किसी भी पेट्रोल स्पोर्ट्स बाइक के मुकाबले लगभग 10 गुना तक ज्यादा किफायती साबित होता है।
चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेंटेनेंस का कड़वा और मीठा सच
भारत में किसी भी नई टेक्नोलॉजी वाली इलेक्ट्रिक गाड़ी को अपनाते समय ग्राहकों के मन में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर हमेशा एक डर रहता है, जिसे ऑटोमोटिव की भाषा में रेंज एंग्जायटी कहा जाता है। अगर आप दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई या मुंबई जैसे बड़े मेट्रो शहरों में रहते हैं, तो आपको चार्जिंग को लेकर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इन शहरों में पब्लिक फास्ट चार्जर्स का एक अच्छा नेटवर्क तैयार हो चुका है। आप अपने ऑफिस की पार्किंग, बड़े मॉल्स या हाईवे पर बने चार्जिंग स्टेशनों पर जाकर अपनी बाइक को आसानी से चार्ज कर सकते हैं। लेकिन अगर आपका निवास किसी टियर-2 या टियर-3 शहर में है, तो आपको पूरी तरह से अपने घर के चार्जिंग सेटअप पर ही निर्भर रहना होगा। कंपनी ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि भारतीय मौसम के हिसाब से इस बाइक में कोई खराबी न आए, इसलिए इसके पूरे बैटरी पैक को IP67 की रेटिंग दी गई है। इसका मतलब यह है कि भारी बारिश के मौसम में या जलभराव वाली सड़कों पर भी इस बाइक को बिना किसी डर के चलाया जा सकता है, क्योंकि पानी या धूल के कण बैटरी के अंदर नहीं जा सकते। साथ ही इसके एडवांस बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में सेफ्टी के 5 अलग-अलग लेवल्स दिए गए हैं जो तेज गर्मी के दिनों में भी बैटरी को ओवर-हीट होने से बचाते हैं।
एक और बड़ा पहलू जिसकी बात अक्सर लोग नहीं करते, वह है इस बाइक की मेंटेनेंस कॉस्ट। पेट्रोल से चलने वाली पारंपरिक स्पोर्ट्स बाइक्स में आपको हर कुछ हजार km के बाद इंजन ऑयल बदलना पड़ता है, जिसे हम आमतौर पर 1 लीटर या 2 लीटर के डिब्बों में नापते हैं। इसके अलावा उनमें ऑयल फिल्टर, spark plug, एयर फिल्टर और क्लच प्लेट जैसे कई घूमने वाले पार्ट्स होते हैं जो समय के साथ घिस जाते हैं और जिन्हें बदलने में काफी पैसा खर्च होता है। इलेक्ट्रिक बाइक होने के कारण अल्ट्रावॉयलेट एफ77 में ऐसा कोई भी झंझट नहीं है। इसमें न तो कोई इंजन ऑयल डलता है और न ही कोई जटिल गियरबॉक्स होता है। आपको केवल समय-समय पर इसके ब्रेक पैड्स, टायर्स और ब्रेक फ्लूइड जैसी बेसिक चीजों को ही चेक करवाना या बदलना होता है। इस वजह से इसकी सालाना सर्विसिंग का खर्च पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले बेहद कम आता है। इसके साथ ही सरकार की फेम 3 सब्सिडी नीति और अलग-अलग राज्यों की अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसीज के कारण कई जगहों पर इस बाइक को खरीदने पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में पूरी तरह से छूट मिल जाती है, जिससे इसकी ऑन-रोड कीमत को कम रखने में मदद मिलती है।
क्या अल्ट्रावॉयलेट एफ77 सच में वैल्यू फॉर मनी है
कीमत के मामले में अल्ट्रावॉयलेट एफ77 मैक 2 के स्टैंडर्ड वेरिएंट की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 2.99 लाख रुपये रखी गई है, जबकि इसके सबसे टॉप और ज्यादा रेंज वाले रिकॉन वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 3.99 लाख रुपये तक जाती है। इस बजट में भारतीय बाजार में कोई दूसरी परफॉर्मेंस इलेक्ट्रिक बाइक मौजूद नहीं है, इसलिए इसका सीधा मुकाबला मार्केट में पहले से स्थापित केटीएम आरसी 390, टीवीएस अपाचे आरआर 310 और यामाहा आर3 जैसी दमदार पेट्रोल इंजन वाली स्पोर्ट्स बाइक्स से होता है। कई लोगों को इसकी 4 लाख रुपये की कीमत थोड़ी ज्यादा लग सकती है, लेकिन जब हम इसके फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स की तुलना इसके प्रतिद्वंद्वी वाहनों से करते हैं, तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाती है।
अल्ट्रावॉयलेट एफ77 मैक 2 रिकॉन बनाम पेट्रोल स्पोर्ट्स बाइक्स तुलना
| फीचर | अल्ट्रावॉयलेट एफ77 मैक 2 रिकॉन | केटीएम आरसी 390 | यामाहा आर3 |
| इंजन या मोटर का प्रकार | 30 kW इलेक्ट्रिक मोटर | 373 cc पेट्रोल इंजन | 321 cc पेट्रोल इंजन |
| मैक्सिमम टॉर्क आउटपुट | 100 Nm | 39 Nm | 29.5 Nm |
| 0 से 100 kmph का समय | 7.7 सेकंड | 7.1 सेकंड | 6.0 सेकंड |
| अधिकतम टॉप स्पीड | 155 kmph | 170 kmph | 180 kmph |
| दावा की गई रेंज या माइलेज | 323 km प्रति चार्ज | 29 kmpl | 25 kmpl |
| प्रति km रनिंग कॉस्ट | 0.35 रुपये पर km | 3.50 रुपये पर km | 4.00 रुपये पर km |
| एक्स शोरूम कीमत | 3.99 लाख रुपये | 3.18 लाख रुपये | 4.64 लाख रुपये |
इस तुलना से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि अगर हम सिर्फ टॉप स्पीड की बात करें तो पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां इस इलेक्ट्रिक बाइक से थोड़ी आगे निकल जाती हैं। लेकिन जब बात आती है टॉर्क की, तो अल्ट्रावॉयलेट का 100 Nm का टॉर्क केटीएम और यामाहा जैसी स्थापित बाइक्स को बहुत पीछे छोड़ देता है। शहर के ट्रैफिक में जब आपको अचानक किसी गाड़ी को ओवरटेक करना होता है, तो यह तुरंत मिलने वाला टॉर्क बहुत ज्यादा काम आता है और आपको एक बेहतरीन राइडिंग एक्सपीरियंस देता है। जो लोग मोटरसाइकिल चलाते समय इंजन की तेज आवाज, एग्जॉस्ट नोट और गियर शिफ्टिंग के दीवाने हैं, उन्हें शायद पेट्रोल बाइक्स ही ज्यादा पसंद आएंगी। लेकिन अगर आप एक ऐसी राइड पसंद करते हैं जो बिल्कुल शांत हो, जिसमें कोई वाइब्रेशन न हो और जिसकी रनिंग कॉस्ट न के बराबर हो, तो अल्ट्रावॉयलेट आपके लिए एक बेहद आधुनिक और समझदारी भरा विकल्प बनकर उभरती है।
इसके अलावा इस बाइक में आपको कई ऐसे एडवांस और स्मार्ट फीचर्स भी मिलते हैं जो इस बजट की किसी भी पेट्रोल बाइक में देखने को नहीं मिलते। इसमें 5 इंच का एक बड़ा टीएफटी डिस्प्ले दिया गया है जो पूरी तरह से कलर्ड है और इसमें इन-बिल्ट नेविगेशन की सुविधा मिलती है। इस बाइक के अंदर कंपनी का अपना वॉयलेट एआई सिस्टम लगा हुआ है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम लगातार बाइक की स्थिति पर नजर रखता है और इसमें आपको फॉल अलर्ट यानी बाइक गिरने की सूचना, टोइंग अलर्ट यानी गाड़ी खींचे जाने की चेतावनी और एंटी-कोलिजन वार्निंग सिस्टम जैसे बेहतरीन सुरक्षा फीचर्स मिलते हैं जो आपकी राइड को हर मायने में सुरक्षित बनाते हैं।
खरीदें या इंतजार करें
अब हम इस आर्टिकल के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर आते हैं जो आपके निर्णय को आसान बनाएगा। क्या आपको इस समय अपना पैसा लगाकर अल्ट्रावॉयलेट एफ77 मैक 2 खरीद लेनी चाहिए या फिर मार्केट में आने वाले कुछ नए ऑप्शंस का इंतजार करना चाहिए। हमारी रिसर्च और टेस्ट राइड के आधार पर अगर आपका बजट 3 से 4 लाख रुपये के आसपास है और आपकी रोजाना की रनिंग 40 से 50 km के बीच रहती है, साथ ही आप वीकेंड पर छोटे हाईवे ट्रिप्स पर जाना पसंद करते हैं, तो आप इस बाइक को बिना किसी हिचकिचाहट के खरीद सकते हैं। इस बाइक को खरीदने के बाद आपका पेट्रोल और सर्विसिंग पर होने वाला मासिक खर्च इतना कम हो जाएगा कि अगले 4 से 5 साल के अंदर यह बाइक अपनी बढ़ी हुई शुरुआती ऑन-रोड कीमत को पूरी तरह से वसूल कर देगी।
अगर आप भारत के ऐसे प्रमुख शहरों में रहते हैं जहां पर चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत तेजी से विकसित हो रहा है, तो यह आपके गैराज में खड़ी होने वाली एक बहुत ही व्यावहारिक और परफॉर्मेंस ओरिएंटेड स्पोर्ट्स बाइक साबित होगी। इसकी बिल्ड क्वालिटी में कंपनी ने एयरक्राफ्ट-ग्रेड एल्युमिनियम का इस्तेमाल किया है जिससे इसका स्ट्रक्चर काफी मजबूत महसूस होता है। इसका आक्रामक और स्पोर्टी डिजाइन ऐसा है कि जब भी आप इसे लेकर किसी चौराहे पर रुकेंगे, तो लोग मुड़कर इस बाइक को जरूर देखेंगे।
दूसरी तरफ, अगर आपका काम ऐसा है जिसमें आपको अक्सर बिना रुके 300 km से ज्यादा का लंबा सफर तय करना पड़ता है, या फिर आप भारत के किसी ऐसे सुदूर ग्रामीण इलाके में रहते हैं जहां बिजली की कटौती बहुत ज्यादा होती है और पब्लिक फास्ट चार्जिंग का दूर-दूर तक कोई नामो-निशान नहीं है, तो आपके लिए अभी भी एक पेट्रोल स्पोर्ट्स बाइक खरीदना ही ज्यादा सुरक्षित और सही फैसला होगा। हाईवे पर जब आप इस बाइक को लगातार 120 kmph जैसी हाई स्पीड पर चलाते हैं, तो इसकी बैटरी बहुत ही तेजी से डिस्चार्ज होने लगती है जिससे आपको रास्ते में बार-बार रेंज एंग्जायटी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा एक बात का ध्यान और रखना होगा कि इसकी सीट काफी स्टिफ यानी सख्त है और इसका राइडिंग पोस्चर काफी झुका हुआ और एग्रेसिव है। इसका मतलब यह है कि यह बाइक आराम से लंबा सफर तय करने वाली कोई क्रूजर या टूरिंग बाइक नहीं है, बल्कि यह एक विशुद्ध स्पोर्ट्स बाइक है जिसे छोटी और तेज राइड्स के लिए डिजाइन किया गया है।
फाइनल टेक
अल्ट्रावॉयलेट एफ77 मैक 2 ने निश्चित रूप से भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट के सामने एक नया बेंचमार्क स्थापित कर दिया है। इसने उन सभी पुरानी धारणाओं को तोड़ दिया है जो मानती थीं कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां सिर्फ कम रफ्तार और कम दूरी तय करने के लिए ही बनाई जाती हैं। एफ77 ने यह अच्छी तरह साबित किया है कि सही इंजीनियरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी के दम पर इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी हाई परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स सेगमेंट में स्थापित पेट्रोल इंजन वाली मोटरसाइकिलों को उनके ही खेल में कड़ी टक्कर दे सकती हैं।
जैसे-जैसे देश में लिथियम-आयन बैटरी की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी और सरकार की नीतियां इलेक्ट्रिक वाहनों के पक्ष में मजबूत होंगी, वैसे-वैसे आने वाले समय में इन एडवांस्ड बाइक्स की कीमतें और भी कम होने की उम्मीद है। अल्ट्रावॉयलेट कंपनी भी लगातार ओवर द एयर यानी ओटीए सॉफ्टवेयर अपडेट्स के माध्यम से अपनी बाइक्स के बैटरी मैनेजमेंट और फीचर्स को घर बैठे ही अपडेट कर रही है। अगर आप एक प्रीमियम और हाई-टेक ईवी खरीदने का मन पूरी तरह बना चुके हैं, तो अल्ट्रावॉयलेट एफ77 मैक 2 इस समय भारतीय बाजार में मौजूद सबसे बेहतरीन, आधुनिक और भरोसेमंद विकल्प है। यहां आपको सिर्फ तेज रफ्तार नहीं मिलती, बल्कि एक ऐसी सॉलिड इंजीनियरिंग का भरोसा मिलता है जो आने वाले कई सालों तक आपका साथ निभाएगी। हमारी सलाह होगी कि आप अपने नजदीकी डीलरशिप पर जाकर इसकी एक टेस्ट राइड जरूर लें, अपने रोज के रास्तों के हिसाब से इसकी रेंज का गणित समझें, और अगर आपका बजट और जरूरतें इसके साथ सही बैठती हैं, तो यह बाइक आपको बिल्कुल भी निराश नहीं करेगी।








