भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में जब भी रफ्तार और दमदार परफॉर्मेंस की बात होती है, तो बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी अल्ट्रावॉयलेट का नाम सबसे ऊपर आता है। कंपनी ने जब मार्च 2025 में अपने दो क्रांतिकारी प्रोडक्ट्स तैसेरैक्ट और शॉकवेव को दुनिया के सामने शोकेस किया था, तब हर कोई हैरान रह गया था। उस समय कंपनी ने दावा किया था कि इस सुपर ई-स्कूट को 2026 की पहली तिमाही तक बिक्री के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा। हालांकि उस लॉन्च इवेंट में ये स्कूटर्स अपने दम पर स्टेज पर चलकर नहीं आए थे बल्कि इन्हें एक फिक्स्ड प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किया गया था। शुरुआत में कंपनी का प्लान अपनी मशहूर एफ77 स्पोर्ट्स बाइक के आजमाए हुए पावरट्रेन को ही इस स्कूटर में इस्तेमाल करने का था, जिससे लग रहा था कि यह समय पर आ जाएगा। लेकिन अब ऑटोमोबाइल सेक्टर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है कि तैसेरैक्ट का लॉन्च पूरे एक साल के लिए टल गया है और अब यह 2027 की पहली तिमाही में मार्केट में एंट्री करेगा।
इस खबर से उन ग्राहकों को थोड़ा झटका जरूर लगा है जो लंबे समय से इस हाइपर स्कूटर का इंतजार कर रहे थे। लेकिन आपको निराश होने की जरूरत बिल्कुल नहीं है क्योंकि अल्ट्रावॉयलेट दूसरी आम कंपनियों या स्टार्टअप्स की तरह सिर्फ समय नहीं बढ़ा रही है, बल्कि वह इस देरी का इस्तेमाल इस मशीन को पूरी तरह से री-इंजीनियर और अपग्रेड करने में कर रही है। जब कंपनी ने एफ77 के पावरट्रेन को स्कूटर के छोटे चेसिस में फिट करके टेस्ट किया, तो उन्हें थर्मल मैनेजमेंट यानी हीटिंग से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। एक कॉम्पैक्ट स्कूटर के ढांचे के अंदर बाइक का पावरट्रेन अपनी पूरी परफॉर्मेंस नहीं दे पा रहा था और बहुत ज्यादा गर्म हो रहा था। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कंपनी ने एक बड़ा फैसला लिया और अब वे भारत का पहला 100V हाई-वोल्टेज आर्किटेक्चर तैयार कर रहे हैं, जो इस स्कूटर को पूरी तरह बदल देगा।
हाई-वोल्टेज तकनीक से सुधरेगी परफॉर्मेंस और कंपोनेंट्स होंगे छोटे
आम तौर पर भारतीय बाजार में मिलने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में 48V से लेकर 72V तक के आर्किटेक्चर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अल्ट्रावॉयलेट ने तैसेरैक्ट के लिए जो नया 100V का सिस्टम तैयार किया है, वह इस सेगमेंट में गेम चेंजर साबित होने वाला है। इस हाई-वोल्टेज आर्किटेक्चर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे स्कूटर के अंदर इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स जैसे मोटर कंट्रोलर और वायरिंग का साइज काफी छोटा और हल्का हो जाएगा। वजन कम होने और साइज छोटा होने के बावजूद यह नया सिस्टम स्कूटर को बिना किसी हीटिंग इश्यू के 15 kW यानी लगभग 20 hp की भारी-भरकम पीक पावर देने में पूरी तरह सक्षम बनाएगा।
इसके साथ ही कंपनी ने हीटिंग की समस्या को दूर करने के लिए इसकी बैटरी को रेडियल कूलिंग से हटाकर एक्सियल कूलिंग पर अपग्रेड किया है, जिससे थर्मल कंडक्टिविटी पहले के मुकाबले पांच गुना तक बढ़ जाती है। इसका एक और बड़ा फायदा यह होगा कि इस हाई-वोल्टेज बैटरी को अब पहले के मुकाबले दोगुना तेजी से चार्ज किया जा सकेगा। कंपनी ने अभी तक इसके चार्जिंग का सटीक समय तो पूरी तरह साझा नहीं किया है, लेकिन उनके सुपरनोवा फास्ट चार्जर से यह बैटरी मात्र 30 मिनट के भीतर 20 से 80 प्रतिशत तक चार्ज हो जाएगी। कंपनी के रिसर्च और डेवलपमेंट हेडक्वार्टर में एफ77 के पुराने बड़े मोटर कंट्रोलर और तैसेरैक्ट के नए छोटे मोटर कंट्रोलर को साथ देखने पर साफ पता चलता है कि कंपनी ने इस पर कितना बारीक और एडवांस काम किया है।
ग्राहकों के फीडबैक पर बदला लुक और बेहतर हुआ डिजाइन
मार्च 2025 में जब इसके प्रोटोटाइप को पहली बार दिखाया गया था, तब उसका डिजाइन काफी आक्रामक और वाइल्ड था। इसके बाद कंपनी ने उस प्रोटोटाइप को देश के अलग-अलग डीलरशिप्स पर भेजा ताकि संभावित ग्राहकों से उनका फीडबैक लिया जा सके। ग्राहकों ने इसके लुक की तारीफ तो की, लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल, आराम और व्यावहारिक जरूरतों को लेकर कुछ सुझाव भी दिए। कंपनी ने इन सभी सुझावों को बेहद गंभीरता से लिया और अब इसका फाइनल डिजाइन पूरी तरह से लॉक कर दिया गया है। नया फाइनल मॉडल दिखने में कॉन्सेप्ट जैसा ही है लेकिन इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
सबसे पहला बदलाव इसके सामने वाले हिस्से में हुआ है। ग्राहकों का कहना था कि स्कूटर का फ्रंट पैनल काफी चौड़ा है, जिससे शहर के भारी ट्रैफिक और तंग गलियों के बीच से इसे निकालने में थोड़ी परेशानी हो सकती है। इसलिए कंपनी ने इसके फ्रंट पैनल के एंगल्स को बदला है और इसकी कुल चौड़ाई को थोड़ा कम कर दिया है ताकि यह एक परफेक्ट सिटी-स्लाइसिंग टू-व्हीलर बन सके। इसके अलावा सस्पेंशन माउंटिंग पोजीशन में भी सुधार किया गया है, हालांकि इसके सिग्नेचर 14-इंच के बड़े व्हील्स और स्विंगआर्म डिजाइन को वैसे ही बरकरार रखा गया है।
लंबी सीट और बेहतर लेगरूम के साथ बढ़ा आराम का स्तर

पुराने प्रोटोटाइप के मुकाबले इस नए वर्जन में स्पेस और कम्फर्ट पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया गया है। पहले की सीट थोड़ी छोटी और स्पोर्टी थी, जिसे अब पूरी तरह से री-प्रोफाइल करके लंबा और ज्यादा चौड़ा बनाया गया है। इस नई आरामदायक सीट पर अब राइडर और पीछे बैठने वाला पिलियन पैसेंजर, दोनों ही लंबी दूरी का सफर बिना किसी थकान के तय कर सकते हैं। सीट को बड़ा करने के लिए कंपनी ने इसके पूरे रियर सबफ्रेम की लंबाई को थोड़ा बढ़ा दिया है।
इसके साथ ही स्कूटर के बॉडीवर्क को भी थोड़ा रिपोजीशन किया गया है, जिसकी वजह से पैरों को रखने के लिए floorboard पर अब काफी ज्यादा जगह यानी लेगरूम मिलता है। व्यवहारिकता को बढ़ाने के लिए कंपनी ने इसके पिछले हिस्से में कॉन्सेप्ट मॉडल वाले स्विंगआर्म-माउंटेड टायर हगर को हटा दिया है और उसकी जगह एक बेहद उपयोगी और पारंपरिक मडगार्ड सेटअप दिया है, जो बारिश के दिनों में कीचड़ को ऊपर आने से पूरी तरह रोकेगा। कॉम्पैक्ट हाई-वोल्टेज आर्किटेक्चर की वजह से सीट की ऊंचाई को 780 mm पर ही सीमित रखा गया है, जो औसत लंबाई वाले भारतीय राइडर्स के लिए एकदम सही है।
कंटेनर जैसा बूट स्पेस और बुकिंग करने वालों के लिए राहत की बात
इतनी भारी री-इंजीनियरिंग और बदलावों के बाद भी अल्ट्रावॉयलेट ने अपने उन ग्राहकों को एक बड़ी राहत दी है जिन्होंने इस स्कूटर को शुरुआती दिनों में ही प्री-बुक कर लिया था। कंपनी का वादा है कि जिन लोगों ने इसे पहले ही बुक कर लिया है, उनके लिए ₹1.2 लाख की पुरानी शुरुआती कीमत में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि आम ग्राहकों के लिए इसकी एक्स-शोरूम कीमत लॉन्च के समय ₹1.45 लाख से शुरू होकर ₹2.00 लाख तक जाने की उम्मीद है।
व्यावहारिकता के मामले में इसका अंडर-सीट बूट स्पेस सबसे बड़ा आकर्षण है। कंपोनेंट्स के छोटे होने की वजह से सीट के नीचे 34 litre की विशाल स्टोरेज कैपेसिटी मिलती है। यह बूट स्पेस इतना बड़ा है कि इसके अंदर आप एक प्रीमियम फुल-फेस हेलमेट, अपनी राइडिंग गियर, लैपटॉप बैग या बाजार का ढेर सारा सामान बहुत ही आसानी से रख सकते हैं। कंपनी इस स्कूटर को तीन अलग-अलग बैटरी पैक साइज के साथ बाजार में उतारेगी जो 3.5 kWh, 5 kWh और 6 kWh की क्षमता वाले होंगे।
अल्ट्रावॉयलेट तैसेरैक्ट वेरिएंट्स और संभावित स्पेसिफिकेशन्स
नीचे दी गई विस्तृत तालिका के माध्यम से आप इस हाइपर स्कूटर के तीनों वेरिएंट्स, उनकी बैटरी क्षमता, रेंज और परफॉर्मेंस से जुड़े आंकड़ों को एक ही बार में समझ सकते हैं।
अल्ट्रावॉयलेट तैसेरैक्ट वेरिएंट तुलना तालिका
| वेरिएंट का नाम | बैटरी क्षमता | आईडीसी रेंज | अधिकतम रफ्तार | एक्सीलरेशन (0-40 kmph) | अनुमानित एक्स-शोरूम कीमत |
| तैसेरैक्ट 3.5 kWh | 3.5 kWh | 162 km | 125 kmph | 1.9 सेकंड | ₹1.45 लाख |
| तैसेरैक्ट 5 kWh | 5 kWh | 220 km | 125 kmph | 1.9 सेकंड | ₹1.75 लाख |
| तैसेरैक्ट 6 kWh (फ्लैगशिप) | 6 kWh | 261 km | 125 kmph | 1.9 सेकंड | ₹2.00 लाख |
भविष्य के फीचर्स और एडवांस्ड एआई टेक्नोलॉजी का तड़का
भले ही इस स्कूटर के लॉन्च में थोड़ा वक्त लग रहा है, लेकिन कंपनी इसके अंदर मिलने वाले फीचर्स की लिस्ट में कोई कटौती नहीं कर रही है। इसके टॉप वेरिएंट्स में आपको रडार असिस्टेड एआरएएस 360-डिग्री अवेयरनेस तकनीक मिलेगी। इसमें 77 GHz के फ्रंट और रियर रडार मॉड्यूल्स लगाए गए हैं, जो राइडर को ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन, कोलिजन अलर्ट और लेन चेंज असिस्ट जैसी सुरक्षा प्रदान करेंगे, जो भारत के अनियंत्रित ट्रैफिक में बेहद मददगार साबित होंगे। इसके अलावा इसमें इन-बिल्ट स्मार्ट फ्रंट और रियर डैशकैम भी दिए जाएंगे जो रास्ते के मौसम और इलाके को रीड करके स्कूटर के सेटअप को खुद ही एडजस्ट कर लेंगे।
राइडर को सभी जरूरी जानकारियां देने के लिए इसमें एक नया 7-इन-च का फुल-कलर टीएफटी डिस्प्ले दिया जाएगा, जो ऑन-बोर्ड जीपीएस नेविगेशन, ब्लूटूथ और वाई-फाई कनेक्टिविटी के साथ आएगा। इसमें कंपनी के एक्स47 मॉडल की तरह ही ऑन-बोर्ड चार्जर भी मिलेगा। राइडिंग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए इसमें दो लेवल का ट्रैक्शन कंट्रोल, चार लेवल का डायनेमिक रीजनेरेटिव ब्रेकिंग, डुअल-चैनल एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) और चढ़ाई पर गाड़ी को पीछे लुढ़कने से रोकने के लिए हिल होल्ड कंट्रोल जैसे फीचर्स वेरिएंट के आधार पर बांटे जाएंगे।
मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में बड़ा उछाल और बुकिंग का भारी आंकड़ा
आने वाले कुछ महीने इस बेंगलुरु बेस्ड स्टार्टअप कंपनी के लिए उनके पूरे इतिहास में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाले हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें न सिर्फ अपनी इंजीनियरिंग को फाइनल टच देना है, बल्कि अपनी उत्पादन क्षमता को भी कई गुना बढ़ाना होगा। वर्तमान समय में कंपनी अपने प्लांट से हर महीने केवल 500 से 600 यूनिट्स का ही निर्माण कर पाती है, जो कि इस नए स्कूटर की डिमांड को देखते हुए बहुत कम है। इसलिए कंपनी अपने मौजूदा प्लांट में एक दूसरी नई असेंबली लाइन जोड़कर अपनी क्षमता को बढ़ाकर 5,000 यूनिट्स प्रति महीने करने की तैयारी में है।
इसके अलावा कंपनी को कर्नाटक में एक नए दूसरे प्लांट को स्थापित करने के लिए भी बातचीत करनी पड़ रही है क्योंकि कंपनी के पास तैसेरैक्ट और उनके दूसरे आने वाले प्रोडक्ट्स के लिए अब तक 70,000 से ज्यादा की भारी-भरकम प्री-बुकिंग आ चुकी है। इतने बड़े बुकिंग आंकड़े को समय पर डिलीवर करना कंपनी के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी दोनों है।
बाजार पर क्या होगा असर?
अल्ट्रावॉयलेट तैसेरैक्ट सिर्फ एक साधारण इलेक्ट्रिक स्कूटर नहीं है, बल्कि यह भारतीय दो-पहिया इंजीनियरिंग का एक ऐसा मास्टरपीस बनने जा रहा है जो परफॉर्मेंस और सेफ्टी के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ देगा। हालांकि एक साल की देरी ग्राहकों के लिए थोड़ा इंतजार जरूर बढ़ाएगी, लेकिन जो बदलाव और अपग्रेड कंपनी इस 100V आर्किटेक्चर के साथ ला रही है, वह इस इंतजार को पूरी तरह से वसूल कर देगा। 125 kmph की टॉप स्पीड, 261 km की लंबी रेंज और रडार जैसे फीचर्स इस स्कूटर को मार्केट में सबसे अनोखा बनाते हैं।
यदि आपने भी इस स्कूटर को पहले ही प्री-बुक कर लिया है, तो आपको पुरानी कीमत पर ही एक बेहद आधुनिक और फ्यूचर-प्रूफ मशीन मिलने वाली है। वहीं नए खरीदारों को 2027 की शुरुआत तक एक ऐसा सुपर स्कूटर देखने को मिलेगा जो सीधे तौर पर बड़ी स्पोर्ट्स बाइक्स को कड़ी टक्कर देगा। कंपनी के बेंगलुरु टेक सेंटर में काम कर रहे 250 से अधिक इंजीनियर्स की मेहनत यह साफ बयां करती है कि वे भारत में कुछ ऐसा बना रहे हैं जो आज तक किसी ने नहीं बनाया।









