बिजली की रफ्तार और स्पेस-एज डिजाइन, अल्ट्रावॉयलेट टेसेरैक्ट का 100V आर्किटेक्चर बदलने जा रहा है टू-व्हीलर की दुनिया

Ultraviolette Tesseract Scooter
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भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में जब भी रफ्तार और बेहतरीन इंजीनियरिंग की बात होती है, तो बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी अल्ट्रावॉयलेट ऑटोमोटिव का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है। अपनी प्रीमियम और बेहद तेज रफ्तार एफ़77 इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल से तहलका मचाने के बाद, अब यह कंपनी एक बिल्कुल नए सेगमेंट में कदम रखने जा रही है। अल्ट्रावॉयलेट बहुत जल्द भारतीय बाजार में अपना पहला सुपर-प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, जिसका नाम अल्ट्रावॉयलेट टेसेरैक्ट रखा गया है। यह कोई आम स्कूटर नहीं है जो आपको सिर्फ घर से सब्जी मंडी या दफ्तर तक ले जाए। यह भारतीय ऑटोमोटिव इतिहास का पहला ऐसा स्कूटर होने जा रहा है जो परफॉर्मेंस और टेक्नोलॉजी के सारे पुराने रिकॉर्ड्स को पूरी तरह से तहस-नहस कर देगा।

शुरुआती दौर में इस स्कूटर को थोड़ा पहले लॉन्च किया जाना था, लेकिन कंपनी ने ग्राहकों से मिले फीडबैक और देश भर में किए गए रोडशोज के बाद इसके पूरे प्लेटफॉर्म को एक नेक्स्ट लेवल पर ले जाने का फैसला किया। इसी वजह से अब इस स्कूटर को बिल्कुल नए और भारत के पहले 100V स्कूटर आर्किटेक्चर के साथ जनवरी 2027 में आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया जाएगा, और इसकी डिलीवरी भी उसी के तुरंत बाद शुरू कर दी जाएगी। अल्ट्रावॉयलेट ने इस स्कूटर को एक मैक्सी-स्कूटर्स की तरह डिजाइन किया है, जो दिखने में जितना आक्रामक है, चलने में उससे कहीं ज्यादा खतरनाक और तेज है। आज के इस बेहद खास और गहराई से लिखे गए लेख में हम इस अपकमिंग स्कूटर की उस क्रांतिकारी तकनीक के बारे में बात करेंगे जो इसे भारत का सबसे एडवांस्ड टू-व्हीलर बनाती है।

क्या है यह क्रांतिकारी 100V आर्किटेक्चर और क्यों यह आम स्कूटर्स के मुकाबले तीन गुना ज्यादा ताकतवर है

अगर हम भारत में मिलने वाले मौजूदा समय के सबसे बेहतरीन इलेक्ट्रिक स्कूटर्स जैसे ओला, एथर या टीवीएस को देखें, तो उनकी पूरी बैटरी और मोटर का सिस्टम आमतौर पर 48V या 60V के आर्किटेक्चर पर काम करता है। लेकिन अल्ट्रावॉयलेट को अपने टेसेरैक्ट स्कूटर से कुछ ऐसा परफॉर्मेंस निकालना था जो आज तक किसी ने सोचा भी न हो। कंपनी का लक्ष्य इस स्कूटर से लगभग 15 kW यानी करीब 20 hp की पीक पावर हासिल करना था। इतनी भारी ताकत को एक सामान्य 48V या 60V के सिस्टम पर चलाना मुमकिन नहीं था, क्योंकि ऐसा करने पर तारों में करंट बहुत ज्यादा बढ़ जाता और पूरी गाड़ी में बहुत भयंकर हीट यानी गर्मी पैदा होती।

इसी समस्या को हल करने के लिए अल्ट्रावॉयलेट ने भारत का पहला 100V स्कूटर आर्किटेक्चर तैयार किया। हाई वोल्टेज होने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि समान पावर निकालने के लिए सिस्टम में करंट की मात्रा बहुत कम हो जाती है। जब करंट कम होता है, तो स्कूटर के भीतर इस्तेमाल होने वाले बिजली के तार काफी पतले और हल्के हो जाते हैं, जिससे पूरी गाड़ी का वजन कम रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा, कम करंट की वजह से गाड़ी के मोटर और बैटरी पैक में हीटिंग की समस्या बिल्कुल ना के बराबर हो जाती है। यह नया 100V प्लेटफॉर्म इंडस्ट्री के औसत स्कूटर्स के मुकाबले लगभग 3 गुना ज्यादा पावर और 2 गुना ज्यादा तेज चार्जिंग स्पीड देने की क्षमता रखता है। हालांकि, 60V से ऊपर के सिस्टम को ऑटोमोटिव नियमों में हाई-विद्युत की श्रेणी में रखा जाता है, जिसके लिए बहुत कड़े सुरक्षा इंतजाम, विशेष इंसुलेशन और इंटरलॉक्स की जरूरत होती है। अल्ट्रावॉयलेट ने अपनी एफ़77 रेसिंग मोटरसाइकिल के अनुभवों का इस्तेमाल करके इस स्कूटर को अंदर से पूरी तरह सुरक्षित बनाया है।

सुपरबाइक जैसी परफॉर्मेंस जो सिर्फ 2.9 सेकंड में उड़ा देगी आपके होश, जानिए इसके तीनों दमदार वेरिएंट्स

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अल्ट्रावॉयलेट टेसेरैक्ट का परफॉर्मेंस डेटा इतना तगड़ा है कि इसे देखकर अच्छे-अच्छे पेट्रोल स्कूटर्स और मोटरसाइकिल के पसीने छूट जाएं। कंपनी इस स्कूटर को अपनी सबसे भरोसेमंद एसआरबी-6 बैटरी पैक टेक्नोलॉजी के साथ बाजार में उतारेगी। ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे तीन अलग-अलग बैटरी और रेंज ऑप्शंस के साथ पेश किया जाएगा, जिनका विवरण इस प्रकार है।

सबसे पहला बेस मॉडल टेसेरैक्ट 3.5 होगा, जिसमें 3.5 kWh का बैटरी पैक मिलेगा। यह वेरिएंट लगभग 10 kW की पीक पावर जनरेट करेगा और इसकी आईडीसी सर्टिफाइड रेंज करीब 162 km होने वाली है। इसके बाद दूसरा मिड-वेरिएंट टेसेरैक्ट 5 आएगा, जो 5 kWh की बड़ी बैटरी के साथ 15 kW की पूरी ताकत पैदा करेगा और इसकी रेंज लगभग 220 km तक जाएगी। सबसे टॉप-एंड मॉडल टेसेरैक्ट 6 होने वाला है, जिसमें 6 kWh का विशाल बैटरी पैक दिया जाएगा। यह वेरिएंट भी 15 kW की पीक पावर जनरेट करेगा और एक बार फुल चार्ज होने पर यह पूरे 261 km की बेजोड़ रेंज का दावा करता है।

रफ्तार के शौकीनों के लिए इसके टॉप वेरिएंट्स किसी तोहफे से कम नहीं हैं। यह स्कूटर मात्र 2.9 सेकंड के भीतर ही 0 से 60 kmph की रफ्तार पकड़ लेता है, जो कि अच्छे-अच्छे गियर वाले पेट्रोल बाइक्स को भी पीछे छोड़ देने के लिए काफी है। इसकी टॉप स्पीड 125 km/h तक जाती है। चार्जिंग को सुपरफास्ट बनाने के लिए कंपनी इसके साथ अपना सुपरनोवा चार्जर देगी, जो इस स्कूटर को केवल 30 मिनट से भी कम समय में 20 से 80% तक चार्ज करने की काबिलियत रखता है। इसके साथ ही इसमें कई राइडिंग मोड्स, 4 लेवल्स के डायनेमिक रिजेनरेटिव ब्रेकिंग, 2 लेवल्स की ट्रैक्शन कंट्रोल तकनीक (जो गीली और रेतीली सड़कों पर फिसलने से बचाती है), हिल होल्ड और पार्क असिस्ट जैसे फीचर्स भी मिलेंगे।

रडार और स्मार्ट डैशकैम से लैस भारत का पहला स्कूटर जो हादसों को होने से पहले ही रोक देगा

सुरक्षा के मामले में अल्ट्रावॉयलेट टेसेरैक्ट ने जो कदम उठाया है, वह आज से पहले भारतीय टू-व्हीलर इतिहास में कभी नहीं देखा गया। इस स्कूटर में रडार पर आधारित एडवांस राइडर असिस्टेंस सिस्टम यानी एरास (ARAS) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक आमतौर पर केवल महंगी लग्जरी कारों या फिर बहुत प्रीमियम सुपरबाइक्स में ही देखने को मिलती है। इस स्कूटर के आगे और पीछे दोनों तरफ विशेष रडार सेंसर्स लगाए गए हैं जो गाड़ी के आस-पास 360-डिग्री का एक सुरक्षा कवच बना देते हैं।

यह रडार सिस्टम चलते सफर में आपको सामने से होने वाली टक्कर की चेतावनी देता है और आपके ठीक पीछे या साइड में आने वाले वाहनों के लिए ब्लाइंड-स्पॉट डिटेक्शन अलर्ट जारी करता है। यानी अगर आपकी नजर के पीछे से कोई गाड़ी बहुत तेजी से आपको ओवरटेक करने की कोशिश कर रही होगी, तो इसके ओम्नीसेंस मिरर्स यानी ओआरवीएम में लगे विशेष एलईडी लाइट्स तुरंत ब्लिंक करके आपको सावधान कर देंगे। इसके अलावा, इसके फ्रंट में एक बेहद इंटेलिजेंट स्मार्ट डैशकैम दिया गया है जो ना सिर्फ आपकी पूरी राइड को रिकॉर्ड करता है, बल्कि सड़क की बनावट, मौसम और सामने के रास्तों को खुद समझकर स्कूटर की सेटिंग्स को ऑटोमैटिकली एडजस्ट करने में मदद करता है। इसके साथ ही दोनों पहियों में डिस्क ब्रेक्स के साथ ड्यूल-चैनल एबीएस और डायनेमिक स्टेबिलिटी कंट्रोल जैसी जीवन रक्षक तकनीकें बिल्कुल स्टैंडर्ड दी गई हैं।

एथर और ओला के प्रीमियम स्कूटर्स के मुकाबले तकनीकी और परफॉर्मेंस के मामले में कहां टिकता है टेसेरैक्ट

इस नए परफॉर्मेंस किंग की ताकत को और भी बारीकी से समझने के लिए हमें इसका मुकाबला बाजार के मौजूदा दिग्गजों से करना होगा। नीचे दी गई तालिका में हमने अल्ट्रावॉयलेट टेसेरैक्ट के टॉप वेरिएंट, एथर 450X और ओला S1 प्रो के बीच के सभी मुख्य तकनीकी आंकड़ों को बहुत ही अच्छे से सजाया है ताकि आपको असली फर्क साफ-साफ समझ आ सके।

तकनीकी और परफॉर्मेंस के पहलूअल्ट्रावॉयलेट टेसेरैक्ट (टॉप वेरिएंट)एथर 450X (Ather 450X)ओला S1 प्रो (Ola S1 Pro Gen 2)
आर्किटेक्चर का प्रकार100V एडवांस हाई-वोल्टेज प्लेटफॉर्म48V-60V पारंपरिक प्लेटफॉर्म60V पारंपरिक प्लेटफॉर्म
मोटर की पीक पावर15 kW (लगभग 20 hp)6.4 kW (लगभग 8.5 hp)11 kW (लगभग 14.7 hp)
0 से 60 km/h की रफ्तारमात्र 2.9 सेकंडलगभग 3.3 सेकंडलगभग 4.3 सेकंड
अधिकतम टॉप स्पीड125 km/h90 km/h120 km/h
सबसे बड़ी बैटरी क्षमता6 kWh (SRB-6 पैक)3.7 kWh4 kWh
एआरएआई या आईडीसी रेंज261 km150 km195 km
रडार सुरक्षा (ADAS/ARAS)हाँ (360-डिग्री फ्रंट और रियर रडार)नहींनहीं
बैटरी पर मिलने वाली वारंटी8 वर्ष या 2,00,000 km5 वर्ष या 60,000 km8 वर्ष या 80,000 km

एयरक्राफ्ट जैसा मस्कुलर लुक और 34 लीटर का बूट स्पेस जो हर जरूरत को करेगा पूरा

अल्पाइन और फाइटर जेट्स से प्रेरित होकर बनाए गए इस स्कूटर का डिजाइन इतना शानदार है कि कोई भी इसे पहली नजर में देखता रह जाए। इसमें बहुत ही शार्प लाइन्स, बोल्ड कट्स और एक मस्कुलर मैक्सी-स्कूटर वाला लुक दिया गया है। इसके फ्रंट में ट्वीन प्रोजेक्टर एलईडी हेडलैंप्स के साथ तैरती हुई फ्लोटिंग डीआरएल दी गई हैं जो रात के अंधेरे को भी दिन की तरह रोशन कर देती हैं। डिजाइन के साथ-साथ कंपनी ने इसकी व्यावहारिकता और आराम का भी पूरा ख्याल रखा है। 100V आर्किटेक्चर की वजह से इसकी वायरिंग बहुत पतली हो गई है, जिसकी वजह से कंपनी को इसके फ्लोरबोर्ड यानी पैर रखने की जगह को काफी बड़ा और आरामदायक बनाने में मदद मिली है।

इस स्कूटर की सीट के नीचे पूरे 34 लीटर का एक बहुत ही विशाल अंडर-सीट स्टोरेज या बूट स्पेस मिलता है। यह बूट स्पेस इतना बड़ा है कि इसमें आपका पूरा चेहरा ढकने वाला फुल-फेस हेलमेट, आपके रोजमर्रा के सामान और यहाँ तक कि एक बड़ा ड्रोन बैग भी बहुत आसानी से समा सकता है। इसके अलावा इसमें आपको बिना चाबी के गाड़ी स्टार्ट करने की कीलेस एक्सेस की सुविधा और सफर के दौरान अपने फोन को चार्ज करने के लिए एक वायरलेस फोन चार्जिंग पैड भी मिल जाता है। इसके डैशबोर्ड पर 7 इंच का एक बहुत ही हाई-कॉन्ट्रास्ट टीएफटी फुल-कलर डिस्प्ले दिया गया है, जो इन-बिल्ट गूगल मैप्स नेविगेशन, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, कॉल और एसएमएस अलर्ट्स, राइडर एनालिटिक्स और समय-समय पर आने वाले ओटीए सॉफ्टवेयर अपडेट्स को पूरी तरह सपोर्ट करता है।

8 साल और 2 लाख km की ऐतिहासिक वारंटी के साथ कंपनी ने ग्राहकों को दिया बेफिक्री का भरोसा

इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ खरीदते समय भारतीय ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा डर यही रहता है कि कुछ सालों बाद अगर इसकी बैटरी खराब हो गई, तो उसे बदलने में बहुत भारी खर्च आ जाएगा। ग्राहकों के इसी डर को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए अल्ट्रावॉयलेट कंपनी ने अपने टेसेरैक्ट स्कूटर के साथ एक बहुत ही ऐतिहासिक और अविश्वसनीय बैटरी वारंटी की घोषणा की है। कंपनी अपने इस नए एसआरबी-6 बैटरी पैक पर पूरे 8 वर्ष या 2,00,000 km (जो भी पहले पूरा हो) की शानदार वारंटी दे रही है।

यह वारंटी कवरेज इस सेगमेंट में मिलने वाले किसी भी अन्य स्कूटर के मुकाबले बहुत ज्यादा है। यह कदम दिखाता है कि कंपनी को अपनी थर्मल मैनेजमेंट तकनीक, सेल की केमिस्ट्री और अपनी सुरक्षा प्रणालियों पर कितना गहरा भरोसा है। इस बैटरी पैक को सुरक्षित रखने के लिए कंपनी ने इसमें थर्मल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सॉफ्टवेयर लेवल की कई परत वाली सुरक्षा प्रणालियां लगाई हैं, जो अत्यधिक गर्मी या भारी लोड के दौरान भी बैटरी के तापमान को हमेशा नियंत्रण में रखती हैं। इसका मतलब यह है कि आप इस स्कूटर को बिना किसी चिंता के सालों-साल लाखों km तक मजे से चला सकते हैं।

क्या होगी इसकी अनुमानित कीमत और कौन से ग्राहकों के लिए यह स्कूटर बनने जा रहा है पहली पसंद

अब बात करते हैं उस सबसे जरूरी पहलू की जिसका इंतजार हर कोई कर रहा है कि इस बेहतरीन और हाइटेक सुपर-स्कूटर को अपने घर लाने के लिए आपको कितने पैसे खर्च करने होंगे। क्योंकि यह एक हाई-परफॉर्मेंस मैक्सी-स्कूटर है और इसमें रडार जैसी बेहतरीन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, इसलिए इसकी कीमत भी थोड़ी प्रीमियम रेंज में होने वाली है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, अल्ट्रावॉयलेट टेसेरैक्ट की एक्स-शोरूम कीमत इसके अलग-अलग वेरिएंट्स के आधार पर लगभग ₹ 1.45 लाख से शुरू होकर ₹ 2.00 लाख तक जाने की उम्मीद है। हालांकि, जो ग्राहक इसकी शुरुआती बुकिंग करेंगे, उन्हें कंपनी की तरफ से एक विशेष इंट्रोडक्टरी ऑफर मिल सकता है, जिसके तहत इसकी शुरुआती कीमत ₹ 1.20 लाख से ₹ 1.45 लाख के बीच हो सकती है।

यह स्कूटर उन कामकाजी प्रोफेशनल्स, युवाओं और ऑटोमोटिव के शौकीनों के लिए पहली पसंद बनने जा रहा है जो एक सामान्य कम्यूटर स्कूटर से बोर हो चुके हैं और अपने लिए एक ऐसा वाहन चाहते हैं जो पर्यावरण को नुकसान भी न पहुंचाए और सड़क पर चलते समय उन्हें एक स्पोर्टी मोटरसाइकिल जैसी रफ्तार और रोमांच का अहसास कराए। इसकी बुकिंग्स कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर बहुत जल्द पूरी तरह से ओपन कर दी जाएंगी और इसके अंतिम स्पेसिफिकेशन्स और वेरिएंट्स की पूरी जानकारी साल 2027 की पहली तिमाही की शुरुआत में सबके सामने अनलॉक कर दी जाएगी।

नई तकनीक के साथ आने वाली चुनौतियां और भारतीय बाजार के लिए इस स्कूटर के असली मायने

भले ही इसका 100V आर्किटेक्चर और रडार सिस्टम सुनने में बहुत ही कमाल के लगते हैं, लेकिन इस तरह की नई तकनीक अपने साथ कुछ बड़ी चुनौतियां भी लेकर आती है। एक सामान्य 48V के स्कूटर के मुकाबले 100V के हाई-वोल्टेज स्कूटर की सर्विसिंग और उसके पार्ट्स की सप्लाई चेन को बनाए रखना थोड़ा ज्यादा पेचीदा काम होता है। इसके लिए अल्ट्रावॉयलेट को पूरे देश में अपने डीलरशिप और सर्विस सेंटर्स के नेटवर्क को बहुत मजबूत करना होगा और वहां के मैकेनिक्स को हाई-विद्युत सुरक्षा के लिए विशेष ट्रेनिंग देनी होगी। इसके अलावा, भारतीय सड़कों के भारी ट्रैफिक और दो सवारियों के साथ इसका असल दुनिया में रेंज टेस्ट कैसा रहता है, यह देखना भी काफी महत्वपूर्ण होगा।

इन चुनौतियों के बावजूद, अल्ट्रावॉयलेट का यह कदम यह साबित करता है कि भारतीय कंपनियां अब सिर्फ दुनिया की नकल नहीं कर रही हैं, बल्कि खुद नई तकनीकों का आविष्कार करके पूरी दुनिया को रास्ता दिखा रही हैं। टेसेरैक्ट स्कूटर का आना इस बात का साफ संकेत है कि भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट अब पूरी तरह से मैच्योर हो चुका है। अब ग्राहक सिर्फ एवरेज या किफायती गाड़ियाँ नहीं ढूंढ रहे, बल्कि वे बेहतरीन परफॉर्मेंस, इंटरनेशनल लेवल की सेफ्टी और अत्याधुनिक तकनीक के लिए थोड़ा एक्स्ट्रा पैसा खर्च करने को भी पूरी तरह तैयार हैं। जनवरी 2027 में होने वाले इसके लॉन्च पर पूरे ऑटोमोटिव जगत की निगाहें टिकी रहने वाली हैं।

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