भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) का बाज़ार इस समय एक बहुत ही शानदार और तेज़ रफ़्तार वाले दौर से गुज़र रहा है। अगर हम कुछ साल पहले की बात करें, तो सड़क पर कोई इलेक्ट्रिक कार दिखना एक बड़ी बात होती थी, लेकिन आज के समय में टाटा नेक्सॉन, पंच ईवी या एमजी कॉमेट जैसी गाड़ियाँ हर गली-मोहल्ले में आम हो गई हैं। आंकड़ों की बात करें तो 2025 में भारत का इलेक्ट्रिक कार मार्केट लगभग 1.44 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आंका गया है और उम्मीद है कि 2034 तक यह बढ़कर 50.50 बिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा । यह 48% से भी ज़्यादा की सालाना ग्रोथ रेट है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा नंबर है ।
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की इस बम्पर सेल के पीछे सबसे बड़ा हाथ सरकार की शानदार नीतियों और पेट्रोल-डीज़ल के लगातार बढ़ते दामों का है । लोग अब पर्यावरण को लेकर भी जागरूक हो रहे हैं और अपनी जेब बचाने के लिए सस्टेनेबल और सस्ते विकल्पों की तरफ जा रहे हैं। लेकिन, जब भी कोई आम आदमी कोई नई ईवी खरीदने शोरूम जाता है, तो उसके दिमाग में सबसे पहला डर ‘रेंज एंग्जायटी’ का होता है। यानी, “अगर रास्ते में मेरी गाड़ी की बैटरी खत्म हो गई, तो क्या होगा? क्या मुझे समय पर चार्जर मिलेगा? और अगर चार्जर मिल भी गया, तो क्या वो काम कर रहा होगा?”
यहीं पर एंट्री होती है इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग ऐप्स की। आज के समय में भारत में सिर्फ ईवी खरीदना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके मोबाइल फ़ोन में एक सही और भरोसेमंद चार्जिंग ऐप का होना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। एक समय था जब लोगों को चार्जर ढूंढने के लिए परेशान होना पड़ता था, लेकिन आज की सबसे बड़ी समस्या चार्जर ढूंढना नहीं, बल्कि ‘ऐप्स की भीड़’ है। हर कंपनी का अपना अलग ऐप है, हर ऐप में आपको अलग से अपना अकाउंट बनाना पड़ता है और हर ऐप के वॉलेट में पैसे फंसा कर रखने पड़ते हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए भारत सरकार जल्द ही ‘यूनिफाइड भारत ई-चार्ज’ (Unified Bharat e-Charge – UBC) नाम का एक मास्टर ऐप लाने वाली है, जो बिल्कुल यूपीआई (UPI) की तरह काम करेगा ।
लेकिन जब तक वह सरकारी सुपर-ऐप पूरी तरह से मार्केट में नहीं आ जाता, तब तक हमें प्राइवेट कंपनियों के चार्जिंग नेटवर्क पर ही निर्भर रहना होगा। आज मार्केट में दर्जनों ऐप्स मौजूद हैं, लेकिन हम आपके लिए भारत के टॉप 5 ईवी चार्जिंग ऐप्स का एक बेहद विस्तृत और गहरा विश्लेषण लेकर आए हैं। इस आर्टिकल में हम एक-एक करके इन ऐप्स की खूबियों, इनकी कमियों और आम यूज़र्स के असली अनुभवों के बारे में आम बोलचाल वाली आसान हिंदी में बात करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं!
Statiq (स्टैटिक) – डिज़ाइन और यूज़र एक्सपीरियंस का बेताज बादशाह
अगर हम बात करें कि भारत में आम जनता (डायरेक्ट-टू-कंस्यूमर) के बीच सबसे ज़्यादा लोकप्रिय और इस्तेमाल करने में सबसे आसान ऐप कौन सा है, तो उसमें Statiq का नाम सबसे ऊपर आता है। यह एक स्टार्टअप कंपनी है जिसे 2020 में शुरू किया गया था, लेकिन आज इसने मार्केट में तहलका मचा रखा है। Statiq ने बहुत ही कम समय में अपना नेटवर्क इतना बड़ा कर लिया है कि आज इनके पास भारत के 100 से भी ज़्यादा शहरों में 8,000 से अधिक चार्जिंग पॉइंट्स मौजूद हैं । इनकी सबसे अच्छी बात यह है कि ये सिर्फ अपने ही चार्जर नहीं लगाते, बल्कि E-Fill और GLIDA जैसी दूसरी कंपनियों के चार्जर्स को भी अपने ही ऐप के नक्शे (मैप) पर दिखा देते हैं।
जब आप Statiq का ऐप खोलते हैं, तो आपको तुरंत समझ आ जाता है कि यह ऐप बहुत ही सोच-समझकर और मॉडर्न डिज़ाइन के साथ बनाया गया है। ऐप का यूज़र इंटरफ़ेस (UI) बहुत ही स्मूथ और मक्खन की तरह काम करता है । हाल ही में इन्होंने अपने ऐप (वर्ज़न 21.3.0) में एक नया ‘ऑफ़र्स सिस्टम’ जोड़ा है जो भारतीय ग्राहकों को बहुत पसंद आ रहा है । यह सिस्टम आपकी चार्जिंग की आदतों को समझकर आपको पर्सनल डिस्काउंट कूपन, फ्लैट कैशबैक और प्रतिशत वाले डिस्काउंट देता है । यानी आप जितनी ज़्यादा चार्जिंग करेंगे, आपकी उतनी ही ज़्यादा बचत होगी। इसके अलावा, कंपनी ने अपना खुद का नेक्टर11kW होम चार्जर भी लॉन्च किया है, ताकि आप घर पर भी उनके ही इकोसिस्टम का हिस्सा बने रहें ।
हालांकि, कोई भी चीज़ एकदम परफेक्ट नहीं होती और Statiq के साथ भी कुछ छोटी-मोटी दिक्कतें हैं। बहुत सारे यूज़र्स का कहना है कि इतने शानदार ऐप में Jio-bp जैसे कुछ बड़े नेटवर्क्स के चार्जर नहीं दिखते हैं । इसके अलावा, आज के स्मार्ट ज़माने में लोग चाहते हैं कि ये ऐप उनके मोबाइल से निकलकर सीधा उनकी कार की बड़ी स्क्रीन (एंड्राइड ऑटो और एप्पल कारप्ले) पर चले । गाड़ी चलाते समय बार-बार फ़ोन निकालकर चार्जर ढूंढना न सिर्फ मुश्किल होता है, बल्कि खतरनाक भी है। अगर Statiq कार के स्क्रीन के लिए अपना सपोर्ट ले आए और बचे हुए नेटवर्क्स को भी अपने अंदर जोड़ ले, तो यह निस्संदेह भारत का इकलौता और सबसे बेहतरीन ईवी ऐप बन सकता है।
Tata Power EZ Charge (टाटा पावर ईज़ी चार्ज) – भरोसे का दूसरा नाम और सबसे बड़ा जाल

टाटा एक ऐसा नाम है जिस पर पूरा भारत आंख बंद करके भरोसा करता है। जब बात बिजली और पावर ग्रिड की हो, तो टाटा पावर का 100 साल से भी ज़्यादा का अनुभव उन्हें इस रेस में सबसे आगे खड़ा कर देता है। अगर हम नेटवर्क के साइज़ की बात करें, तो Tata Power EZ Charge भारत के सबसे बड़े और सबसे घने नेटवर्क्स में से एक है। इनके पास पूरे देश के 620 से भी ज़्यादा शहरों और कस्बों में 5,500 से अधिक पब्लिक चार्जिंग पॉइंट्स हैं, और साथ ही लगभग 1.2 लाख प्राइवेट होम चार्जिंग यूनिट्स भी लगे हुए हैं । चाहे आप शहर के बीचों-बीच हों या किसी हाईवे पर लंबे सफर पर निकले हों, टाटा का चार्जर आपको कहीं न कहीं मिल ही जाएगा।
Tata Power EZ Charge ऐप की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘ट्रिप प्लानर’ फीचर है । सोचिए आपको दिल्ली से जयपुर जाना है। आप बस ऐप में अपनी लोकेशन और मंज़िल डालिए; यह ऐप अपने आप पूरा रास्ता कैलकुलेट कर लेगा और आपको बता देगा कि रास्ते में कौन-कौन से टाटा चार्जर्स उपलब्ध हैं । आप यह भी फिल्टर कर सकते हैं कि आपकी गाड़ी में कौन सा कनेक्टर लगता है। इसके अलावा, इनका ‘टैप एंड चार्ज’ (RFID कार्ड) फीचर बहुत कमाल का है। आपको हर बार ऐप खोलने की ज़रूरत नहीं है, बस अपना कार्ड चार्जर पर टच करें और गाड़ी चार्ज होना शुरू हो जाएगी। साथ ही ‘ऑटो चार्ज’ फीचर के ज़रिए तो आपको बस केबल गाड़ी में लगानी होती है और चार्जिंग खुद-ब-खुद चालू हो जाती है ।
इतने शानदार फीचर्स होने के बावजूद, टाटा के इस ऐप की एक बहुत बड़ी और सीरियस प्रॉब्लम है – इनका कस्टमर सपोर्ट । हाईवे पर अगर चार्जर काम नहीं कर रहा है और आप कस्टमर केयर को फोन मिलाते हैं, तो यूज़र्स की शिकायत है कि आधा-आधा घंटा तो सिर्फ फोन कनेक्ट होने में लग जाता है । और अगर फोन उठ भी जाए, तो कई बार वहां बैठा एजेंट रिमोटली चार्जर को ठीक नहीं कर पाता और कॉल काट देता है, जिससे यूज़र बीच सड़क पर फंसा रह जाता है । इसके अलावा, इस ऐप की सेफ्टी चेक्स बहुत सख्त हैं। अगर आपने चार्जर लगाने के बाद अपनी कार को लॉक नहीं किया (जिसे इलेक्ट्रिकल आइसोलेशन कहते हैं), तो ऐप चार्जिंग शुरू ही नहीं करेगा। कई नए ईवी यूज़र्स को यह बात पता नहीं होती और वो सोचते हैं कि ऐप खराब है।
ChargeZone (चार्जज़ोन) – कमर्शियल गाड़ियों का उस्ताद पर आम लोगों के लिए सिरदर्द
भारत के ईवी मार्केट में ChargeZone एक बहुत ही अनोखी और दिलचस्प कंपनी है। अगर आंकड़ों की बात करें, तो इन्होंने हाल ही में घोषणा की है कि रोमिंग पार्टनरशिप (OCPI) के ज़रिए इनका नेटवर्क 13,500 से भी ज़्यादा चार्जिंग स्टेशनों तक पहुँच गया है, जो कागज़ों पर इन्हें भारत का सबसे बड़ा चार्जिंग नेटवर्क बनाता है । इन्होंने Statiq, Bolt, Kazam जैसी कई कंपनियों के साथ हाथ मिलाया है ताकि यूज़र एक ही ऐप से सबके चार्जर इस्तेमाल कर सके ।
ChargeZone की असली ताक़त और बिज़नेस मॉडल आम कारों में नहीं, बल्कि बड़ी-बड़ी कमर्शियल गाड़ियों, ट्रकों और फ्लीट्स (लोजिस्टिक्स फ्लेट्स) में है। ये लोग अशोक लेलैंड और आयशर (Eicher) जैसी कंपनियों के ट्रकों के लिए 360kW तक के अल्ट्रा-फास्ट चार्जर लगाते हैं । इनके चार्जर इतने पावरफुल हैं कि ये भारी-भरकम ट्रकों को भी बहुत जल्दी चार्ज कर देते हैं। कंपनियों के लिए इनका डैशबोर्ड और सॉफ्टवेयर बहुत ही लाजवाब तरीके से काम करता है।
लेकिन, जैसे ही बात एक आम आदमी (B2C) की आती है जो अपनी नेक्सॉन या टियागो चार्ज करना चाहता है, तो ChargeZone का ऐप किसी बुरे सपने से कम नहीं लगता। गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर यूज़र्स का गुस्सा साफ़ देखा जा सकता है। लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि ऐप में पैसे (वॉलेट टॉप अप) डालने में बहुत दिक्कत आती है और ट्रांज़ैक्शन फेल हो जाते हैं । कई बार जब आप केबल लगाते हैं, तो चार्जर खाली होने के बावजूद ऐप में “इन यूज़” (इस्तेमाल में है) लिखा आता है । सबसे ज़्यादा परेशान करने वाली बात इनका बिलिंग सिस्टम है। एक बार चार्ज करने पर यह ऐप बैंक अकाउंट से कई सारे छोटे-छोटे ट्रांज़ैक्शन काट लेता है, जिससे यूज़र कंफ्यूज़ हो जाता है कि आखिर उसके कितने पैसे कटे हैं । साथ ही, इन्होने अपना ‘प्री-बुकिंग’ का फीचर भी हटा दिया है, जिससे हाईवे पर चलने वाले लोगों को अब पहले से चार्जर बुक करने की सुविधा नहीं मिलती ।
Jio-bp Pulse (जियो-बीपी पल्स) – हाईवे का महाराजा और अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग
जब रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और दुनिया की जानी-मानी पेट्रोल कंपनी BP (ब्रिटिश पेट्रोलियम) एक साथ आते हैं, तो आप समझ सकते हैं कि उनके काम का स्केल कितना बड़ा होगा। Jio-bp Pulse का फोकस शहर की छोटी-छोटी जगहों पर धीमे चार्जर लगाने के बजाय, बड़े हाईवे और चौराहों पर विशाल ‘मोबिलिटी हब’ (मोबिलिटी हब्स) बनाने पर है। वर्तमान में इनके पास पूरे भारत में 6,000 से भी ज़्यादा चार्जिंग पॉइंट्स हैं । इनका इंफ्रास्ट्रक्चर इतना शानदार है कि इन्होने बेंगलुरु के देवनहल्ली इलाके में एक ऐसा हब बनाया है जहाँ एक साथ 28 गाड़ियाँ फास्ट चार्ज हो सकती हैं ।
Jio-bp भारत की पहली ऐसी कंपनी है जो 480kW की क्षमता वाले अति-आधुनिक और सुपर-फास्ट चार्जर दे रही है । इसका मतलब है कि अगर आपकी गाड़ी सपोर्ट करती है, तो आप बस चाय पीने रुकेंगे और आपकी गाड़ी फुल चार्ज हो जाएगी। इनके चार्जिंग हब्स पर आपको ज़मीन पर मौजूद स्टाफ (ग्राउंड स्टाफ) भी मिलता है, जो भारी-भरकम केबल उठाने और ऐप में मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता है । हाल ही में इन्होने Eicher के साथ भी एक करार किया है जिससे कमर्शियल ट्रकों को बहुत फायदा होगा ।
अब आते हैं ऐप की कमियों पर। Jio-bp Pulse का ऐप और उसका सॉफ्टवेयर कंपनी के शानदार हार्डवेयर की बराबरी नहीं कर पाता। कई यूज़र्स ने शिकायत की है कि लॉगिन करते समय ऐप बस गोल-गोल घूमता रहता है (स्पिनिंग व्हील) और खुलता ही नहीं है । ऐप के अंदर जो ‘प्री-रिज़र्वेशन’ (Pre-reservation) का फीचर है, उसमें आप अपनी मर्ज़ी से तारीख और समय बदल ही नहीं पाते, जो इसे पूरी तरह से बेकार बना देता है । इसके अलावा, जब आपकी गाड़ी चार्ज हो रही होती है, तो ऐप के डैशबोर्ड पर डेटा (जैसे कितनी बिजली गई, कितना समय बचा है) रियल-टाइम में अपडेट नहीं होता । इतनी बड़ी कंपनी होने के नाते, लोगों को इनके ऐप से बहुत ज़्यादा उम्मीदें हैं जिन पर इन्हें काम करना होगा।
HP eCharge (एचपी ई-चार्ज) – पेट्रोल पंपों का स्मार्ट बदलाव
हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) एक सरकारी उपक्रम (PSU) है जिसके पास पूरे भारत में 24,400 से भी ज़्यादा पेट्रोल पंपों का एक विशाल जाल बिछा हुआ है । कंपनी बहुत तेज़ी से अपने इन्हीं पुराने पेट्रोल पंपों को ईवी चार्जिंग स्टेशनों में बदल रही है। आज की तारीख में HP eCharge ब्रांड के तहत इनके पास 5,400 से ज़्यादा इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन चालू हालत में हैं ।
HPCL ने महिंद्रा की टेक्नोलॉजी कंपनी ‘Charge_iN’ के साथ मिलकर एक बहुत ही शानदार रणनीति अपनाई है। ये लोग अपने पेट्रोल पंपों पर 180 kW के तगड़े डुअल-गन (Dual-gun) चार्जर लगा रहे हैं । इसका सीधा फायदा यह है कि आपको हाईवे पर चार्जर ढूंढने के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ता, बस किसी भी एचपी के पेट्रोल पंप पर गाड़ी रोकिए, वहां आपको वॉशरूम से लेकर खाने-पीने की चीज़ें और एक तेज़ ईवी चार्जर सब एक ही जगह मिल जाता है। HP eCharge ऐप का इंटरफ़ेस बहुत ही साफ-सुथरा और सीधा है । इसे इस्तेमाल करना आसान है और यह जल्दी लोड होता है।
मगर परेशानी तब शुरू होती है जब आप पेमेंट करने जाते हैं। एचपी ने अपने ईवी ऐप के अंदर अपना पुराना कॉर्पोरेट वॉलेट ‘HP Pay’ घुसा रखा है, जो कि बहुत ही ज़्यादा बग्स और तकनीकी खामियों से भरा हुआ है । यूज़र्स लगातार ये शिकायत करते हैं कि वॉलेट में पैसे डालते वक्त ट्रांज़ैक्शन फेल हो जाते हैं और पैसे फंस जाते हैं । कई बार कम नेटवर्क वाले इलाकों (जैसे गोवा के बीच के पास) ऐप चार्जर से कनेक्ट ही नहीं हो पाता । हालाँकि, ऐप की इन तकनीकी कमियों को इनका इंसानी कस्टमर सपोर्ट (कस्टमर सपोर्ट) काफी हद तक ढक लेता है। रिव्यूज़ में लोग इनके सपोर्ट एजेंट्स (जैसे कि ‘नयाज़’ नाम के एक एजेंट) की खूब तारीफ करते हैं, जो बेहद शांति और प्रोफेशनलिज़्म के साथ फोन पर ही यूज़र्स की तकनीकी समस्या को तुरंत सुलझा देते हैं ।
अगर हम पूरे भारत के ईवी चार्जिंग सिस्टम को ध्यान से देखें, तो एक बात बिल्कुल साफ़ हो जाती है कि सिर्फ ज़्यादा चार्जर लगा देने से जंग नहीं जीती जा सकती। असली राजा वही बनेगा जिसका मोबाइल ऐप बिना अटके काम करेगा और यूज़र को सबसे कम टेंशन देगा। Statiq अपने शानदार डिज़ाइन और कूपन सिस्टम से आम जनता का दिल जीत रहा है, जबकि ChargeZone और Jio-bp बड़ी कमर्शियल गाड़ियों और हाईवे चार्जिंग में झंडे गाड़ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, Tata Power और HP eCharge का सबसे बड़ा फायदा उनकी पहुंच और पुरानी ब्रांड वैल्यू है। जब तक सरकार का ‘यूनिफाइड भारत ई-चार्ज’ (UBC) ऐप पूरी तरह से मार्केट में नहीं आ जाता, तब तक आपको अपनी ज़रूरत, अपनी गाड़ी और अपने शहर के हिसाब से इन प्राइवेट ऐप्स को चुनना होगा।










