स्वप्पाब्ले बैटरी : ओला, सन मोबिलिटी और गोगोरो का मॉडल काम करेगा ?

Battery Swapping
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भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार इस समय एक बहुत ही बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जब भी कोई ग्राहक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर या थ्री-व्हीलर खरीदने की सोचता है, तो उसके मन में सबसे बड़ा डर रेंज और चार्जिंग में लगने वाले लंबे समय को लेकर होता है। पेट्रोल पंप पर जाकर दो मिनट में टंकी फुल कराने की जो आदत हमें सालों से पड़ी है, उसके मुकाबले इलेक्ट्रिक गाड़ी को चार्ज करने के लिए घंटों इंतजार करना थोड़ा अखरता है। इसी समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए भारतीय बाजार में एक नई तकनीक बहुत तेजी से पैर पसार रही है, जिसे हम स्वाइपेबल बैटरी या बैटरी स्वैपिंग कहते हैं। इस तकनीक में आपको अपनी गाड़ी की डिस्चार्ज हो चुकी बैटरी को चार्ज करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि आप सीधे एक स्वैपिंग स्टेशन पर जाते हैं और वहां अपनी खाली बैटरी देकर मात्र कुछ सेकंड में पूरी तरह चार्ज हुई दूसरी बैटरी लेकर आगे निकल जाते हैं।

भारत में इस समय ईवी चार्जिंग के इस नए और अनोखे विकल्प को लेकर काफी ज्यादा चर्चा हो रही है। खासकर डिलीवरी करने वाले एजेंट, ई-रिक्शा चालक और कमर्शियल फ्लीट चलाने वाले लोगों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि उनके लिए समय ही पैसा है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में बैटरी स्वैपिंग का बाजार साल 2025 में लगभग 48 मिलियन डॉलर का था, जिसके साल 2034 तक बढ़कर 500 मिलियन डॉलर से भी ऊपर जाने की उम्मीद है। इस बाजार में इस समय देश और दुनिया की तीन सबसे बड़ी कंपनियां- ओला इलेक्ट्रिक, सन मोबिलिटी और गोगोरो आमने-सामने खड़ी हैं। आज हम बहुत ही आसान भाषा में यह समझेंगे कि इन तीनों दिग्गज कंपनियों का बिजनेस मॉडल क्या है और भारत के माहौल में इनका यह नया सिस्टम कितना कामयाब हो पाएगा।

ओला इलेक्ट्रिक का खुद का बंद साम्राज्य और नए स्कूटर्स की फौज

भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता कंपनियों में से एक, ओला इलेक्ट्रिक ने शुरुआत में सिर्फ फिक्स्ड यानी फिक्स रहने वाली बैटरी पर अपना पूरा ध्यान लगाया था। लेकिन बाजार की मांग और कमर्शियल फ्लीट की जरूरतों को देखते हुए कंपनी ने अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। ओला ने अब रिमूवेबल यानी आसानी से बाहर निकाली जा सकने वाली बैटरी के डिजाइन को पेटेंट कराया है। कंपनी ने अपने नए वेरिएंट्स जैसे ओला एस वन जे़ड और ओला गिग सीरीज को बाजार में उतारा है, जिसमें ग्राहकों को 1.5 kWh की स्वाइपेबल बैटरी के विकल्प दिए जा रहे हैं। इन स्कूटर्स में ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से एक या दो बैटरी पैक का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे इन्हें एक बार में करीब 146 km तक की रेंज मिल जाती है।

ओला का यह मॉडल पूरी तरह से एक क्लोज्ड इकोसिस्टम पर काम करता है, जिसका सीधा मतलब यह है कि ओला की बैटरी सिर्फ ओला के ही स्कूटर्स में काम करेगी। इस सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए कंपनी ने दिल्ली में बीएसईएस जैसी बिजली कंपनियों के साथ हाथ मिलाया है ताकि शहर में जगह-जगह स्वैपिंग और ईवी चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जा सकें। इसके साथ ही तमिलनाडु में मौजूद ओला की खुद की गीगाफैक्ट्री में इन बैटरियों के सेल और पैक का निर्माण किया जा रहा है, जिससे इसकी लागत को काफी कम रखने में मदद मिलेगी। ओला का यह मॉडल उन लोगों के लिए बहुत कारगर साबित हो सकता है जो पहले से ओला के इकोसिस्टम से जुड़े हैं और जिन्हें रोजमर्रा के डिलीवरी काम के लिए एक भरोसेमंद गाड़ी की जरूरत होती है।

सन मोबिलिटी और इंडोफास्ट का सबसे बड़ा नेटवर्क जो सबको जोड़ेगा

जब बात भारत में सबसे पहले और सबसे बड़े स्तर पर बैटरी स्वैपिंग को लागू करने की आती है, तो सन मोबिलिटी का नाम सबसे ऊपर आता है। इस कंपनी का पूरा ध्यान ओपन प्लेटफॉर्म और इंटरऑपरेबिलिटी पर है, यानी इनकी बनाई हुई स्मार्ट बैटरियों का इस्तेमाल अलग-अलग कंपनियों के टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और छोटे कमर्शियल फोर-व्हीलर में भी किया जा सकता है। सन मोबिलिटी की बैटरियां दिखने में किसी छोटे जूते के डिब्बे जितनी होती हैं और इनके स्टेशन्स पूरी तरह से इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी आईओटी तकनीक से लैस होते हैं, जहां ग्राहक सब्सक्रिप्शन या पे-पर-यूज (जितना इस्तेमाल करो उतना पैसा दो) के आधार पर बैटरी बदल सकते हैं।

इस कंपनी ने भारतीय बाजार में अपनी स्थिति को सबसे मजबूत करने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ एक 50-50 फीसदी की हिस्सेदारी वाला इंडोफास्ट स्वैप एनर्जी नाम का जॉइंट वेंचर बनाया है। इस साझेदारी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इंडियन ऑयल के देश भर में मौजूद 38,000 से भी ज्यादा पेट्रोल पंपों का इस्तेमाल अब इन स्वैपिंग स्टेशन्स को लगाने के लिए किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य साल 2030 तक देश भर में 10,000 से ज्यादा स्टेशन लगाने और दस लाख से ज्यादा ग्राहकों को जोड़ने का है। ई-रिक्शा और कमर्शियल डिलीवरी गाड़ियों के बीच इनका नेटवर्क बेहद लोकप्रिय हो चुका है क्योंकि यह ड्राइवरों को बिना रुके दिन भर में 150 km से ज्यादा गाड़ी चलाने की आजादी देता है।

ताइवान की दिग्गज कंपनी गोगोरो का भारत में बड़ा दांव और चुनौतियां

Swappable Battery
Swappable Battery

गोगोरो को दुनिया भर में बैटरी स्वैपिंग की दुनिया का बेताज बादशाह माना जाता है। ताइवान के बाजार में करोड़ों सफल स्वैप करने के बाद इस कंपनी ने साल 2023 में भारतीय बाजार में कदम रखा था। गोगोरो ने भारत में अपने विशेष स्मार्टस्कूटर जैसे क्रॉसओवर जीएक्स250 और गोस्टेशन्स को पेश किया है। गोगोरो का बिजनेस मॉडल भी एक ओपन प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसका मतलब है कि कोई भी अन्य वाहन निर्माता कंपनी इनके डिजाइन की बैटरी के हिसाब से अपनी गाड़ी तैयार कर सकती है। भारत में इन्होंने शुरुआत में दिल्ली और गोवा जैसे राज्यों में ज़िप इलेक्ट्रिक जैसी डिलीवरी कंपनियों के साथ मिलकर काम शुरू किया है।

गोगोरो ने भारत में बुनियादी ढांचे को तेजी से बढ़ाने के लिए एचपीसीएल के पेट्रोल पंपों और महाराष्ट्र में बेलराइज के साथ मिलकर एक बहुत बड़े निवेश की घोषणा की है। इसके साथ ही भारतीय नियमों और सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए कंपनी ने फॉक्सकॉन के साथ मिलकर स्थानीय स्तर पर ही अपनी बैटरियों का निर्माण शुरू किया है। हालांकि, साल 2026 के मध्य तक गोगोरो का काम भारत में मुख्य रूप से पायलट प्रोजेक्ट्स और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) मॉडल तक ही ज्यादा सीमित दिखाई दे रहा है। सरकारी नीतियों में स्वाइपेबल बैटरियों को लेकर पूरी तरह स्पष्टता न होने और स्टेशन लगाने की भारी लागत की वजह से आम ग्राहकों के लिए इनका रोलआउट थोड़ा धीमा रहा है।

तीनों बड़े दिग्गजों के काम करने के तरीके और आंकड़ों का पूरा कंपैरिजन

नीचे दी गई टेबल में आप भारत के इन तीनों सबसे बड़े बैटरी स्वैपिंग प्लेयर्स के बिजनेस मॉडल, उनकी ताकत, पार्टनरशिप और मौजूदा स्थिति की पूरी तुलना देख सकते हैं। इससे आपको यह समझने में बहुत आसानी होगी कि आने वाले समय में कौन सी तकनीक भारतीय बाजार पर राज करने वाली है।

कंपनी का नामबिजनेस मॉडल का प्रकारमुख्य फोकस और टारगेट सेगमेंटसबसे बड़ी ताकत और पार्टनरशिपभारतीय बाजार में मौजूदा स्थिति
ओला इलेक्ट्रिकक्लोज्ड इकोसिस्टम (सिर्फ अपनी गाड़ियों के लिए)रिटेल ग्राहक और ओला गिग डिलीवरी फ्लीटखुद की गीगाफैक्ट्री और बड़ा ग्राहक बेसनए स्कूटर्स के साथ पायलट और शुरुआती रोलआउट जारी
सन मोबिलिटी (इंडोफास्ट)ओपन और इंटरऑपरेबल (सभी कंपनियों के लिए)ई-रिक्शा, डिलीवरी गाड़ियां और कमर्शियल फ्लीटइंडियन ऑयल के 38,000+ पेट्रोल पंपों का नेटवर्कदेश भर के टियर-1 और टियर-2 शहरों में सबसे बड़ा एक्टिव नेटवर्क
गोगोरोओपन प्लेटफॉर्म और ग्लोबल स्टैंडर्डमुख्य रूप से डिलीवरी फ्लीट और B2B पार्टनर्सHPCL पार्टनरशिप और फॉक्सकॉन के साथ लोकल मैन्युफैक्चरिंगमेट्रो शहरों में पायलट प्रोजेक्ट्स और फ्लीट ऑपरेशन्स पर फोकस

क्या भारत के आम ग्राहकों के बीच हिट हो पाएगा यह स्वैपिंग का फार्मूला

अब सबसे बड़ा और मुख्य सवाल यह उठता है कि क्या यह स्वैपिंग मॉडल भारत के आम टू-व्हीलर खरीदारों के बीच पूरी तरह से कामयाब हो पाएगा। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब आप गाड़ी खरीदते हैं, तो आपको बैटरी की कीमत नहीं देनी पड़ती, जिससे गाड़ी की शुरुआती कीमत सीधे 30 से 40 फीसदी तक कम हो जाती है। आपको बस एक मोबाइल सिम कार्ड की तरह हर महीने बैटरी का रेंट या सब्सक्रिप्शन प्लान लेना होता है। लेकिन इसके सामने सबसे बड़ी चुनौती इंटरऑपरेबिलिटी की कमी है। अगर आपके पास ओला का स्कूटर है तो आप सन मोबिलिटी के स्टेशन पर जाकर बैटरी नहीं बदल सकते, और अगर सन मोबिलिटी की बैटरी है तो वह गोगोरो के स्टेशन में फिट नहीं होगी। जब तक सरकार सभी कंपनियों के लिए एक जैसी बैटरी का साइज और कनेक्टर तय नहीं करती, तब तक आम ग्राहकों के लिए किसी एक नेटवर्क पर पूरी तरह निर्भर होना थोड़ा मुश्किल रहेगा।

इसके अलावा, शहरी इलाकों में तो कंपनियां बहुत तेजी से स्टेशन लगा रही हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों या हाईवे पर अभी भी ईवी चार्जिंग और स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। एक और बड़ी बात यह है कि आज के दौर में फिक्स्ड बैटरी वाले स्कूटर्स की तकनीक भी बहुत तेजी से सुधर रही है। अब ऐसे स्कूटर्स आ रहे हैं जो फास्ट चार्जिंग के जरिए मात्र 15 से 20 मिनट में चार्ज हो जाते हैं और उनकी कीमतें भी लगातार कम हो रही हैं। ऐसे में जो ग्राहक अपनी गाड़ी का इस्तेमाल सिर्फ घर से ऑफिस आने-जाने के लिए करते हैं, उनके लिए घर पर ही सामान्य तरीके से ईवी चार्जिंग करना ज्यादा सस्ता और सुविधाजनक साबित होता है।

भविष्य की राह और कौन मारेगा इस रेस में बाजी

कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत में बैटरी स्वैपिंग का भविष्य बहुत ही शानदार है, लेकिन यह तकनीक हर एक गाड़ी मालिक के लिए शायद एक जैसा काम न करे। कमर्शियल फ्लीट, जोमैटो-स्विगी के डिलीवरी राइडर्स और ई-रिक्शा चालकों के लिए जहां सन मोबिलिटी और इंडोफास्ट का नेटवर्क एक लाइफलाइन बनकर उभर रहा है, वहीं ओला अपने बड़े ग्राहक आधार के दम पर व्यक्तिगत खरीदारों को लुभाने की कोशिश कर रहा है। गोगोरो के पास दुनिया का सबसे बेहतरीन और सुरक्षित स्वैपिंग का अनुभव है, लेकिन उन्हें भारत में अपनी रफ्तार को थोड़ा और बढ़ाना होगा। आने वाले समय में यह तकनीक पारंपरिक ईवी चार्जिंग के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसके साथ मिलकर भारत को एक संपूर्ण इलेक्ट्रिक व्हीकल देश बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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