जब उत्तर भारत में तापमान 45 डिग्री के पार जाता है तो पेट्रोल और डीजल कारों की तरह इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भी खास देखभाल की जरूरत होती है। दिल्ली, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में रहने वाले मिडिल क्लास EV ओनर्स के लिए गर्मियों का मौसम एक अलग तरह की चुनौती लेकर आता है। आप अपनी गाड़ी को रोजमर्रा के ऑफिस कम्यूट या वीकेंड ट्रिप के लिए इस्तेमाल करते हैं लेकिन भीषण गर्मी का सीधा असर गाड़ी की बैटरी हेल्थ और रेंज पर पड़ता है। इंटरनेट पर कई खबरें आती हैं जिनमें बैटरी के ज्यादा गर्म होने की बातें होती हैं। इन बातों से रेंज एंग्जायटी और बैटरी खराब होने का डर पैदा होता है। भारत सरकार और ARAI जैसे संस्थानों के सख्त मानकों के कारण आजकल की गाड़ियां बहुत सुरक्षित होती हैं। अगर आप अपनी गाड़ी के बैटरी पैक और थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम को थोड़ा बेहतर तरीके से समझ लें तो गर्मी के मौसम में भी आपकी गाड़ी शानदार परफॉर्म करेगी। मैं कई सालों से भारतीय ऑटोमोटिव मार्केट को कवर कर रहा हूं और आज मैं आपको कुछ बहुत ही प्रैक्टिकल और जांचे परखे तरीके बताऊंगा जिनसे आप गर्मियों में अपनी ईवी की बैटरी को बिल्कुल सुरक्षित रख सकते हैं। राज्य सरकारों की सब्सिडी और ईवी पॉलिसी के कारण आजकल हर दूसरे घर में इलेक्ट्रिक गाड़ी आ रही है। ऐसे में इन गाड़ियों का सही रखरखाव जानना और भी ज्यादा जरूरी हो गया है।
गर्मी में आपके बैटरी पैक के अंदर क्या होता है
जब आप अपनी इलेक्ट्रिक कार को कड़ी धूप में चलाते हैं तो गाड़ी के बाहर के तापमान के साथ साथ बैटरी के अंदर का तापमान भी बढ़ने लगता है। भारत में बिकने वाली ज्यादातर इलेक्ट्रिक गाड़ियों में लिथियम आयन बैटरी पैक लगा होता है। जब यह बैटरी पैक पावर सप्लाई करता है तो यह खुद भी हीट जनरेट करता है। गर्मी के दिनों में सड़क का तापमान हवा के तापमान से कहीं ज्यादा होता है। गाड़ी का बैटरी पैक फर्श के नीचे लगा होता है इसलिए सड़क की गर्मी सीधे बैटरी तक पहुंचती है।
इस गर्मी को कंट्रोल करने के लिए गाड़ी का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और लिक्विड कूलिंग सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है। जब आप एसी चलाकर गाड़ी चला रहे होते हैं तो गाड़ी की मोटर, एसी और बैटरी को ठंडा रखने वाला कूलिंग सिस्टम, ये तीनों चीजें बैटरी से ही पावर खींचती हैं। यही कारण है कि गर्मियों में आपको सामान्य मौसम के मुकाबले थोड़ी कम रेंज मिलती है। अगर बैटरी का तापमान एक सुरक्षित लिमिट से ऊपर जाने लगता है तो सॉफ्टवेयर बैटरी को सुरक्षित रखने के लिए पावर आउटपुट को कम कर देता है। आपने नोटिस किया होगा कि कभी कभी तेज दोपहर में हाईवे पर गाड़ी उतनी तेजी से स्पीड नहीं पकड़ती जितनी सुबह के वक्त पकड़ती है। यह कोई खराबी नहीं है। यह आपकी गाड़ी का सिस्टम है जो बैटरी को जरूरत से ज्यादा गर्म होने से बचा रहा है। अगर बाहर का तापमान 40 डिग्री है और आप लगातार 100 kmph की स्पीड पर चल रहे हैं तो बैटरी का तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है। सिस्टम इस तापमान को नीचे लाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देता है।
LFP और NMC बैटरी पैक में गर्मी के मौसम में कौन है ज्यादा सुरक्षित

भारतीय बाजार में मुख्य रूप से दो तरह की बैटरी केमिस्ट्री का इस्तेमाल होता है। पहली है LFP और दूसरी है NMC बैटरी। टाटा नेक्सन ईवी, पंच ईवी और एमजी जेडएस ईवी जैसी गाड़ियों में LFP बैटरी पैक का इस्तेमाल होता है। कुछ महंगी और प्रीमियम गाड़ियों में NMC बैटरी आती है। भारतीय गर्मियों के हिसाब से LFP बैटरी को बहुत सुरक्षित माना जाता है क्योंकि यह बहुत ज्यादा तापमान को आसानी से सह सकती है।
NMC बैटरी पैक में एनर्जी डेंसिटी ज्यादा होती है। इसका मतलब है कि वह कम जगह में ज्यादा पावर स्टोर कर सकती है। यह गर्मी के प्रति काफी ज्यादा सेंसिटिव होती है। LFP बैटरी थोड़ी भारी जरूर होती है लेकिन उसकी थर्मल स्टेबिलिटी बहुत शानदार होती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि इन दोनों में गर्मी के लिहाज से क्या अंतर है तो नीचे दी गई टेबल को ध्यान से पढ़ें।
| बैटरी का प्रकार | थर्मल रनअवे लिमिट (सुरक्षित तापमान) | कूलिंग की जरूरत | भारतीय गर्मियों के लिए उपयुक्तता |
| LFP (लिथियम आयरन फॉस्फेट) | 270 डिग्री से 300 डिग्री सेल्सियस | कम एक्टिव कूलिंग की जरूरत | बहुत बेहतरीन और सुरक्षित |
| NMC (निकेल मैंगनीज कोबाल्ट) | 150 डिग्री से 210 डिग्री सेल्सियस | बहुत ज्यादा एक्टिव कूलिंग की जरूरत | सामान्य लेकिन ज्यादा ध्यान देने की जरूरत |
जैसा कि आप इस टेबल में देख सकते हैं कि LFP बैटरी बहुत ज्यादा तापमान पर जाकर ही अनस्टेबल होती है। इसका मतलब है कि 45 डिग्री की गर्मी में भी आपको अपनी LFP बैटरी वाली गाड़ी के लिए किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। बस आपको कुछ सामान्य बातों का पालन करना है। अगर आपके पास NMC बैटरी वाली गाड़ी है तो आपको उसे सीधी धूप में पार्क करने से बचना चाहिए।
गाड़ी को चार्ज करने का सही समय और सबसे सुरक्षित तरीका
चार्जिंग के दौरान बैटरी सबसे ज्यादा हीट जनरेट करती है। अगर आप दोपहर के 2 बजे 45 डिग्री तापमान में फास्ट डीसी चार्जर पर गाड़ी लगा देते हैं तो बैटरी पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है। फास्ट चार्जिंग वैसे भी बैटरी को तेजी से गर्म करती है और बाहर की गर्मी इस समस्या को और बढ़ा देती है। इससे बैटरी के सेल डिग्रेडेशन की प्रक्रिया तेज हो जाती है जिसका सीधा मतलब है कि बैटरी की कुल उम्र कम होने लगती है।
गर्मियों में गाड़ी चार्ज करने का सबसे अच्छा समय रात का होता है या फिर सुबह जल्दी। उस समय तापमान कम होता है और गाड़ी का थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम बिना ज्यादा पावर खर्च किए बैटरी को ठंडा रख पाता है। आप अपनी गाड़ी को चार्ज करने के लिए 20 से 80 प्रतिशत चार्जिंग का नियम अपनाएं। रोज गाड़ी को 100 प्रतिशत तक चार्ज करना और 10 प्रतिशत से नीचे ले जाना बैटरी के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है। अगर आपको लंबे सफर पर जाना है तभी गाड़ी को 100 प्रतिशत तक चार्ज करें। जैसे ही चार्जिंग पूरी हो जाए आप अपनी यात्रा शुरू कर दें। गाड़ी को 100 प्रतिशत चार्ज करके लगातार कई घंटे धूप में खड़ा रखना बैटरी की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जब आप घर पर एसी चार्जर से गाड़ी चार्ज करते हैं तो बैटरी बहुत आराम से चार्ज होती है और बिलकुल गर्म नहीं होती।
पार्किंग के दौरान सही जगह का चुनाव कैसे करें
पार्किंग शायद सबसे छोटी बात लगती है लेकिन ईवी के मामले में यह बहुत बड़ा असर डालती है। अगर आप अपनी गाड़ी को लगातार 4 घंटे कड़ी धूप में पार्क करते हैं तो केबिन का तापमान 60 डिग्री तक पहुंच सकता है। इसका सीधा असर केबिन के नीचे लगे बैटरी पैक पर पड़ता है। जब आप ऐसी गर्म गाड़ी को स्टार्ट करते हैं और एसी फुल स्पीड पर चलाते हैं तो बैटरी को एकदम से बहुत ज्यादा पावर सप्लाई करनी पड़ती है। यह प्रक्रिया बैटरी पर भारी स्ट्रेस डालती है।
हमेशा कोशिश करें कि गाड़ी किसी बेसमेंट पार्किंग, पेड़ की छांव या किसी कवर्ड जगह पर खड़ी हो। अगर आपके ऑफिस में कवर्ड पार्किंग नहीं है तो अपनी गाड़ी के शीशों पर अच्छी क्वालिटी के सनशेड्स लगाएं। इससे केबिन के अंदर सीधी धूप नहीं जाएगी और इंटीरियर के साथ साथ बैटरी का तापमान भी कंट्रोल में रहेगा। डामर की सड़क धूप में बहुत ज्यादा गर्म हो जाती है। अगर हो सके तो कंक्रीट या मिट्टी वाली जगह पर गाड़ी खड़ी करें क्योंकि वहां से नीचे से आने वाली गर्मी कम होती है। सफेद या हल्के रंग की गाड़ियां भी गर्मी को थोड़ा रिफ्लेक्ट करती हैं जिससे केबिन कम गर्म होता है।
एसी का समझदारी से इस्तेमाल और प्री कंडीशनिंग का फायदा
गर्मियों में बिना एसी के गाड़ी चलाना संभव नहीं है। एसी का सही इस्तेमाल आपकी बैटरी की बहुत सी ऊर्जा बचा सकता है। इसके लिए सबसे बेहतरीन तरीका प्री कंडीशनिंग है। जब आपकी गाड़ी घर पर चार्जर से जुड़ी हो उसी वक्त मोबाइल ऐप से गाड़ी का एसी ऑन कर दें। इससे गाड़ी का केबिन ठंडा होने के लिए बैटरी की पावर इस्तेमाल करने के बजाय सीधे ग्रिड की पावर इस्तेमाल करेगा। जब आप गाड़ी में बैठेंगे तो केबिन पहले से ठंडा होगा और आपको ड्राइविंग के दौरान शानदार रेंज मिलेगी। आप ड्राइविंग शुरू करने से 10 मिनट पहले यह काम कर सकते हैं।
गाड़ी चलाते समय एसी को ऑटो मोड में 24 डिग्री पर सेट करें। इसे बिलकुल निचले स्तर पर चलाने से कंप्रेसर लगातार पूरी ताकत से चलता है जो बैटरी को बहुत तेजी से ड्रेन करता है। अगर आप 24 डिग्री पर भी पंखे की स्पीड सही रखते हैं तो केबिन बहुत आरामदायक रहता है। बार बार खिड़कियां खोलने से बचें क्योंकि इससे बाहर की गर्म हवा अंदर आती है और एसी को फिर से केबिन ठंडा करने के लिए बैटरी से ज्यादा पावर खींचनी पड़ती है।
ड्राइविंग स्टाइल और रीजेनरेटिव ब्रेकिंग का सही उपयोग
गर्मियों के मौसम में स्मूथ ड्राइविंग सबसे ज्यादा जरूरी है। जब आप बार बार तेजी से एक्सीलेरेट करते हैं और फिर अचानक ब्रेक लगाते हैं तो मोटर और बैटरी दोनों पर भारी दबाव पड़ता है। इस प्रक्रिया में बहुत ज्यादा हीट पैदा होती है। अगर आप हल्के पैर से एक्सीलेरेटर दबाएंगे तो बैटरी आराम से पावर सप्लाई करेगी और गाड़ी की रेंज भी आराम से बढ़ेगी। अगर आप 60 kmph या 70 kmph की स्पीड पर एक समान गति से चलते हैं तो गाड़ी सबसे अच्छी रेंज देती है।
शहर के ट्रैफिक में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग को लेवल 2 या 3 पर रखें। इससे गाड़ी बिना ब्रेक पैड इस्तेमाल किए रुकने लगती है और बैटरी वापस चार्ज होती है। अगर आप हाईवे पर 80 kmph की स्पीड से गाड़ी चला रहे हैं तो रीजेन को लेवल 1 या जीरो पर रखें ताकि गाड़ी बिना रुकावट के आगे बढ़ सके और बैटरी पर कम दबाव पड़े। आक्रामक तरीके से ड्राइविंग करने पर आपको चार्जर जल्दी खोजना पड़ेगा जो गर्मियों की तेज धूप में एक मुश्किल काम हो सकता है।
हाईवे पर सफर के दौरान चार्जिंग स्टेशन की प्लानिंग
अगर आप गर्मियों में 300 km या 400 km का लंबा सफर तय करने जा रहे हैं तो आपको अपनी ट्रिप की प्लानिंग बहुत सोच समझकर करनी चाहिए। दिन के सबसे गर्म हिस्से में लगातार गाड़ी चलाने से बैटरी का तापमान बढ़ सकता है। अगर संभव हो तो अपनी यात्रा सुबह जल्दी शुरू करें या शाम के समय सफर करें। इससे आपकी गाड़ी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रहने में मदद मिलेगी।
जब आप हाईवे पर फास्ट चार्जर का इस्तेमाल करते हैं तो बैटरी को थोड़ा आराम दें। लगातार 200 km चलाने के बाद सीधे फास्ट चार्जर पर लगाने से पहले गाड़ी को 15 मिनट के लिए छांव में खड़ा कर दें। इससे बैटरी का तापमान थोड़ा नीचे आ जाएगा। कई लोग फास्ट चार्जिंग के दौरान गाड़ी के अंदर बैठकर फुल एसी चलाकर इंतजार करते हैं। यह तरीका बैटरी कूलिंग सिस्टम पर बहुत ज्यादा लोड डालता है। चार्जर के पास किसी रेस्टोरेंट में जाकर एक घंटे आराम करना ज्यादा बेहतर है। इससे बैटरी पूरी क्षमता से खुद को ठंडा रख पाएगी और चार्जिंग भी जल्दी पूरी होगी।
सही टायर प्रेशर जो आपकी बैटरी को बचाता है
अक्सर लोग बैटरी और मोटर पर ही फोकस करते हैं और टायर प्रेशर को भूल जाते हैं। गर्मियों में सड़क बहुत गर्म होती है और हवा फैलती है। अगर गाड़ी के टायरों में हवा कम होगी तो टायर का ज्यादा हिस्सा सड़क को छुएगा। इससे फ्रिक्शन बढ़ेगा और गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए मोटर को बैटरी से ज्यादा पावर खींचनी पड़ेगी।
हफ्ते में कम से कम एक बार टायर प्रेशर जरूर चेक करें। अपनी गाड़ी के मैनुअल में दिए गए टायर प्रेशर के हिसाब से ही हवा भरवाएं। सही टायर प्रेशर रखने से आपको बेहतर रेंज मिलती है। इसके साथ ही मोटर और बैटरी बेवजह गर्म होने से बचे रहते हैं। अगर आप लगातार कम हवा वाले टायरों के साथ गाड़ी चलाते हैं तो आपकी कुल रेंज में 5 से 10 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। टायरों की सही कंडीशन आपकी पूरी ईवी की परफॉर्मेंस को तय करती है।
गाड़ी के कूलेंट लेवल की समय समय पर जांच
इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इंजन ऑयल नहीं होता है लेकिन उनमें लिक्विड कूलिंग सिस्टम जरूर होता है जो बैटरी और मोटर को ठंडा रखता है। इस सिस्टम में कूलेंट का इस्तेमाल होता है। गर्मियों के मौसम में यह सिस्टम सबसे ज्यादा काम करता है। आपको अपनी गाड़ी के सर्विस शेड्यूल का सख्ती से पालन करना चाहिए।
हर सर्विसिंग के दौरान मैकेनिक से गाड़ी के कूलेंट लेवल की जांच करवाएं। अगर कूलेंट का स्तर कम है तो गाड़ी की बैटरी धूप में बहुत जल्दी गर्म हो जाएगी और आपको परफॉर्मेंस में भारी कमी नजर आएगी। आम तौर पर 2 साल में या एक तय किलोमीटर के बाद कूलेंट को पूरी तरह से बदला जाता है। आप खुद भी बोनट खोलकर कूलेंट रिजर्वॉयर का लेवल चेक कर सकते हैं। यह छोटी सी जांच आपकी गाड़ी को किसी बड़े नुकसान से बचा सकती है। आपको हर 6 महीने में एक बार यह जांच जरूर करनी चाहिए।
सॉफ्टवेयर अपडेट और बैटरी हेल्थ का सीधा संबंध
आजकल की इलेक्ट्रिक गाड़ियां पहियों पर चलने वाले कंप्यूटर की तरह होती हैं। जिस तरह से आप अपने स्मार्टफोन को अपडेट करते हैं उसी तरह गाड़ी के सॉफ्टवेयर को भी समय समय पर अपडेट करना बहुत जरूरी होता है। कार निर्माता कंपनियां लगातार डेटा इकट्ठा करती हैं और गर्मियों में बैटरी की परफॉर्मेंस को सुधारने के लिए नए सॉफ्टवेयर पैच जारी करती हैं।
जब आप अपनी गाड़ी का सॉफ्टवेयर अपडेट करते हैं तो गाड़ी का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और भी ज्यादा स्मार्ट तरीके से काम करने लगता है। कई बार कंपनियां अपडेट के जरिए बैटरी कूलिंग फैन की स्पीड को ऑप्टिमाइज करती हैं ताकि वह कम पावर में बैटरी को जल्दी ठंडा कर सके। अगर आप सॉफ्टवेयर अपडेट को नजरअंदाज करते हैं तो हो सकता है कि आपकी गाड़ी पुराने और कम प्रभावशाली सिस्टम पर चल रही हो जो गर्मी में बैटरी को पूरी सुरक्षा नहीं दे पा रहा हो। अपनी गाड़ी की स्क्रीन पर आने वाले हर अपडेट नोटिफिकेशन पर ध्यान दें और उसे कुछ सेकंड निकालकर इंस्टॉल करें। यह एक मुफ्त का तरीका है जो आपकी गाड़ी की उम्र को कई साल बढ़ा देता है।
आखिरी सुझाव
गर्मियों के मौसम में इलेक्ट्रिक गाड़ी का इस्तेमाल करना बहुत आसान है। आपको अपनी गाड़ी की बुनियादी जरूरतों को समझना है। गाड़ी को छांव में पार्क करना, सही समय पर चार्ज करना, ड्राइविंग को स्मूथ रखना और समय समय पर टायर प्रेशर चेक करना, ये सब बहुत छोटे कदम हैं। इन तरीकों को अपनी रोजमर्रा की ड्राइविंग का हिस्सा बनाएं। इससे लंबी अवधि में आपकी बैटरी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। आप बिना किसी चिंता के अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ी का पूरा मजा ले पाएंगे। बैटरी की सुरक्षा सीधे तौर पर आपकी आदतों पर निर्भर करती है और सही आदतों के साथ आपकी गाड़ी सालों तक बेहतरीन परफॉर्मेंस देती रहेगी।










