भारत में इलेक्ट्रिक वाहन या ईवी मोबिलिटी अब सिर्फ एक भविष्य की बात नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारे वर्तमान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। सरकार की फेम 3 नीति और विभिन्न राज्य स्तरीय ईवी नीतियों के भारी समर्थन के चलते दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे शहरों में मध्यम वर्गीय परिवार अब पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से बचने के लिए इलेक्ट्रिक कारों को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं। टाटा नेक्सॉन ईवी, पंच ईवी, एमजी जेडएस ईवी और बीवाईडी ऐट्टो 3 जैसी कारों ने ग्राहकों का भारी भरोसा जीता है। लेकिन जब भी कोई आम ग्राहक एक नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने का मन बनाता है, तो उसके दिमाग में सबसे बड़ी चिंता ड्राइविंग रेंज की होती है। एक बहुत ही आम सवाल जो हर नए ईवी मालिक के मन में उठता है, वह यह है कि अगर रास्ते में कार की बैटरी खत्म हो गई तो क्या होगा और किसी अनजान जगह पर आस पास का चार्जिंग स्टेशन कैसे खोजा जाएगा। आज के समय में भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत तेजी से फैल रहा है, लेकिन सही समय पर सही चार्जर ढूंढना आज भी एक तकनीकी कला है। इस आर्टिकल में हम मोटर और बैटरी के तकनीकी पहलुओं, रियल वर्ल्ड की चुनौतियों, एग्रीगेटर ऐप्स के काम करने के तरीके और स्मार्ट ट्रिप प्लानिंग पर बहुत ही गहराई से बात करेंगे, ताकि आप बिना किसी भी चिंता के अपनी ईवी यात्रा का पूरा आनंद ले सकें।
बैटरी पैक और चार्जिंग के प्रकार
अपने मोबाइल फोन के जरिए कोई भी चार्जिंग स्टेशन खोजने से पहले आपको एक मालिक के तौर पर यह समझना बहुत जरूरी है कि आपकी कार तकनीकी रूप से किस तरह की चार्जिंग को सपोर्ट करती है। एक इलेक्ट्रिक कार के बड़े बैटरी पैक को चार्ज करने के लिए मुख्य रूप से दो तरह के चार्जर का इस्तेमाल होता है जिन्हें हम अल्टरनेटिंग करंट यानी AC और डायरेक्ट करंट यानी DC कहते हैं। जब आप अपनी कार को अपने घर या ऑफिस की पार्किंग में चार्ज करते हैं, तो वह आमतौर पर AC चार्जिंग होती है। इस प्रक्रिया में आपकी गाड़ी के अंदर लगा हुआ ऑनबोर्ड चार्जर पावर ग्रिड से आने वाले AC पावर को DC में बदलता है और फिर उसे लिथियम आयन बैटरी पैक में सुरक्षित रूप से स्टोर करता है। 7.2 kW के AC फास्ट चार्जर से एक सामान्य कार की बैटरी को शून्य से फुल होने में लगभग 6 से 8 घंटे का समय लगता है।
दूसरी ओर, जब आप शहर के बाहर हाईवे पर या किसी शॉपिंग मॉल के पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर जाते हैं, तो वहां आपको बड़ी मशीनों वाले DC फास्ट चार्जर मिलते हैं। ये भारी भरकम चार्जर सीधे आपकी गाड़ी के बैटरी पैक में पावर भेजते हैं। एक 30 kW या 50 kW क्षमता वाला DC फास्ट चार्जर आपकी कार को मात्र 45 से 60 मिनट के भीतर 10 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक चार्ज कर सकता है। भारत में बिकने वाली ज्यादातर इलेक्ट्रिक गाड़ियां CCS2 कनेक्टर का इस्तेमाल करती हैं। यह कनेक्टर मूल रूप से यूरोपियन मानक पर आधारित है और भारत सरकार की ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा इसे भारतीय मौसम और स्थितियों के लिए सबसे सुरक्षित और उपयुक्त माना गया है। प्लगशेयर जैसे कई ऐप उपयोगकर्ताओं द्वारा दी गई जानकारी और विभिन्न नेटवर्क के डेटाबेस का उपयोग करके चार्जिंग स्टेशनों का विवरण देते हैं (Bharath Reddy et al., 2024)। इसलिए जब भी आप किसी ऐप के जरिए चार्जिंग स्टेशन खोजें, तो हमेशा अपने ऐप में यह फिल्टर लगाना न भूलें कि आपको CCS2 कनेक्टर वाला DC फास्ट चार्जर ही चाहिए। ऐसा करने से आप गलत कनेक्टर वाले स्टेशन पर पहुंचने की भारी परेशानी और समय की बर्बादी से बच जाएंगे।
इसके साथ ही आपको गाड़ी के अंदर मौजूद बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी बीएमएस के काम करने के तरीके को भी समझना होगा। जब आप DC फास्ट चार्जर लगाते हैं, तो शुरुआत में बैटरी बहुत तेजी से चार्ज होती है, लेकिन जैसे ही बैटरी 80 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचती है, तो बीएमएस सुरक्षा कारणों से चार्जिंग की गति को बहुत धीमा कर देता है ताकि बैटरी जरूरत से ज्यादा गर्म न हो। इसलिए 80 प्रतिशत के बाद पब्लिक चार्जर पर समय बिताना पैसे और समय दोनों की बर्बादी है।
शहर और हाईवे पर रेंज का गणित और चार्जिंग का खर्च
जब हम रियल वर्ल्ड के परिदृश्य की बात करते हैं, तो एक इलेक्ट्रिक वाहन चालक का अनुभव शहर की भीड़भाड़ और खुले हाईवे पर पूरी तरह से अलग होता है। दिल्ली या भोपाल जैसे बड़े और व्यस्त शहरों में ट्रैफिक के बीच इलेक्ट्रिक कार चलाना बहुत आसान और बेहद किफायती होता है। शहर में गाड़ी की गति कम होती है और बार बार ब्रेक लगाने के कारण कार का रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम बैटरी को वापस चार्ज करता रहता है। इससे आपको कार की पूरी कंपनी क्लेम वाली रेंज का फायदा मिलता है। शहर के अंदर 90 प्रतिशत से ज्यादा लोग अपनी कार को घर पर रात के समय चार्ज करते हैं। घरेलू बिजली की साधारण दर के हिसाब से एक यूनिट का खर्च लगभग 6 से 8 रुपये आता है। इस गणित के हिसाब से शहर में एक इलेक्ट्रिक कार को चलाने का कुल खर्च सिर्फ 1 से 2 रुपये प्रति km तक ही आता है, जो पेट्रोल कार के 8 से 10 रुपये प्रति km के मुकाबले बहुत बड़ी बचत है।
लेकिन जैसे ही आप अपनी कार को लेकर शहर के बाहर हाईवे पर निकलते हैं, तो यह समीकरण पूरी तरह से बदल जाता है। हाईवे पर 80 से 100 kmph की तेज रफ्तार पर लगातार चलने से गाड़ी की इलेक्ट्रिक मोटर को बहुत ज्यादा पावर की जरूरत होती है और हवा के भारी दबाव के कारण बैटरी तेजी से खत्म होती है। हाईवे पर आपको पूरी तरह से पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है। आज के समय में मुख्य हाईवे पर पब्लिक स्टेशन खोजना उतना मुश्किल नहीं है, लेकिन वहां लगने वाला आपका समय और बिजली का खर्च बहुत मायने रखता है। एक पब्लिक DC फास्ट चार्जर पर कमर्शियल दरें लागू होती हैं, जिससे बिजली की कीमत 18 से 25 रुपये प्रति यूनिट तक हो सकती है।
उदाहरण के तौर पर अगर आप अपनी इलेक्ट्रिक कार से भोपाल से इंदौर या दिल्ली से जयपुर की यात्रा कर रहे हैं, तो आपको रास्ते में कम से कम एक बार अपनी गाड़ी को चार्ज करना ही पड़ेगा। मान लीजिए आपकी गाड़ी में 40 kWh की बड़ी बैटरी है और आप इसे 10 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक चार्ज करते हैं। इस प्रक्रिया में गाड़ी लगभग 28 से 30 यूनिट बिजली की खपत करेगी। अगर एक यूनिट बिजली की कीमत 20 रुपये है, तो आपको लगभग 600 रुपये का भुगतान करना होगा। इतनी चार्जिंग में आपकी कार आपको हाईवे पर आसानी से 200 km की रेंज दे देगी। इसका मतलब है कि हाईवे पर भी आपकी गाड़ी चलाने का खर्च लगभग 3 रुपये प्रति km ही आएगा।
इसके अलावा कई बार आपको चार्जिंग स्टेशन पर पहुंचने के बाद यह पता चलता है कि चार्जर किसी कारण से खराब है या वहां पहले से ही गाड़ियों की लंबी लाइन लगी है। शोधकर्ताओं के अध्ययन के अनुसार चार्जिंग स्टेशनों पर अपनी बारी का इंतजार करने से ईवी उपयोगकर्ताओं का बहुत ही महत्वपूर्ण समय बर्बाद होता है। यही कारण है कि घर से हाईवे ट्रिप पर निकलने से पहले एक सही रूट प्लान करना और रास्ते में पड़ने वाले चार्जिंग स्टेशनों की वर्तमान स्थिति को मोबाइल ऐप्स के जरिए पहले से चेक करना बेहद जरूरी हो जाता है।
चार्जिंग नेटवर्क और स्मार्ट मोबाइल ऐप्स की तुलना

भारत में इस समय कई सरकारी और निजी कंपनियां अपना अपना चार्जिंग नेटवर्क स्थापित कर रही हैं। कुछ साल पहले तक ग्राहकों को हर एक ऑपरेटर का अलग ऐप डाउनलोड करना पड़ता था और उन सभी ऐप्स के डिजिटल वॉलेट में अपने पैसे फंसा कर रखने पड़ते थे। लेकिन आज के समय में तकनीक काफी आगे बढ़ चुकी है। पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन पूरी तरह से इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी आईओटी आधारित होते हैं और एक क्लाउड सर्वर द्वारा नियंत्रित होते हैं जहां उपयोगकर्ता इंटरनेट के माध्यम से चार्जिंग मैनेजमेंट सिस्टम से संवाद करते हैं । इन प्रणालियों को सुरक्षित बनाने के लिए कंपनियां लगातार काम कर रही हैं।
आज प्लगशेयर जैसा ग्लोबल एग्रीगेटर ऐप भारतीय ईवी ड्राइवरों के बीच भी बहुत अधिक लोकप्रिय हो चुका है। इसमें आप अपनी कार का मॉडल चुनकर मैप पर सिर्फ वही चार्जर देख सकते हैं जो आपकी गाड़ी में सपोर्ट करेंगे। इसके अलावा टाटा पावर ईजेड चार्ज, स्टेटिक, जियो बीपी पल्स और जिओन चार्जिंग आज के समय में बाजार के सबसे बड़े और भरोसेमंद खिलाड़ी हैं। अब कई नए सिस्टम आ रहे हैं जो बिना किसी विशेष कंपनी के ऐप के सीधे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई के जरिए भुगतान की सुविधा देते हैं जिससे प्रक्रिया बहुत पारदर्शी हो जाती है।
नीचे दी गई टेबल में हमने भारत के कुछ प्रमुख चार्जिंग नेटवर्क और एग्रीगेटर ऐप्स की तुलना की है:
| ऐप और नेटवर्क का नाम | मुख्य फायदे और फीचर्स | चार्जिंग की कीमत (प्रति यूनिट अनुमानित) |
| टाटा पावर ईजेड चार्ज | पूरे भारत के हाईवे और टियर 2 शहरों में सबसे बड़ा कवरेज और मजबूत सपोर्ट | 18 से 22 रुपये |
| स्टेटिक | तेजी से बढ़ता नेटवर्क जो दूसरे नेटवर्क के चार्जर भी अपने मैप पर दिखाता है | 17 से 21 रुपये |
| जिओन चार्जिंग | दक्षिण और मध्य भारत में मजबूत उपस्थिति, उच्च क्षमता वाले चार्जर | 19 से 24 रुपये |
| प्लगशेयर | यह खुद का चार्जर नहीं लगाता, सभी कंपनियों के स्टेशन खोजने के लिए बेस्ट है | लागू नहीं |
| जियो बीपी पल्स | चुनिंदा हाईवे पर बड़े स्टेशन, साफ सुथरे कैफे की सुविधा और बहुत तेज चार्जिंग | 18 से 23 रुपये |
हमारी विशेष रणनीतियां और स्मार्ट ट्रिप प्लानिंग
एक ऑटोमोटिव विशेषज्ञ के तौर पर मेरा आपको यह सख्त सुझाव है कि किसी भी लंबी ट्रिप पर जाने से पहले अपने स्मार्टफोन में कम से कम तीन बहुत जरूरी ऐप्स जरूर रखें: पहला प्लगशेयर, दूसरा टाटा पावर और तीसरा स्टेटिक। जब आप हाईवे पर चल रहे हों तो प्लगशेयर खोलकर अपने अगले रुकने वाले स्टेशन की हालिया चेक इन हिस्ट्री जरूर पढ़ें। इस ऐप में उपयोगकर्ता अपना अनुभव साझा करते हैं। अगर किसी व्यक्ति ने एक या दो दिन पहले ही लिखा है कि मशीन काम नहीं कर रही है या पावर में उतार चढ़ाव है, तो उस स्टेशन को अपने प्लान से तुरंत बाहर कर दें और कोई दूसरा विकल्प चुनें।
एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात यह है कि टाटा पावर जैसी कंपनियां आपको रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन कार्ड ऑर्डर करने की सुविधा देती हैं। यह कार्ड आपके ऐप के वॉलेट से जुड़ा होता है। हाईवे पर कई बार इंटरनेट नेटवर्क बहुत कमजोर होता है और ऐप खुलने में परेशानी होती है। ऐसे में यह कार्ड बहुत काम आता है। आपको सिर्फ अपना कार्ड मशीन पर टैप करना होता है और बिना मोबाइल ऐप खोले आपकी चार्जिंग एक सेकंड के भीतर शुरू हो जाती है।
एक और बड़ी समस्या जो हाईवे पर कई बार देखने को मिलती है वह है चार्जिंग स्टेशन की मशीन के सॉफ्टवेयर का हैंग हो जाना। ऐसे स्थिति में मशीन के ऊपर लगा हुआ लाल रंग का इमरजेंसी स्टॉप बटन आपकी मदद कर सकता है। अगर स्टेशन का सर्वर रिस्पॉन्स नहीं दे रहा है, तो आप उस लाल बटन को दबाकर उसे क्लॉकवाइज दिशा में घुमा सकते हैं, जिससे मशीन पूरी तरह से रीबूट हो जाती है और फिर से काम करने लगती है। इसके अतिरिक्त अगर कभी चार्जिंग पूरी होने के बाद चार्जर की गन आपकी गाड़ी में लॉक हो जाए और बाहर न निकले, तो घबराएं नहीं। लगभग हर इलेक्ट्रिक कार के बोनट के अंदर एक इमरजेंसी मैनुअल रिलीज केबल होती है। उसे खींचने पर गन तुरंत अनलॉक हो जाती है। यह एक ऐसी जानकारी है जो हर ईवी मालिक को पता होनी चाहिए।
क्या अभी ईवी खरीदकर हाईवे की यात्राएं की जा सकती हैं?
अक्सर कई नए ग्राहक हमसे यह सवाल पूछते हैं कि क्या अभी पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कार खरीदकर लंबी यात्राएं की जा सकती हैं या फिर हमें देश में चार्जिंग नेटवर्क के और भी ज्यादा मजबूत होने का इंतजार करना चाहिए। इस मामले में हमारी एकदम स्पष्ट राय यह है कि आपको इंतजार करने की कोई भी जरूरत नहीं है। हां यह सच है कि एक सामान्य पेट्रोल कार की तरह आप बिना कुछ सोचे समझे गाड़ी में चाबी लगाकर घर से नहीं निकल सकते, लेकिन केवल थोड़ी सी स्मार्ट प्लानिंग के साथ हाईवे की यात्रा पूरी तरह से संभव और बेहद सुखद है। आप जब भी 300 km या उससे अधिक की यात्रा की योजना बनाएं, तो अपनी कार की बैटरी को कभी भी 10 प्रतिशत से नीचे न जाने दें। हमेशा ऐसे चार्जिंग स्टेशन का चुनाव करें जहां आस पास अच्छे रेस्तरां या आराम करने की सुविधा मौजूद हो। जब तक आप 45 मिनट का ब्रेक लेकर अपनी चाय या खाना खत्म करेंगे, आपकी कार वापस 80 प्रतिशत तक चार्ज होकर अगले सफर के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगी।
भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का सुनहरा भविष्य
भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग स्टेशनों की संख्या हर एक गुजरते दिन के साथ बहुत तेजी से बढ़ रही है। आने वाले समय में इंटरऑपरेबिलिटी यानी सिर्फ एक ही ऐप या कार्ड के जरिए किसी भी कंपनी के नेटवर्क वाले चार्जर को इस्तेमाल करने की सुविधा पूरी तरह से आम हो जाएगी। जैसे जैसे फेम 3 जैसी सरकारी नीतियां और अधिक मजबूत होंगी और निजी कंपनियां अपना निवेश बढ़ाएंगी, हमें हर 20 से 30 km पर एक उच्च गति वाला विश्वसनीय चार्जर आसानी से देखने को मिलेगा। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि आने वाले समय में पुराने पेट्रोल पंपों पर भी कम से कम एक या दो ईवी चार्जिंग पॉइंट अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। इससे आम आदमी के भीतर जो रेंज को लेकर एक डर बैठा हुआ है, वह पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। तब तक के लिए एक जागरूक ग्राहक बनें, अपने स्मार्टफोन में सही और भरोसेमंद ऐप्स डाउनलोड करें, अपनी गाड़ी की तकनीकी क्षमता को गहराई से समझें और बिना किसी डर के भारत की नई इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्रांति का पूरा फायदा उठाएं।










