इलेक्ट्रिक कार की सर्विसिंग में कितना खर्च आता है एक पूरी और सच्ची जानकारी

EV Servicing
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आज के समय में जब आप एक नई कार खरीदने बाजार में जाते हैं तो इलेक्ट्रिक कार का विचार आपके मन में जरूर आता है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता ने भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग को बहुत बढ़ा दिया है। शोरूम में खड़ा सेल्समैन आपको बड़े चाव से बताता है कि ईवी चलाने का खर्च पेट्रोल के मुकाबले बहुत कम है। यह बात सच भी है। घर पर चार्ज करने पर इलेक्ट्रिक कार को चलाने का खर्च ₹1 से ₹1.5 प्रति km आता है। वहीं पेट्रोल कार को चलाने में ₹5 से ₹7 प्रति km का खर्च बैठता है। लेकिन जब बात सर्विसिंग की आती है तो ग्राहकों के मन में कई सवाल होते हैं। लोगों को लगता है कि इलेक्ट्रिक कार में बड़ी बैटरी और महंगी मोटर लगी है तो सर्विस सेंटर वाले इसका मोटा बिल बनाएंगे। आज हम इसी बात पर विस्तार से चर्चा करेंगे कि भारत में एक इलेक्ट्रिक कार की सर्विसिंग में असल में कितना खर्च आता है।

पेट्रोल और डीजल कारों के मुकाबले सर्विसिंग खर्च

पेट्रोल और डीजल कारों के मुकाबले ईवी का सर्विसिंग खर्च बहुत अलग होता है। एक पेट्रोल या डीजल इंजन वाली कार में लगभग दो हजार ऐसे पुर्जे होते हैं जो लगातार चलते और घिसते रहते हैं। इसमें इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर, एयर फिल्टर, स्पार्क प्लग, टाइमिंग बेल्ट और क्लच प्लेट जैसी चीजें शामिल होती हैं। इन सभी पुर्जों को हर साल या एक तय km के बाद बदलना पड़ता है।

वहीं दूसरी तरफ एक इलेक्ट्रिक कार में सिर्फ बीस के करीब मूविंग पार्ट्स होते हैं। इलेक्ट्रिक कार में कोई इंजन नहीं होता। इसलिए उसमें इंजन ऑयल और ऑयल फिल्टर बदलने का कोई झंझट नहीं होता। यही कारण है कि इलेक्ट्रिक कार का नियमित सर्विसिंग खर्च पेट्रोल कार के मुकाबले चालीस से साठ प्रतिशत तक कम होता है। आपकी कार में सिर्फ इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी पैक मुख्य हिस्से होते हैं जिन्हें किसी तरह के रेगुलर लुब्रिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती।

इलेक्ट्रिक कारों की सर्विसिंग में असल में क्या चेक होता है

जब आप अपनी इलेक्ट्रिक कार को सर्विस सेंटर लेकर जाते हैं तो मैकेनिक सबसे पहले आपकी गाड़ी का सॉफ्टवेयर अपडेट चेक करता है। आज की इलेक्ट्रिक कारें पहियों पर चलने वाले कंप्यूटर की तरह हैं। कंपनी समय समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट भेजती है जिससे कार की रेंज, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और इंफोटेनमेंट सिस्टम बेहतर होता है। अक्सर इन अपडेट्स को इंस्टॉल करने का काम सर्विस के दौरान ही किया जाता है।

इसके बाद कार की हाई वोल्टेज बैटरी और केबल नेटवर्क की जांच होती है। यह देखा जाता है कि कहीं से कोई तार कटा हुआ तो नहीं है या बैटरी पैक के नीचे कोई नुकसान तो नहीं हुआ है। स्कैनर को कार से जोड़कर बैटरी के एक एक सेल की हेल्थ चेक की जाती है। इसके अलावा कार के सस्पेंशन, स्टीयरिंग सिस्टम और लाइट्स की भी बारीकी से जांच की जाती है क्योंकि ये हिस्से पेट्रोल कार की तरह ही काम करते हैं और समय के साथ इनमें भी घिसावट आती है।

भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक कारों का सालाना सर्विसिंग खर्च

Nexon EV
Nexon EV

नीचे दी गई टेबल में आप देख सकते हैं कि भारत में बिकने वाली कुछ लोकप्रिय इलेक्ट्रिक कारों की सर्विसिंग में साल भर में कितना खर्च आता है। यह खर्च एक अनुमान है जो आपके चलाने के तरीके और शहर के अनुसार थोड़ा बहुत बदल सकता है।

कार का नामसर्विस का समयअनुमानित सालाना खर्चबैटरी वारंटी
टाटा नेक्सॉन ईवी1 साल या 15000 km₹3500 से ₹55008 साल या 160000 km
टाटा टियागो ईवी6 महीने या 7500 km₹2000 से ₹40008 साल या 160000 km
एमजी जेडएस ईवी1 साल या 10000 km₹4500 से ₹70008 साल या 150000 km
महिंद्रा एक्सयूवी4001 साल या 10000 km₹4000 से ₹65008 साल या 160000 km
बीवाईडी एटो 31 साल या 20000 km₹5500 से ₹85008 साल या 160000 km

टाटा नेक्सॉन ईवी और टियागो ईवी का सर्विसिंग शेड्यूल

टाटा मोटर्स भारत में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें बेचती है। अगर आप टियागो ईवी खरीदते हैं तो आपको अपनी कार को हर 6 महीने या 7500 km चलने के बाद सर्विस सेंटर ले जाना होता है। पहले साल में टियागो ईवी की सर्विसिंग पर लगभग ₹1500 से ₹2000 का खर्च आता है जिसमें व्हील अलाइनमेंट, बैलेंसिंग और गाड़ी की वाशिंग शामिल होती है। दूसरे साल से यह खर्च थोड़ा बढ़कर ₹4000 से ₹5000 सालाना तक हो जाता है।

वहीं अगर आपके पास टाटा नेक्सॉन ईवी है तो उसका सर्विस इंटरवल 1 साल या 15000 km का है। नेक्सॉन ईवी के लिए आपको हर साल लगभग ₹3500 से ₹5500 खर्च करने पड़ते हैं। यह रकम एक पेट्रोल नेक्सॉन के सालाना सर्विस खर्च के आधे से भी कम है। सर्विस सेंटर वाले नेक्सॉन ईवी के सस्पेंशन नट बोल्ट कसते हैं और मोटर के माउंट्स को चेक करते हैं ताकि गाड़ी चलाते समय कोई आवाज न आए।

कूलेंट और ब्रेक फ्लुइड का खर्च

इलेक्ट्रिक वाहन में सर्विसिंग के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान जिन चीजों पर दिया जाता है उनमें कूलेंट और ब्रेक फ्लुइड सबसे ऊपर आते हैं। बहुत से लोगों को यह गलतफहमी होती है कि इलेक्ट्रिक कार में कूलेंट की जरूरत नहीं होती। असल में इलेक्ट्रिक कार की बैटरी और मोटर को ठंडा रखने के लिए एक खास तरह के कूलेंट का इस्तेमाल किया जाता है।

जब आप अपनी कार को तेज स्पीड में चलाते हैं या फास्ट चार्जर से चार्ज करते हैं तो बैटरी बहुत गर्म होती है। इस गर्मी को कंट्रोल करने के लिए कूलिंग सिस्टम लगातार काम करता है। आमतौर पर इलेक्ट्रिक कारों में हर 3 साल या 60000 km के बाद कूलेंट को पूरी तरह से बदलना पड़ता है। इस काम में लगभग ₹3000 से ₹4500 का खर्च आता है। इसी तरह ब्रेक फ्लुइड को भी हर 2 साल या 45000 km के बाद बदलना जरूरी होता है क्योंकि यह समय के साथ हवा से नमी सोख लेता है। ब्रेक फ्लुइड बदलने का खर्च लगभग ₹1000 से ₹1500 के बीच आता है।

रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और ब्रेक पैड्स की लंबी उम्र

रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम के कारण इलेक्ट्रिक कारों के ब्रेक पैड्स बहुत लंबी उम्र जीते हैं। पेट्रोल कार में आपको हर 30000 से 40000 km के बाद ब्रेक पैड्स बदलने पड़ते हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक कार में जब आप एक्सीलरेटर से पैर हटाते हैं तो मोटर खुद ही कार की स्पीड कम करने लगती है और इससे पैदा होने वाली बिजली बैटरी को वापस चार्ज करती है।

इस पूरी प्रक्रिया को रीजेनरेटिव ब्रेकिंग कहा जाता है। इस तकनीक के कारण ब्रेक पैड्स का इस्तेमाल बहुत कम होता है। एक आम इलेक्ट्रिक कार के ब्रेक पैड्स आसानी से 80000 km से 120000 km तक चल जाते हैं। कुछ मामलों में तो कार के पिछले ब्रेक पैड्स पूरी जिंदगी बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। सर्विस के दौरान मैकेनिक सिर्फ ब्रेक पैड्स को खोलकर साफ करता है और वापस लगा देता है। इससे लंबे समय में आपकी जेब से होने वाला खर्च काफी बच जाता है।

टायर एक ऐसी चीज है जिस पर ज्यादा खर्च आता है

टायर एक ऐसी चीज है जिस पर इलेक्ट्रिक कार में पेट्रोल कार के मुकाबले सबसे ज्यादा खर्च आता है। इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी का वजन बहुत ज्यादा होता है जिससे पूरी गाड़ी का वजन पेट्रोल कार से काफी अधिक हो जाता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक कारें बहुत तेज होती हैं, एक्सीलरेटर दबाते ही मोटर सिर्फ कुछ सेकंड में कार को बहुत तेज स्पीड दे देती है और यह सारा टॉर्क सीधा पहियों पर जाता है।

जब यह भारी वजन और इंस्टेंट पावर एक साथ पहियों पर पड़ती है तो टायर बहुत तेजी से घिसते हैं। एक सामान्य पेट्रोल कार के टायर 50000 से 60000 km तक चल जाते हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक कार में आपको 30000 से 40000 km के बाद ही टायर बदलने पड़ सकते हैं। एक अच्छी क्वालिटी के ईवी टायर का सेट ₹28000 से लेकर ₹40000 तक आ सकता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप हर 7500 km या 10000 km पर अपनी कार का व्हील अलाइनमेंट और टायर रोटेशन जरूर करवाएं। ऐसा करने से चारों टायर एक समान घिसेंगे और उनकी उम्र कुछ हद तक बढ़ाई जा सकती है।

केबिन एयर फिल्टर और ट्रांसएक्सल ऑयल का बदलाव

ट्रांसएक्सल ऑयल का बदलाव भी इलेक्ट्रिक वाहन सर्विसिंग का एक अहम हिस्सा है। इलेक्ट्रिक कार में गियरबॉक्स नहीं होता है लेकिन एक रिडक्शन गियर होता है जो मोटर की स्पीड को पहियों तक सही तरीके से पहुंचाता है। इस हिस्से को चिकनाई देने के लिए ट्रांसएक्सल ऑयल का इस्तेमाल होता है। कई कारों में इसे हर 2 साल या 30000 km के बाद चेक किया जाता है या बदला जाता है। यह एक मामूली खर्च है जो ₹1000 से ₹2000 के अंदर निपट जाता है लेकिन कार की मोटर और पावर डिलीवरी को स्मूथ रखने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।

भारत जैसे देश में जहां धूल और प्रदूषण बहुत ज्यादा है वहां केबिन फिल्टर बहुत जल्दी गंदा हो जाता है। आपको अपनी इलेक्ट्रिक कार का केबिन एसी फिल्टर हर साल या 10000 km के बाद बदल देना चाहिए। इसका खर्च मात्र ₹400 से ₹600 आता है। अगर आप इसे नहीं बदलते हैं तो कार के अंदर बदबू आ सकती है और एसी की कूलिंग भी कम हो सकती है। कार में वाइपर ब्लेड और वॉशर फ्लूइड जैसी छोटी चीजें भी होती हैं। बारिश के मौसम से पहले वाइपर ब्लेड्स जरूर बदल लें। वॉशर फ्लूइड के टैंक में हमेशा एक से दो लीटर साफ पानी और वॉशर शैम्पू का मिक्सचर भर कर रखें ताकि विंडशील्ड साफ रहे।

होम चार्जर और 12 वोल्ट बैटरी का रखरखाव

ईवी की चार्जिंग मशीन यानी वॉल बॉक्स चार्जर का मेंटेनेंस भी आपके कुल खर्चे का एक हिस्सा हो सकता है। जब आप इलेक्ट्रिक कार खरीदते हैं तो आपके घर पर कंपनी की तरफ से एक चार्जर लगाया जाता है। आम तौर पर 7.2 किलोवाट का चार्जर एक कार की बैटरी को पूरा भरने में लगभग 6 से 8 घंटे का समय लेता है। इस चार्जर को भी धूल और पानी से बचाना बहुत जरूरी है। चार्जर के तारों को मोड़ने से बचें और प्लग को हमेशा साफ रखें।

यह एक बहुत ही रोचक पहलू है कि आपकी बड़ी इलेक्ट्रिक कार में पेट्रोल कारों जैसी ही एक छोटी 12 वोल्ट की बैटरी भी लगी होती है। कार की मेन हाई वोल्टेज बैटरी सिर्फ मोटर को पावर देती है लेकिन कार के अंदर की लाइट्स, म्यूजिक सिस्टम, टचस्क्रीन, हॉर्न और यहां तक कि कार के मेन कंप्यूटर सिस्टम को ऑन करने का काम यही छोटी बैटरी करती है। अगर यह 12 वोल्ट की बैटरी खराब हो जाए तो आपकी पूरी कार चालू ही नहीं होगी चाहे आपकी मेन बैटरी 100 प्रतिशत चार्ज क्यों न हो। एक पेट्रोल कार की तरह आपको हर तीन से चार साल में यह बैटरी बदलनी पड़ती है जिसका खर्च बाजार में लगभग ₹4000 से ₹6000 के आसपास आता है।

अंडरबॉडी की सुरक्षा का महत्व

इलेक्ट्रिक कारों में अंडरबॉडी की सुरक्षा पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। बैटरी पैक गाड़ी के फर्श के ठीक नीचे लगा होता है। भारत की सड़कों पर कई बार गहरे गड्ढे और ऊंचे स्पीड ब्रेकर मिलते हैं। अगर गाड़ी का निचला हिस्सा जोर से टकराता है तो बैटरी के कवर को नुकसान पहुंच सकता है। सर्विसिंग के दौरान सर्विस सेंटर वाले गाड़ी को लिफ्ट करके अंडरबॉडी की पूरी जांच करते हैं। आपको भी बरसात के दिनों में कार की अंडरबॉडी को साफ रखना चाहिए ताकि कीचड़ और पानी से लोहे के हिस्सों में जंग न लगे।

एक और जरूरी बात यह है कि अपनी इलेक्ट्रिक कार की सर्विसिंग बाहर किसी लोकल गैराज में कभी न करवाएं। एक इलेक्ट्रिक कार के अंदर हाई वोल्टेज के मोटे नारंगी तार होते हैं जिनमें 400 वोल्ट तक का करंट दौड़ता है। अगर किसी लोकल मैकेनिक ने गलती से कोई गलत तार काट दिया तो जान का बहुत बड़ा खतरा हो सकता है। इसके अलावा लोकल गैराज के पास गाड़ी का सॉफ्टवेयर पढ़ने वाला स्कैनर भी नहीं होता है। ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर में जाने से आपकी गाड़ी सुरक्षित हाथों में रहती है और आपकी बैटरी की वारंटी भी बची रहती है।

सर्विसिंग के खर्च को कम रखने के आसान तरीके

आप अपनी तरफ से कुछ आसान तरीके अपनाकर अपनी कार का सर्विस और मेंटेनेंस खर्च काफी हद तक कम रख सकते हैं। अपनी गाड़ी की सर्विस हमेशा तय समय या तय km पूरा होने पर ही कराएं। कार के टायरों में हवा का दबाव हमेशा सही रखें जिससे आपकी कार बेहतर रेंज देगी और टायरों की उम्र भी बढ़ेगी।

कार को बार बार 100 प्रतिशत तक फास्ट चार्जर से चार्ज करने से बचें। अपनी बैटरी को हमेशा 20 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के बीच रखना बैटरी की सेहत के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। महीने में सिर्फ एक बार कार को घर के स्लो चार्जर से 100 प्रतिशत चार्ज करें ताकि बैटरी के सभी सेल्स संतुलित हो जाएं।

जब आप हाईवे पर गाड़ी चला रहे हों तो बहुत ज्यादा तेज स्पीड से बचें। लगातार 100 kmph से ऊपर की स्पीड पर चलाने से बैटरी बहुत तेजी से गिरती है और मोटर के साथ साथ बैटरी कूलिंग सिस्टम पर भी ज्यादा दबाव पड़ता है। इसके अलावा कार को चलाते समय अचानक ब्रेक लगाने या झटके से स्पीड बढ़ाने से बचें। स्मूथ ड्राइविंग न सिर्फ आपकी सेफ्टी के लिए अच्छी है बल्कि यह गाड़ी के हर पुर्जे की लाइफ को बढ़ा देती है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो इलेक्ट्रिक कार की सर्विसिंग कोई मुश्किल काम नहीं है। आपको इंजन ऑयल बदलने, क्लच प्लेट चेक कराने या स्पार्क प्लग साफ करवाने के लिए मैकेनिक के पास नहीं भागना पड़ता। साल में एक बार अपनी कार सर्विस सेंटर लेकर जाएं। कंप्यूटर से गाड़ी स्कैन होगी, कुछ जरूरी लिक्विड चेक होंगे और आपकी गाड़ी फिर से नई जैसी होकर बाहर आ जाएगी। पांच साल के टाइम फ्रेम में एक पेट्रोल एसयूवी की सर्विसिंग में जहां ₹60000 तक खर्च हो जाते हैं वहीं एक इलेक्ट्रिक एसयूवी को उसी दौरान मेंटेन करने का खर्च सिर्फ ₹30000 से ₹35000 के आसपास आता है। बस सर्विस का सही शेड्यूल फॉलो करें और आपकी कार आपको एक बेहतरीन ड्राइविंग अनुभव देती रहेगी।

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