पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत में बढ़ा EV रेट्रोफिटिंग का क्रेज, अब पेट्रोल-डीजल की छुट्टी!

Transformation To EV
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ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को बंद करने के फैसले ने पूरी दुनिया, विशेषकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, और इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल तक पहुँचने का अनुमान है। भारत, जो अपनी जरूरतों का 85% कच्चा तेल आयात करता है, इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।

लेकिन इस संकट ने भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक नई क्रांति को जन्म दिया है – ईवी रेट्रोफिटिंग। बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे शहरों में अब लोग नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने के बजाय अपनी पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों और ऑटो-रिक्शा को इलेक्ट्रिक में बदलवा रहे हैं।

पश्चिम एशिया युद्ध और भारत में ईंधन का गहराता संकट

भारत के लिए यह केवल एक भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ने वाली मार है। भारत का अधिकांश कच्चा तेल इसी हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। आपूर्ति रुकने से भारतीय क्रूड बास्केट की कीमतों में जनवरी की तुलना में लगभग 133% की भारी बढ़त देखी गई है।

पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ CNG और LPG की स्थिति और भी चिंताजनक है। भारत को गैस सप्लाई करने वाला प्रमुख देश कतर भी इस संकट की चपेट में है, जिससे गैस टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है। यही कारण है कि अब लोग वैकल्पिक ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।

ईवी रेट्रोफिटिंग क्या है और इसकी मांग अचानक क्यों बढ़ी?

EV
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सरल शब्दों में कहें तो, अपनी पुरानी इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल, डीजल या CNG गाड़ी के इंजन को हटाकर उसमें इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी किट लगाना ही ‘रेट्रोफिटिंग’ कहलाता है। गुरुग्राम स्थित ‘फोल्क्स मोटर’ (Folks Motor) और बेंगलुरु की ‘एक्सपोनेंट एनर्जी जैसी कंपनियों के पास पूछताछ में दोगुने से ज्यादा का उछाल आया है।

‘फोल्क्स मोटर’, जो कारों को हाइब्रिड में बदलती है, युद्ध शुरू होने से पहले महीने में 40–60 गाड़ियाँ कन्वर्ट कर रही थी, लेकिन पिछले दो महीनों में उन्होंने 250 से अधिक यूनिट्स का काम पूरा किया है। यह लगभग 5 गुना की वृद्धि है, जो स्पष्ट करती है कि भारतीय उपभोक्ता अब ईंधन की अनिश्चितता से थक चुके हैं।

कम लागत में इलेक्ट्रिक वाहन का आनंद

एक नई इलेक्ट्रिक कार खरीदना आज भी आम मध्यम वर्ग के लिए थोड़ा महंगा सौदा हो सकता है, लेकिन रेट्रोफिटिंग एक किफायती विकल्प बनकर उभरा है।

  • कार से हाइब्रिड: यदि आप अपनी कार को हाइब्रिड में बदलना चाहते हैं, तो इसका खर्च लगभग ₹3 लाख से ₹6 लाख के बीच आता है।
  • 3-व्हीलर (CNG/LPG से EV): ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए यह वरदान है। मात्र ₹1.7 लाख में एक ऑटो को फुल इलेक्ट्रिक में बदला जा सकता है।
  • कार से फुल EV: पुरानी कार को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाने में बैटरी की क्षमता के आधार पर ₹4 लाख से ₹8 लाख तक का खर्च आ सकता है।

व्यावसायिक दृष्टि से देखें तो एक ऑटो ड्राइवर जो हर दिन गैस पर ₹300-400 खर्च करता है, इलेक्ट्रिक में बदलने के बाद उसका खर्च घटकर मात्र ₹40-60 रह जाता है। इस बचत से रेट्रोफिटिंग की लागत मात्र 8 महीनों में वसूल हो जाती है।

एक्सपोनेंट एनर्जी और फोल्क्स मोटर

रेट्रोफिटिंग के क्षेत्र में ‘एक्सपोनेंट एनर्जी’ ने विशेष रूप से थ्री-व्हीलर सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित किया है। उनका दावा है कि वे किसी भी LPG या CNG ऑटो को रातों-रात इलेक्ट्रिक में बदल सकते हैं। बेंगलुरु में उनके पायलट प्रोजेक्ट को शानदार प्रतिक्रिया मिली है।

दूसरी ओर, ‘निखिल खुराना’ के नेतृत्व वाली ‘फोल्क्स मोटर’ ने हाइब्रिड तकनीक के जरिए उन लोगों को राहत दी है जो पूरी तरह बिजली पर निर्भर नहीं होना चाहते लेकिन ईंधन का खर्च 30-40% तक कम करना चाहते हैं। इन कंपनियों की सफलता यह दर्शाती है कि आने वाले समय में सड़कों पर पुरानी गाड़ियाँ नए अवतार में दौड़ती नजर आएंगी।

क्या है सरकारी नीति और भविष्य की राह?

भारत सरकार भी धीरे-धीरे रेट्रोफिटिंग को लेकर अपनी नीतियों को स्पष्ट कर रही है। हालांकि अभी भी बड़े पैमाने पर इसे अपनाने के लिए कुछ नीतिगत बाधाएं हैं, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा अब भारत का सबसे बड़ा एजेंडा बन गया है।

सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) वर्तमान में डीजल पर प्रति लीटर ₹13.50 और पेट्रोल पर ₹1 का नुकसान झेल रही हैं। यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती, जिससे भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ना तय है। ऐसे में रेट्रोफिटिंग न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि आम जनता की बचत के लिए भी सबसे सटीक समाधान साबित होने वाला है।

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