भारत में 29,000 से अधिक EV चार्जिंग स्टेशन्स: जानें कौन सा राज्य है सबसे आगे और कहाँ है कमी

Charging Station India
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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की क्रांति अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों पर भी दिखने लगी है। हाल ही में बिजली मंत्रालय (PIB India) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने एक बड़ा मील का पत्थर पार करते हुए देशभर में 29,000 से अधिक पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन्स स्थापित कर लिए हैं। यह उपलब्धि भारत के क्लीन मोबिलिटी के सपने को सच करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है। हालांकि, इन आंकड़ों के पीछे राज्यों के बीच बुनियादी ढांचे का एक बड़ा अंतर भी छिपा है, जिसे समझना भविष्य की योजना के लिए बेहद जरूरी है।

कर्नाटक बना नंबर वन

इलेक्ट्रिक वाहन बुनियादी ढांचे के मामले में कर्नाटक पूरे देश में शीर्ष पर है। 6,097 चार्जिंग स्टेशन्स के साथ कर्नाटक ने अन्य सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह संख्या दूसरे स्थान पर काबिज महाराष्ट्र (4,155 स्टेशन्स) से करीब 2,000 अधिक है। कर्नाटक की इस सफलता का श्रेय बेंगलुरु की तकनीक-प्रेमी जनता, राज्य की सक्रिय EV नीति और प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों की मौजूदगी को जाता है। यहाँ के ड्राइवरों के लिए अब ‘रेंज एंग्जायटी’ (बैटरी खत्म होने का डर) पुरानी बात होती जा रही है।

भारत के टॉप 10 राज्य

Charging Station
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देश के कुल चार्जिंग नेटवर्क का लगभग 85% हिस्सा केवल 10 राज्यों में केंद्रित है। आंकड़ों के अनुसार शीर्ष राज्य इस प्रकार हैं:

  1. कर्नाटक: 6,097
  2. महाराष्ट्र: 4,155
  3. उत्तर प्रदेश: 2,326
  4. दिल्ली: 1,967
  5. तमिलनाडु: 1,781राजस्थान, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश और तेलंगाना भी इस सूची में शामिल हैं। यह स्पष्ट है कि दक्षिण और पश्चिम भारत वर्तमान में EV क्रांति का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों को अभी काफी सफर तय करना बाकी है।

दिल्ली की नई EV नीति और बुनियादी ढांचे की चुनौती

देश की राजधानी दिल्ली 1,967 स्टेशन्स के साथ चौथे स्थान पर है। दिल्ली सरकार की आगामी EV नीति (2026-2030) के अनुसार, 2027 से नए पेट्रोल-डीजल तिपहिया और 2028 से दोपहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने की योजना है। साथ ही, हर डीलर के लिए सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट लगाना अनिवार्य होगा। यदि दिल्ली को अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाना है, तो मौजूदा बुनियादी ढांचे को अगले 24 महीनों में बहुत तेज़ी से विस्तार देना होगा।

लद्दाख और लक्षद्वीप में केवल 1 स्टेशन

जहाँ एक तरफ बड़े राज्य हजारों स्टेशन्स का जश्न मना रहे हैं, वहीं देश के कुछ हिस्सों में स्थिति अभी भी चिंताजनक है। लद्दाख और लक्षद्वीप में केवल 1-1 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन है। यहाँ तक कि चंडीगढ़ जैसे नियोजित शहर में भी केवल 14 स्टेशन्स हैं। पहाड़ी और द्वीपीय क्षेत्रों में लॉजिस्टिक चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन शहरों में कम संख्या नीतिगत खामियों को दर्शाती है। जब तक यह नेटवर्क हर छोटे शहर और गांव तक नहीं पहुँचता, तब तक EV का पूर्ण प्रसार संभव नहीं है।

शहरी केंद्रों से आगे निकलने की जरूरत

वर्तमान में भारत का चार्जिंग नेटवर्क मुख्य रूप से टियर-1 शहरों (जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु) और प्रमुख नेशनल हाईवे तक ही सीमित है। पेट्रोल पंपों और बड़े मॉल्स में तो चार्जर मिल जाते हैं, लेकिन असली चुनौती टियर-2 और टियर-3 शहरों (जैसे मेरठ, सूरत, भोपाल, पटना) में नेटवर्क को मजबूत करने की है। इन शहरों में लाखों वाहन मालिक हैं जो इलेक्ट्रिक पर स्विच करना चाहते हैं, लेकिन भरोसेमंद चार्जिंग पॉइंट की कमी उन्हें पीछे खींच रही है।

1 लाख स्टेशन्स का लक्ष्य

29,000 का आंकड़ा एक शानदार शुरुआत है, लेकिन भारत का असली सफर तब शुरू होगा जब हम 1,00,000 स्टेशन्स के आंकड़े को पार करेंगे। इसके लिए सरकारों को भूमि आवंटन, सब्सिडी और बिजली वितरण कंपनियों (DISCOM) के साथ तालमेल बिठाना होगा। हाईवे पर लगे चार्जर्स का केवल होना काफी नहीं है, उनका हमेशा चालू और मेंटेन रहना भी जरूरी है। भारत ने साबित कर दिया है कि वह तेज़ी से निर्माण कर सकता है, अब ध्यान ‘समान वितरण’ पर होना चाहिए।

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