दिल्ली में रहने वाले और रोज़ाना मोटरसाइकिल या स्कूटर से सफर करने वाले लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। दिल्ली कैबिनेट ने अपनी बहुप्रतीक्षित दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026 (जिसे ईवी पॉलिसी 2.0 भी कहा जा रहा है) को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस नीति पर मुहर लगाई गई है। यह नई पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही है और 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। इस पॉलिसी का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी असर टू-व्हीलर इंडस्ट्री और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है, क्योंकि सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 अप्रैल 2028 के बाद दिल्ली में किसी भी नए पेट्रोल या सीएनजी टू-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप दिल्ली में रहते हैं, तो आपके पास नया पेट्रोल स्कूटर या मोटरसाइकिल खरीदने के लिए अब दो साल से भी कम का समय बचा है। 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल और केवल नए इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का ही रजिस्ट्रेशन हो सकेगा। सरकार का यह कदम राजधानी में तेजी से बढ़ते प्रदूषण को रोकने और क्लीन मोबिलिटी यानी पर्यावरण के अनुकूल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। चलिए विस्तार से समझते हैं कि इस नई पॉलिसी में आम जनता के लिए क्या फायदे हैं, किसे कितनी सब्सिडी मिलेगी और इस फैसले से ऑटो बाजार में क्या बदलाव आने वाले हैं।
प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार ने बनाई सख्त समयसीमा
दिल्ली में सर्दियों के दिनों में प्रदूषण का स्तर किस कदर बढ़ जाता है, यह किसी से छिपा नहीं है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में कुल प्रदूषण में कमर्शियल मालवाहक वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत है, जबकि टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर मिलकर करीब 46 प्रतिशत प्रदूषण फैलाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग की प्रधान सचिव निहारिका राय ने स्पष्ट किया है कि नई नीति में उन श्रेणियों को पहले टारगेट किया गया है जो हवा को सबसे ज्यादा दूषित करती हैं।
सरकार ने इसके लिए एक चरणबद्ध टाइमलाइन तैयार की है ताकि आम लोगों और ऑटो कंपनियों को संभलने का मौका मिल सके। इस टाइमलाइन के तहत सबसे पहला नंबर ऑटो-रिक्शा और N1 कैटेगरी के मालवाहक वाहनों (3.5 टन से कम वजन वाले छोटे कमर्शियल ट्रक्स) का आएगा। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा और इलेक्ट्रिक N1 वाहनों का ही नया रजिस्ट्रेशन होगा। इसके ठीक बाद, यानी 1 अप्रैल 2028 से यह नियम टू-व्हीलर सेगमेंट पर भी लागू हो जाएगा। हालांकि, इस फैसले से उन लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है जिनके पास पहले से पेट्रोल बाइक या स्कूटर मौजूद हैं। यह नियम केवल नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर लागू होगा, यानी पुराने रजिस्टर्ड पेट्रोल वाहन अपनी तय उम्र (पेट्रोल के लिए 15 साल) तक सड़कों पर चलते रहेंगे।
नई गाड़ी खरीदने पर मिलेगी भारी सब्सिडी, सीधे खाते में आएगा पैसा

पेट्रोल गाड़ियों को बंद करने के फैसले के साथ ही सरकार ने इस बात का भी पूरा ख्याल रखा है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को खरीदना लोगों की जेब पर भारी न पड़े। ग्राहकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने ₹15,000 करोड़ का एक विशाल बजट आवंटित किया है। इसमें से करीब ₹7,000 करोड़ सिर्फ खरीद इंसेंटिव यानी सब्सिडी पर खर्च किए जाएंगे।
इस बार सरकार ने सब्सिडी के लिए एक खास तरीका अपनाया है, जिसके तहत शुरुआती सालों में ज्यादा फायदा मिलेगा ताकि लोग जल्दी से जल्दी ईवी अपनाएं। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वाले ग्राहकों को पहले साल में ₹30,000 तक की बड़ी सब्सिडी दी जाएगी। दूसरे साल में इसे घटाकर ₹20,000 और तीसरे साल में ₹10,000 कर दिया जाएगा। यह सारी सब्सिडी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी, जिससे किसी भी तरह की धोखाधड़ी या देरी की गुंजाइश नहीं रहेगी।
पुरानी गाड़ी कबाड़ में देने पर मिलेगा डबल फायदा
अगर आपके पास कोई बहुत पुरानी पेट्रोल मोटरसाइकिल या कार है जो प्रदूषण फैला रही है, तो उसे बदलकर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर सरकार आपको स्क्रैपेज इंसेंटिव यानी कबाड़ बोनस का भी लाभ देगी। टू-व्हीलर सेगमेंट के लिए यह स्क्रैपेज इंसेंटिव ₹10,000 तय किया गया है। वहीं थ्री-व्हीलर के लिए ₹25,000 और N1 ट्रक्स के लिए ₹50,000 का स्क्रैपेज बोनस मिलेगा।
इतना ही नहीं, जो लोग अपनी बीएस-4 (BS-IV) या उससे भी पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को कबाड़ में देकर नई इलेक्ट्रिक कार खरीदेंगे, उन्हें ₹1 लाख तक का भारी स्क्रैपेज इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके अलावा, ₹30 लाख तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली सभी विशुद्ध इलेक्ट्रिक कारों (Pure EVs) पर दिल्ली सरकार 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ कर रही है। हालांकि, इस बार सरकार ने हाइब्रिड कारों को बड़ा झटका दिया है। पहले हाइब्रिड गाड़ियों पर टैक्स छूट देने की बात चल रही थी, लेकिन फाइनल पॉलिसी में साफ कर दिया गया है कि हाइब्रिड गाड़ियों को कोई सब्सिडी या टैक्स छूट नहीं मिलेगी। यह पॉलिसी पूरी तरह से सिर्फ प्योर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।
दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0 के तहत मिलने वाली सब्सिडी और समयसीमा के आंकड़े
नीचे दी गई टेबल में आप अलग-अलग वाहनों पर मिलने वाली सब्सिडी, स्क्रैपेज बोनस और उनकी आखिरी रजिस्ट्रेशन तारीख को आसानी से देख सकते हैं:
| वाहन की कैटेगरी | पहले साल की सब्सिडी | दूसरे साल की सब्सिडी | तीसरे साल की सब्सिडी | स्क्रैपेज इंसेंटिव | नई पेट्रोल/CNG रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख |
| इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (स्कूटर/बाइक) | ₹30,000 तक | ₹20,000 तक | ₹10,000 तक | ₹10,000 | 31 मार्च 2028 |
| इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (पैसेंजर ऑटो) | ₹50,000 | ₹40,000 | ₹30,000 | ₹25,000 | 31 दिसंबर 2026 |
| इलेक्ट्रिक N1 मालवाहक वाहन (छोटा ट्रक) | ₹1,00,000 | उपलब्ध नहीं | उपलब्ध नहीं | ₹50,000 | 31 दिसंबर 2026 |
| इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर (कार ₹30 लाख तक) | 100% रोड टैक्स छूट | 100% रोड टैक्स छूट | 100% रोड टैक्स छूट | ₹1,00,000 (BS-IV या पुरानी) | कोई पाबंदी नहीं (टैक्स छूट लागू) |
चार्जिंग की चिंता होगी दूर, बनेंगे 32,000 नए चार्जिंग पॉइंट्स
इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने का विचार आते ही हर किसी के मन में पहला सवाल यही उठता है कि रास्ते में बैटरी खत्म हो गई तो चार्ज कहां करेंगे? दिल्ली सरकार ने इस समस्या को भी जड़ से खत्म करने का प्लान बना लिया है। सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए करीब ₹8,000 करोड़ का निवेश करने जा रही है। इस बजट की मदद से पूरी दिल्ली में पॉलिसी अवधि के दौरान 32,000 से अधिक नए पब्लिक ईवी चार्जिंग पॉइंट्स इंस्टॉल किए जाएंगे।
इन चार्जिंग स्टेशंस को बनाने के लिए सरकार ने जमीन की पहचान भी कर ली है। ये चार्जिंग पॉइंट्स मॉल, बड़े बाजारों, सरकारी दफ्तरों, मेट्रो स्टेशनों और कमर्शियल हब्स जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर लगाए जाएंगे ताकि लोग काम के साथ-साथ अपनी गाड़ी भी चार्ज कर सकें। इसके अलावा, आवासीय सोसायटियों और घरों में भी पर्सनल चार्जिंग सेटअप को आसान बनाने के लिए नियमों को सरल किया जा रहा है और एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां लोग सिंगल विंडो के जरिए सब्सिडी और चार्जिंग कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकेंगे। साथ ही, सभी ईवी डीलर्स के लिए अपने शोरूम पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर क्या होगा इस फैसले का असर
दिल्ली भारत का एक बहुत बड़ा ऑटोमोबाइल मार्केट है, और यहां की सड़कों पर कुल रजिस्टर्ड वाहनों में से लगभग 67 प्रतिशत हिस्सेदारी सिर्फ टू-व्हीलर्स की है। ऐसे में 2028 की डेडलाइन देश की टू-व्हीलर इंडस्ट्री की दिशा बदलने वाली साबित होगी। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार के इस सख्त कदम के बाद पूरे देश में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री में भारी उछाल आने की उम्मीद है।
अनुमान है कि इस पॉलिसी के प्रभाव से वित्त वर्ष 2029 तक भारतीय टू-व्हीलर बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 21 से 23 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो इस नीति के बिना केवल 18 से 20 प्रतिशत रहने का अनुमान था। इस अकेले फैसले से देश में करीब 6 लाख अतिरिक्त इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। बाजार के जानकारों का यह भी मानना है कि दिल्ली के इस ऐतिहासिक फैसले को देखने के बाद भारत के अन्य राज्य भी अपने यहां इसी तरह के कड़े नियम और अनिवार्य इलेक्ट्रिक रजिस्ट्रेशन की नीतियां लागू करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। ओला, एथर, टीवीएस और बजाज जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह एक बहुत बड़ा मौका है कि वे अपने प्रोडक्शन और पोर्टफोलियो को और मजबूत करें।
दिल्ली को क्लीन और ग्रीन बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम
दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0 केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह दिल्ली को प्रदूषण के डार्क ज़ोन से बाहर निकालने का एक ठोस और साहसी रोडमैप है। हालांकि शुरुआती दौर में पेट्रोल गाड़ियों के शौकीनों और कुछ वाहन निर्माताओं को थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह फैसला दिल्ली की हवा को साफ करने और आम जनता के स्वास्थ्य को सुधारने में संजीवनी का काम करेगा।
₹30,000 तक की नकद सब्सिडी, 100 प्रतिशत रोड टैक्स की छूट और 32,000 चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क मिलकर दिल्ली के नागरिकों के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ी की तरफ शिफ्ट होना बेहद आसान और फायदेमंद बना देगा। अगर आप भी दिल्ली में रहते हैं और आने वाले समय में नई गाड़ी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो अब समय आ गया है कि आप पेट्रोल का ख्याल छोड़ें और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ कदम बढ़ाएं। सरकार बहुत जल्द इस नीति का पूरा विस्तृत नोटिफिकेशन जारी करेगी, जिसके बाद इसके सभी प्रावधान जमीन पर लागू हो जाएंगे।







