भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में स्कोडा को हमेशा उनकी बेहतरीन बिल्ड क्वालिटी, ड्राइविंग डायनामिक्स और यूरोपियन डिजाइन के लिए जाना जाता है। अब जब भारत में इलेक्ट्रिक कारों का बाजार लगातार बड़ा हो रहा है, स्कोडा भी अपनी नई चाल चलने की तैयारी कर रही है। ग्लोबल मार्केट में अभी 19 मई 2026 को स्कोडा ने अपनी सबसे किफायती और छोटी इलेक्ट्रिक SUV, स्कोडा एपिक (Skoda Epiq), के प्रोडक्शन मॉडल को दुनिया के सामने पेश किया है। प्राग में हुए इसके ग्लोबल अनवील के बाद से ही भारतीय ग्राहकों और खासकर मिडिल क्लास कम्यूटर्स के बीच हलचल शुरू हो गई है। मेंसइवी की टीम इस गाड़ी की हर एक बारीक डिटेल पर नजर बनाए हुए है। चूंकि यह गाड़ी अभी भारत में लॉन्च नहीं हुई है और कंपनी ने इसके भारतीय वर्जन की सटीक तारीखों का एलान नहीं किया है, इसलिए हम इसके ग्लोबल मॉडल और स्कोडा के नए प्लेटफॉर्म की रिसर्च के आधार पर बात करेंगे कि यह भारत के लिहाज से कितनी प्रैक्टिकल साबित हो सकती है।
डिजाइन और डायमेंशन: स्कोडा का नया मॉडर्न सॉलिड अवतार
स्कोडा एपिक पहली ऐसी गाड़ी है जिसे कंपनी की नई मॉडर्न सॉलिड डिजाइन लैंग्वेज पर तैयार किया गया है। इसका लुक स्कोडा की पारंपरिक ग्रिल वाली गाड़ियों से काफी अलग है। आगे की तरफ इसमें ग्लॉस ब्लैक फिनिश वाला टेक-डेक फेस (Tech-Deck Face) दिया गया है, जिसके दोनों तरफ पतले टी-शेप्ड एलईडी डीआरएल दिए गए हैं। यह नया लाइट सिग्नेचर आने वाले समय में स्कोडा की पहचान बनने वाला है। इस कार को एयरोडायनामिक्स के मामले में बहुत खास बनाया गया है, इसका ड्रैग कोफिशिएंट महज 0.275 है, जिसका सीधा मतलब है कि यह हवा को आसानी से काटती है जिससे बैटरी की बचत होती है।
साइज के मामले में यह एक कॉम्पैक्ट SUV है जिसकी लंबाई लगभग 4.1 मीटर है। स्कोडा की खासियत हमेशा से स्पेस मैनेजमेंट रही है और एपिक में भी यही देखने को मिलता है। बॉर्न-इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म पर बने होने के कारण इसका व्हीलबेस काफी लंबा है, जिससे केबिन के अंदर पैर फैलाने की भरपूर जगह मिलती है। नीचे दी गई टेबल में हमने इसके ग्लोबल मॉडल के सभी डाइमेंशन्स और स्पेसिफिकेशन्स की डिटेल दी है।
स्कोडा एपिक: संभावित डायमेंशन और टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स टेबल
| पैरामीटर | स्पेसिफिकेशन और डिटेल्स (ग्लोबल मॉडल के आधार पर) |
| कुल लंबाई | 4171 mm |
| कुल चौड़ाई | 1798 mm |
| कुल ऊंचाई | 1581 mm |
| व्हीलबेस | 2601 mm (केबिन में ज्यादा स्पेस) |
| बूट स्पेस | 475 लीटर (क्लास लीडिंग) |
| फ्रंक स्पेस | 25 लीटर (बोनट के नीचे अतिरिक्त जगह) |
| प्लेटफॉर्म | वोक्सवैगन ग्रुप MEB+ (फ्रंट-व्हील ड्राइव) |
| टायर साइज | 17 इंच से 19 इंच के अलॉय व्हील्स |
| ड्रैग कोफिशिएंट | 0.275 (बेहतर एयरोडायनामिक्स) |
मोटर, बैटरी और परफॉर्मेंस का पावर हाउस

स्कोडा ने एपिक को वोक्सवैगन ग्रुप के नए जनरेशन वाले MEB+ प्लेटफॉर्म पर बनाया है। यह स्कोडा की पहली ऐसी इलेक्ट्रिक कार है जो फ्रंट-व्हील ड्राइव (FWD) सेटअप के साथ आती है, यानी इसकी मोटर आगे वाले पहियों को पावर देती है। ग्लोबल मार्केट में इसे दो बैटरी पैक और तीन अलग-अलग पावर आउटपुट के साथ पेश किया गया है।
बैटरी और पावर वेरिएंट्स
इसके एंट्री-लेवल वेरिएंट्स (एपिक 35 और एपिक 40) में 38.5 kWh का बैटरी पैक मिलता है। एपिक 35 वेरिएंट 116 hp की पावर और 267 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है, जबकि एपिक 40 वेरिएंट 135 hp की पावर और समान 267 Nm का टॉर्क देता है। इन दोनों ही वेरिएंट्स की टॉप स्पीड 150 kmph तक सीमित रखी गई है।
इसका जो सबसे पावरफुल और टॉप-एंड वेरिएंट है, उसे एपिक 55 (Epiq 55) नाम दिया गया है। इसमें 55 kWh का बड़ा बैटरी पैक मिलता है जो 211 hp की दमदार पावर और 290 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इस वेरिएंट की टॉप स्पीड 160 kmph है। मेंसइवी की रिसर्च के मुताबिक, यह टॉप वेरिएंट चलाने में किसी भी शौकीन ड्राइवर को काफी पसंद आने वाला है क्योंकि इसका पावर-टू-वेट रेशियो काफी कमाल का होने की उम्मीद है।
रेंज का असली गणित और चार्जिंग की क्षमता
किसी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी को लेकर भारतीय ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या यह दिल्ली के ट्रैफिक या भोपाल से इंदौर के लंबे हाईवे रन को संभाल पाएगी? स्कोडा ने इसके अलग-अलग वेरिएंट्स के लिए अलग-अलग रेंज का दावा किया है।
शहर VS हाईवे का रेंज टेस्ट एनालिसिस
छोटे 38.5 kWh वाले बैटरी पैक के लिए कंपनी लगभग 310 km की क्लेम्ड रेंज बताती है। लेकिन मेंसइवी की टीम के एनालिसिस के अनुसार, भारतीय सड़कों और यहाँ के मौसम (AC के लगातार इस्तेमाल) को देखते हुए असल जिंदगी में शहर के अंदर इससे लगभग 220 से 240 km की रेंज मिल सकती है। हाईवे पर तेज रफ्तार में यह रेंज गिरकर 180 से 190 km तक आ सकती है।
वहीं बड़े 55 kWh वाले बैटरी पैक के लिए स्कोडा का दावा लगभग 440 km की रेंज का है। भारतीय परिस्थितियों में यह बड़ा पैक शहर के ट्रैफिक में आसानी से 320 से 340 km की रियल-वर्ल्ड रेंज दे सकता है। हाईवे पर अगर आप 80-90 kmph की स्थिर रफ्तार बनाए रखते हैं, तो आप लगभग 260 से 280 km के सफर की उम्मीद कर सकते हैं। यह रेंज वीकेंड ट्रिप्स के लिए काफी व्यावहारिक साबित हो सकती है।
फास्ट चार्जिंग और वी2एल (V2L) टेक्नोलॉजी
चार्जिंग के मामले में स्कोडा एपिक काफी एडवांस है। इसका 55 kWh वाला वेरिएंट डीसी फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है, जिससे महज 24 मिनट में बैटरी 10 से 80 प्रतिशत तक चार्ज हो सकती है। इसके अलावा इसमें द्विदिश चार्जिंग (Bidirectional Charging) यानी वी2एल (Vehicle-to-Load) और वी2एच (Vehicle-to-Home) टेक्नोलॉजी मिलती है। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर आप अपनी कार की बैटरी से अपने घर के उपकरण चला सकते हैं या किसी दूसरी इलेक्ट्रिक कार को चार्ज कर सकते हैं।
केबिन एक्सपीरियंस और सस्टेनेबिलिटी: अंदर की दुनिया
स्कोडा एपिक का इंटीरियर काफी मिनिमलिस्टिक और मॉडर्न है। डैशबोर्ड पर 13 इंच का बड़ा एंड्रॉइड-बेस्ड इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन दिया गया है, जिसमें गूगल मैप्स, यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसी ऐप्स पहले से ही इन-बिल्ट मिलेंगी। इसके साथ ही ड्राइवर के लिए एक छोटा 5 इंच का डिजिटल डिस्प्ले दिया गया है। स्कोडा ने अपनी ‘सिम्पली क्लेवर’ (Simply Clever) खूबियों को यहाँ भी बरकरार रखा है, जैसे बूट स्पेस में सामान को रोकने के लिए हुक्स, अंडर-फ्लोर कम्पार्टमेंट और डोर पॉकेट्स में छाता रखने की जगह।
एक बड़ी बात जो मेंसइवी टीम ने नोट की है, वो यह कि इस कार के केबिन में कहीं भी असली लेदर या जानवरों से बनी चीजों का इस्तेमाल नहीं हुआ है। इसकी सीटों के कपड़े पूरी तरह से रिसाइकल किए गए पॉलिएस्टर फाइबर से बने हैं। कार को बनाने में कुल 34 kg से ज्यादा रिसाइकिल्ड मटेरियल का इस्तेमाल हुआ है, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाता है।
मार्केट पोजीशन और भारत में संभावित कीमत की टक्कर
ग्लोबल मार्केट में स्कोडा ने इसकी शुरुआती कीमत करीब 25,000 यूरो (लगभग 22 से 23 लाख रुपये) के आसपास रखने का संकेत दिया है। अगर स्कोडा इस गाड़ी को भारत में पूरी तरह से इम्पोर्ट (CBU) करके लाती है, तो टैक्स की वजह से यह बहुत महंगी हो जाएगी। लेकिन अगर स्कोडा इसे चाकन प्लांट में लोकलाइज्ड MEB21 प्लेटफॉर्म पर असेम्बल करती है, तो इसकी अनुमानित एक्स-शोरूम कीमत 20 लाख रुपये से लेकर 26 लाख रुपये के बीच हो सकती है।
भारत में लॉन्च होने पर इसका सीधा मुकाबला टाटा कर्व EV, हुंडई क्रेटा EV, मारुति सुजुकी ई-विटारा और महिन्द्रा बीई 6 जैसी अपकमिंग गाड़ियों से होगा। स्कोडा का मुख्य फोकस उन प्रीमियम ग्राहकों पर होगा जो टाटा या महिन्द्रा से अलग एक सॉलिड यूरोपियन ड्राइविंग एक्सपीरियंस की तलाश में हैं।
स्कोडा एपिक की मुख्य खूबियां और संभावित चुनौतियां
इस गाड़ी के ग्लोबल अनवील और टेक्निकल डेटा का गहराई से अध्ययन करने के बाद हमारी टीम ने इसके कुछ मजबूत और कमजोर पक्ष तैयार किए हैं:
- बेहतरीन बूट स्पेस: इस साइज की गाड़ियों में आमतौर पर 350 से 400 लीटर का बूट स्पेस मिलता है, लेकिन एपिक में 475 लीटर का बूट स्पेस और आगे 25 लीटर का फ्रंक मिलता है, जो कि कमाल का है।
- फास्ट चार्जिंग स्पीड: 24 मिनट में 10 से 80 प्रतिशत चार्ज होना लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान लगने वाले समय को काफी कम कर देगा।
- फिजिकल बटन की मौजूदगी: टचस्क्रीन के इस दौर में भी स्कोडा ने स्टीयरिंग व्हील और एसी वेंट्स के नीचे जरूरी फीचर्स के लिए फिजिकल बटन्स दिए हैं, जो गाड़ी चलाते समय इस्तेमाल करने में बहुत आसान होते हैं।
- सेफ्टी फीचर्स का अंबार: ग्लोबल मॉडल में 7 एयरबैग्स और एडवांस एडास (ADAS) जैसे फीचर्स दिए गए हैं जो सुरक्षा को मजबूत करते हैं।
- रीजनेरेटिव ब्रेकिंग और सिंगल पेडल ड्राइविंग: इसमें मिलने वाला ‘बी मोड’ सिंगल पेडल ड्राइविंग की सुविधा देता है, जिससे शहर के ट्रैफिक में बार-बार ब्रेक दबाने की थकान कम हो जाती है।
- ग्राउंड क्लीयरेंस की चिंता: यूरोपियन मॉडल के हिसाब से इसका ग्राउंड क्लीयरेंस भारतीय सड़कों के बड़े स्पीड ब्रेकर्स के लिए थोड़ा कम हो सकता है, उम्मीद है कि भारतीय वर्जन में स्कोडा इसके सस्पेंशन को थोड़ा ऊंचा करेगी।
- सर्विस नेटवर्क का दायरा: स्कोडा का सर्विस नेटवर्क अभी भारत के टियर 2 और टियर 3 शहरों में टाटा या हुंडई जितना बड़ा नहीं है, जो ग्रामीण या छोटे शहरों के ग्राहकों के लिए एक विचार करने वाला बिंदु होगा।
टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप (TCO) और सरकारी पॉलिसियां
यदि यह गाड़ी भारत आती है, तो पेट्रोल कारों की तुलना में इसका रनिंग कॉस्ट बेहद कम होगा। मान लीजिए आप महीने में 1200 km चलते हैं, तो किसी पेट्रोल प्रीमियम SUV में आपका खर्च करीब 10,000 रुपये प्रति महीना आएगा। स्कोडा एपिक की बड़ी बैटरी को घर पर चार्ज करने का खर्च महीने का लगभग 1,500 रुपये से अधिक नहीं होगा। इसके अलावा सरकार की पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) नीति और विभिन्न राज्यों की अपनी रोड टैक्स छूट योजनाओं के कारण शुरुआती रजिस्ट्रेशन के समय ग्राहकों को ऑन-रोड कीमत पर बढ़िया बचत देखने को मिल सकती है।
क्या आपको इस गाड़ी का इंतजार करना चाहिए?
मेंसइवी की टीम ने स्कोडा एपिक के ग्लोबल डेटा और इसकी क्षमताओं का जो विश्लेषण किया है, उसके आधार पर हमारा सुझाव बहुत स्पष्ट है।
इंतजार करें अगर: आपका बजट 22 से 25 लाख रुपये के आसपास है और आप एक ऐसी प्रीमियम, मजबूत और बेहतरीन हैंडलिंग वाली इलेक्ट्रिक कार चाहते हैं जिसका ब्रांड वैल्यू स्नोब इफ़ेक्ट देता हो। अगर आप उन लोगों में से हैं जिन्हें बहुत ज्यादा चमक-धमक की जगह एक क्लासी और सिंपल डिजाइन पसंद आता है, तो 2027 के आस-पास इसके संभावित भारतीय आगमन का इंतजार करना एक अच्छा फैसला हो सकता है।
बाजार के मौजूदा विकल्प देखें अगर: आपको तुरंत अगले कुछ महीनों में एक इलेक्ट्रिक SUV की जरूरत है। स्कोडा ने अभी भारत के लिए इसके प्रोडक्शन की किसी सटीक तारीख की पुष्टि नहीं की है, इसलिए लंबे समय तक बिना गाड़ी के बैठे रहना समझदारी नहीं होगी। आप बाजार में पहले से मौजूद टाटा नेक्सन EV या अपकमिंग हुंडई क्रेटा EV की तरफ जा सकते हैं, जिनका सर्विस नेटवर्क भी अभी ज्यादा फैला हुआ है।
स्कोडा की इलेक्ट्रिक जर्नी का भविष्य
स्कोडा एपिक ने यह साफ कर दिया है कि कंपनी अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को आम लोगों की पहुंच में लाने के लिए गंभीर है। यह कार कॉम्पैक्ट साइज में एक बड़ा केबिन और बेहतरीन रेंज का वादा करती है। हालांकि भारतीय बाजार की परिस्थितियां यूरोप से काफी अलग हैं, जहाँ धूल, गर्मी और ट्रैफिक बैटरी की परफॉर्मेंस पर सीधा असर डालते हैं। लेकिन अगर स्कोडा इसके भारतीय वर्जन को यहाँ की सड़कों के हिसाब से सही से ट्यून करती है और इसकी कीमत को नियंत्रण में रखती है, तो यह गाड़ी भारत में स्कोडा के लिए एक नया अध्याय लिख सकती है। मेंसइवी की टीम इसके भारत आने की हर छोटी-बड़ी खबर पर नजर रखेगी ताकि हम आपके लिए इसका जल्द से जल्द रिव्यु ला सके।








