भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में लग्जरी कारों का शौक रखने वाले ग्राहकों के लिए यह समय बेहद दिलचस्प हो गया है। जब आपके पास बजट की कोई कमी न हो और आपका मकसद सिर्फ और सब कुछ भूलकर पिछली सीट पर बैठकर राजाओं जैसा आराम पाना हो, तो आपके दिमाग में सबसे पहला नाम मर्सिडीज बेंज एस-क्लास का आता है। एस-क्लास को दशकों से दुनिया की सबसे बेहतरीन कार होने का तमगा हासिल रहा है। लेकिन अब समय बदल रहा है और भारतीय सड़कों पर एक बिल्कुल नए किस्म की लग्जरी ने दस्तक दी है, जिसे हम लेक्सस एलएम के नाम से जानते हैं। यह एक ऐसी गाड़ी है जो आकार में किसी वैन या एमपीवी जैसी दिखती है, लेकिन इसके अंदर का माहौल किसी प्राइवेट जेट से कम नहीं है।
हाल ही में मर्सिडीज बेंज ने भारत में अपनी नई एस-क्लास फेसलिफ्ट को लॉन्च किया है जिसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹ 2.20 करोड़ है। सबसे मजेदार बात यह है कि लेक्सस एलएम की शुरुआती कीमत भी बिल्कुल यही है। भले ही इन दोनों गाड़ियों का बॉडी स्टाइल एक-दूसरे से पूरी तरह अलग है। एक तरफ क्लासिक और राजसी सेडान है तो दूसरी तरफ ऊंची और आलीशान एमपीवी है,लेकिन दोनों का मकसद एक ही है, और वो है मालिक को दुनिया का सबसे बेहतरीन सफर देना। अगर आप भी इस साल अपने लिए ₹ 2 करोड़ से ऊपर के बजट में एक आलीशान ड्राइवर-चालित गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं, तो इन दोनों में से कौन सी गाड़ी आपके स्टेटस और आराम पर खरी उतरेगी, इसे हम गहराई से समझेंगे।
कीमत का गणित और आपके बजट का सही चुनाव
जब आप इस स्तर की गाड़ियां खरीदते हैं, तो कीमत से ज्यादा मायने यह रखता है कि आपको उस कीमत के बदले में क्या मिल रहा है। मर्सिडीज-बेंज एस-क्लास को भारतीय बाजार में फिलहाल एक ही बड़े वेरिएंट एस 450e में पेश किया गया है, जिसके अंदर आपको दो अलग विकल्प लॉन्च एडिशन और मैन्युफैक्चर एडिशन मिलते हैं। इसकी कीमत ₹ 2.20 करोड़ से शुरू होकर ₹ 2.38 करोड़ तक जाती है।
दूसरी तरफ, लेक्सस एलएम की शुरुआती कीमत भी ₹ 2.20 करोड़ ही है, लेकिन इसका टॉप-एंड मॉडल ₹ 2.75 करोड़ तक जाता है। लेक्सस एलएम में मिलने वाली यह ऊंची कीमत इसके दो अलग-अलग सिटिंग कॉन्फिगरेशन की वजह से है। इसका शुरुआती मॉडल 7-सीटर वीआईपी वेरिएंट है, जबकि इसका सबसे महंगा मॉडल 4-सीटर अल्ट्रा लग्जरी वेरिएंट है जो उन लोगों के लिए बना है जो गाड़ी में केवल अकेले या अपने किसी बेहद खास मेहमान के साथ ही सफर करते हैं। इस तरह देखा जाए तो बजट के मामले में एस-क्लास का टॉप मॉडल लेक्सस के टॉप मॉडल से थोड़ा सस्ता पड़ता है।
साइज और स्पेस का अनोखा मुकाबला
सड़क पर मौजूदगी और अंदर मिलने वाली जगह के मामले में इन दोनों गाड़ियों के बीच बहुत बड़ा अंतर है। मर्सिडीज एस-क्लास की कुल लंबाई 5304 mm है, जो लेक्सस एलएम की 5125 mm लंबाई से पूरे 179 mm ज्यादा है। चौड़ाई के मामले में भी एस-क्लास 1921 mm के साथ लेक्सस से 31 mm चौड़ी है। व्हीलबेस की बात करें तो एस-क्लास में 3216 mm का व्हीलबेस मिलता है, जो लेक्सस एलएम के 3000 mm से 216 mm ज्यादा है। इसका मतलब यह है कि लंबाई और चौड़ाई के मामले में जर्मन सेडान बाजी मार लेती है।
लेकिन जैसे ही हम ऊंचाई की बात करते हैं, पूरी कहानी बदल जाती है। लेक्सस एलएम की ऊंचाई 1940 mm है, जो एस-क्लास की 1503 mm की ऊंचाई से पूरे 437 mm ज्यादा है। यही वजह है कि लेक्सस एलएम के अंदर घुसते ही आपको एक बहुत ही बड़े कमरे जैसा अहसास होता है, जहां आप बिना ज्यादा झुके आसानी से बैठ सकते हैं। सीटिंग क्षमता के मामले में एस-क्लास में पारंपरिक तौर पर 5 सीटें मिलती हैं, जबकि लेक्सस एलएम आपको 7-सीटर और 4-सीटर दोनों विकल्पों की आजादी देती है।
सामान रखने की जगह यानी बूट स्पेस के मामले में दोनों गाड़ियों की अपनी-अपनी खूबियां हैं। एस-क्लास में आपको 345 लीटर का बूट स्पेस मिलता है। लेक्सस एलएम के 7-सीटर वेरिएंट में सीटों की वजह से सिर्फ 110 लीटर की जगह बचती है, जो एस-क्लास से कम है। लेकिन अगर आप लेक्सस का 4-सीटर वेरिएंट चुनते हैं, तो पीछे की सीटें हटने के कारण आपको 752 लीटर का एक बहुत बड़ा बूट स्पेस मिल जाता है, जिसमें आप दुनिया भर का सामान और बड़े-बड़े सूटकेस आसानी से रख सकते हैं।
हाइब्रिड तकनीक, इंजन पावर और परफॉर्मेंस की रेस

इंजन और पावर के मामले में इन दोनों दिग्गजों की सोच बिल्कुल अलग है। मर्सिडीज एस-क्लास में एक बेहद ताकतवर 3.0 लीटर का छह-सिलेंडर वाला पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो एक प्लग-इन हाइब्रिड सिस्टम के साथ मिलकर काम करता है। यह पूरा सेटअप एक साथ मिलकर 435 hp की बेजोड़ पावर और 680 Nm का भारी-भरकम टॉर्क पैदा करता है। इसमें 9-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन मिलता है जो सारी पावर को पीछे के पहियों तक भेजता है, जिससे यह एक रियर-व्हील-ड्राइव कार बनती है। इस जबरदस्त पावर की बदौलत यह विशाल कार महज 5.7 सेकंड में शून्य से 100 kmph की रफ्तार पकड़ लेती है और इसकी टॉप स्पीड 250 kmph है।
इसके उलट, लेक्सस एलएम में एक छोटा 2.5 लीटर का चार-सिलेंडर वाला पेट्रोल इंजन मिलता है जो एक स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड सिस्टम के साथ आता है। यह इंजन 250 hp की पावर और 239 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसमें ई-सीवीटी गियरबॉक्स दिया गया है और यह ऑल-व्हील-ड्राइव सिस्टम के साथ आती है, जिसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर इसके पीछे वाले इलेक्ट्रिक मोटर भी पहियों को ताकत देते हैं। परफॉर्मेंस के मामले में यह एस-क्लास से पीछे है, क्योंकि इसे शून्य से 100 kmph की रफ्तार छूने में 8.7 सेकंड का समय लगता है और इसकी टॉप स्पीड 190 kmph है।
माइलेज और रेंज के मामले में भी दोनों में बड़ा फर्क है। ऑन पेपर एस-क्लास का माइलेज 32.3 kpl का दावा करता है, जबकि लेक्सस एलएम का माइलेज 13.8 kpl है। एस-क्लास का माइलेज इतना ज्यादा इसलिए है क्योंकि यह एक प्लग-इन हाइब्रिड कार है, जिसे आप घर पर बिजली से चार्ज कर सकते हैं और यह बिना एक बूंद पेट्रोल जलाए सिर्फ अपनी बैटरी पर 115 km तक चल सकती है। लेक्सस एलएम को आप बाहर से प्लग लगाकर चार्ज नहीं कर सकते, इसका हाइब्रिड सिस्टम खुद ही चलते-चलते चार्ज होता है, इसलिए इसकी पूरी निर्भरता पेट्रोल इंजन पर ज्यादा रहती है।
केबिन का आलीशान माहौल और भविष्य के फीचर्स
इन दोनों गाड़ियों के केबिन की तुलना करना किसी महल की तुलना एक आलीशान सुइट से करने जैसा है। मर्सिडीज एस-क्लास के डैशबोर्ड पर आपको आधुनिकता की नई मिसाल देखने को मिलेगी। इसमें आगे की तरफ ड्राइवर के लिए 12.3 इंच का डिस्प्ले और बीच में 14.4 इंच का बड़ा टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। इसके अलावा, मर्सिडीज ने आगे बैठने वाले सह-यात्री के लिए भी एक अलग से 12.3 इंच की स्क्रीन दी है, जो लेक्सस में नहीं मिलती। संगीत के शौकीनों के लिए इसमें 31 स्पीकर्स वाला बर्मेस्टर का सराउंड साउंड सिस्टम लगाया गया है जो केबिन को एक कॉन्सर्ट हॉल में बदल देता है। पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए भी इसमें दो 13.1 इंच की स्क्रीन दी गई हैं।
लेक्सस एलएम का केबिन फीचर्स के मामले में मर्सिडीज को कड़ी टक्कर देता है, खासकर इसके 4-सीटर वेरिएंट में। इसमें आगे 14 इंच की स्क्रीन और ड्राइवर के लिए 12.3 इंच का डिस्प्ले है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी यूएसपी इसकी पिछली सीट है, जहां आपको एक विशाल 48 इंच का टीवी जैसा स्क्रीन मिलता है, जो आगे और पीछे के केबिन को अलग करने वाले पार्टीशन वॉल पर लगा होता है। 7-सीटर वेरिएंट में यह स्क्रीन छोटा होता है। इसके अलावा लेक्सस में 23 स्पीकर्स वाला मार्क लेविंसन साउंड सिस्टम मिलता है।
लेक्सस एलएम की जो बात इसे सबसे खास बनाती है, वो है इसकी पिछली सीटों में मिलने वाला ऑटोमन फंक्शन। ये सीटें पूरी तरह से पीछे झुक जाती हैं और आपके पैरों को सहारा देने के लिए नीचे से सपोर्ट बाहर आता है, जिससे आप लंबे सफर में पूरी तरह सोकर जा सकते हैं। एस-क्लास में बहुत आरामदायक सीटें तो हैं, लेकिन लेक्सस जैसा लाउंज एक्सपीरियंस वहां नहीं मिल पाता। हालांकि एस-क्लास में दोनों रो के लिए वायरलेस चार्जर मिलते हैं जबकि लेक्सस में यह सिर्फ पहली रो में है। दोनों ही गाड़ियों में वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो और एप्पल कारप्ले, 4-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, दोनों रो में हीटिंग, वेंटिलेशन और मसाज वाले फीचर्स दिए गए हैं। एस-क्लास में आपको पीछे के शीशे के लिए पावर से चलने वाला सनशेड मिलता है, जो लेक्सस में गायब है।
सुरक्षा तकनीक और सेफ्टी फीचर्स की तुलना
जब आप दो करोड़ रुपये से ज्यादा की गाड़ी में सफर कर रहे हों, तो सुरक्षा की गारंटी सबसे ऊपर होनी चाहिए। मर्सिडीज-बेंज एस-क्लास सुरक्षा के मामले में एक कदम आगे निकल जाती है। इस कार के अंदर कुल 15 एयरबैग्स दिए गए हैं, जिनमें सीटों के बेल्ट के अंदर मिलने वाले खास एयरबैग्स भी शामिल हैं। इसके अलावा इसमें ऑटो पार्क असिस्ट की सुविधा भी मिलती है, जिससे यह विशाल गाड़ी खुद-ब-खुद पार्क हो सकती है।
लेक्सस एलएम भी सुरक्षा में पीछे नहीं है, लेकिन इसमें एयरबैग्स की संख्या 6 ही है। अगर हम बाकी के सेफ्टी फीचर्स की बात करें, तो दोनों ही गाड़ियों में आपको आधुनिक लेवल-2 एडडास (ADAS) तकनीक मिलती है, जिसमें लेन कीप असिस्ट, ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग और एडेप्टिव क्रूज़ कंट्रोल जैसे फीचर्स शामिल हैं। दोनों में ही 360-डिग्री कैमरा सेटअप, ड्राइवर की नजरों पर नजर रखने वाला ड्राइवर मॉनिटर कैमरा, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक और चारों पहियों में बेहतरीन डिस्क ब्रेक्स मिलते हैं। पहाड़ी रास्तों के लिए दोनों कारों में हिल स्टार्ट असिस्ट और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल जैसे फीचर्स को शामिल किया गया है।
तकनीकी आंकड़ों का पूरा विश्लेषण
नीचे दी गई विस्तृत तालिका के माध्यम से आप इन दोनों लग्जरी गाड़ियों के सभी तकनीकी पहलुओं, इंजन क्षमताओं और साइज का सीधा मुकाबला देख सकते हैं।
| तकनीकी विशेषता | मर्सिडीज-बेंज एस-क्लास (S 450e) | लेक्सस एलएम (350h) |
| शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत | ₹ 2.20 करोड़ से ₹ 2.38 करोड़ | ₹ 2.20 करोड़ से ₹ 2.75 करोड़ |
| इंजन का प्रकार | 3.0 लीटर, 6-सिलेंडर पेट्रोल | 2.5 लीटर, 4-सिलेंडर पेट्रोल |
| हाइब्रिड का प्रकार | प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) | स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड |
| कुल पावर आउटपुट | 435 hp | 250 hp |
| कुल टॉर्क आउटपुट | 680 Nm | 239 Nm |
| गियरबॉक्स (ट्रांसमिशन) | 9-स्पीड ऑटोमैटिक | e-CVT |
| ड्राइविंग व्हील सेटअप | रियर-व्हील-ड्राइव (RWD) | ऑल-व्हील-ड्राइव (AWD) |
| कार की कुल लंबाई | 5304 mm | 5125 mm |
| कार की कुल चौड़ाई | 1921 mm | 1890 mm |
| कार की कुल ऊंचाई | 1503 mm | 1940 mm |
| व्हीलबेस की लंबाई | 3216 mm | 3000 mm |
| सिटिंग कैपेसिटी विकल्प | 5 सीटर | 4 सीटर और 7 सीटर |
| बूट स्पेस क्षमता | 345 लीटर | 110 लीटर या 752 लीटर |
| आधिकारिक माइलेज | 32.3 kpl (WLTP) | 13.8 kpl (ARAI) |
| रफ्तार 0 से 100 kmph | 5.7 सेकंड | 8.7 सेकंड |
| सिर्फ बिजली पर रेंज | 115 km | उपलब्ध नहीं |
आपके स्टेटस के लिए कौन सी कार है बेस्ट?
मर्सिडीज-बेंज एस-क्लास और लेक्सस एलएम दोनों ही अपने आप में बेजोड़ गाड़ियाँ हैं, लेकिन इन्हें खरीदने वाले ग्राहकों की पसंद अलग हो सकती है। मर्सिडीज एस-क्लास उन लोगों के लिए सबसे सही है जो एक पारंपरिक, राजसी और रूतबे वाली सेडान कार चाहते हैं। इसका प्लग-इन हाइब्रिड इंजन आपको शहर के अंदर बिना पेट्रोल के 115 km तक चलने की आजादी देता है और जब आप खुद गाड़ी चलाना चाहें, तो इसकी शानदार परफॉर्मेंस आपको रोमांचित कर देती है। इसकी 15 एयरबैग्स वाली सुरक्षा और ब्रांड वैल्यू का कोई मुकाबला नहीं है।
दूसरी तरफ, लेक्सस एलएम उन आधुनिक बिजनेस टायकून और सेलिब्रिटीज के लिए बनी है जिनके लिए कार सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि सड़क पर चलता-फिरता उनका ऑफिस या लिविंग रूम है। इसका 4-सीटर वेरिएंट जिस तरह का लाउंज स्पेस, 48-inch का बड़ा स्क्रीन और सोने के लिए ऑटोमन सीटें देता है, वैसा आराम एस-क्लास की पिछली सीट पर चाहकर भी नहीं मिल सकता। अगर आपकी प्राथमिकता सिर्फ और सिर्फ पिछली सीट पर लेटकर सफर का आनंद लेना है और आप अपने बड़े परिवार या स्टाफ को भी साथ लेकर चलना चाहते हैं, तो लेक्सस एलएम की व्यावहारिक दुनिया आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित होगी।








