भारत में आज के समय में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण हर आम आदमी अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ देख रहा है। लेकिन जब भी कोई ग्राहक एक नई इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर खरीदने का मन बनाता है, तो उसके दिमाग में सबसे बड़ा सवाल ड्राइविंग रेंज का होता है। हर कोई यही सोचता है कि अगर बीच रास्ते में या भारी ट्रैफिक में बैटरी खत्म हो गई तो क्या होगा और उसे चार्जिंग स्टेशन कहां मिलेगा। रेंज की इसी आम चिंता को दूर करने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों में एक बहुत ही खास और जादुई तकनीक का इस्तेमाल किया है जिसे रीजेनरेटिव ब्रेकिंग कहा जाता है। एक आम पेट्रोल या डीजल कार में जब आप ब्रेक लगाते हैं, तो गाड़ी की गति कम करने के लिए ब्रेक पैड घिसते हैं और बहुत सारी ऊर्जा गर्मी और आवाज के रूप में हमेशा के लिए बर्बाद हो जाती है। लेकिन एक उन्नत इलेक्ट्रिक कार में ऐसा बिल्कुल नहीं होता है। इलेक्ट्रिक वाहन में ब्रेक लगाने पर बर्बाद होने वाली यह ऊर्जा वापस बिजली में बदल जाती है और गाड़ी की बैटरी को दोबारा चार्ज करने लगती है। इस आर्टिकल में हम एक ऑटोमोटिव एक्सपर्ट के नजरिए से इस बेहतरीन तकनीक की गहराई में जाएंगे और बिल्कुल आसान भाषा में समझेंगे कि यह कैसे काम करती है, इसके पीछे का विज्ञान क्या है और यह आपकी रोजमर्रा की ड्राइविंग को कैसे सस्ता और बेहतर बनाती है।
मोटर, बैटरी और ऊर्जा का विज्ञान
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग कोई नया या जादुई आविष्कार नहीं है, बल्कि यह भौतिक विज्ञान के एक बहुत ही पुराने नियम पर आधारित है। इसे गहराई से समझने के लिए हमें इलेक्ट्रिक कार की मोटर और उसके इन्वर्टर के काम करने के तरीके को समझना होगा। किसी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी में पहियों को घुमाने के लिए एक शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर लगी होती है। जब आप एक्सीलरेटर दबाते हैं, तो बैटरी पैक से डायरेक्ट करंट यानी डीसी पावर निकलकर इन्वर्टर में जाती है। इन्वर्टर इस बिजली को अल्टरनेटिंग करंट यानी एसी में बदलता है और मोटर में भेजता है, जिससे मोटर पहियों को आगे की तरफ घुमाती है। लेकिन जैसे ही आप अपना पैर एक्सीलरेटर से हटाते हैं या ब्रेक पेडल को हल्का सा दबाते हैं, तो यह पूरी प्रक्रिया एकदम से उल्टी दिशा में काम करने लगती है।
इस स्थिति में गाड़ी का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और इन्वर्टर तुरंत सक्रिय हो जाते हैं और एक अलग मोड में चले जाते हैं। गाड़ी की मुख्य इलेक्ट्रिक मोटर अब एक जनरेटर की तरह काम करने लगती है। गाड़ी की जो गतिज ऊर्जा होती है, उसके कारण पहिए अब मोटर को जबरदस्ती घुमाने लगते हैं। जब भारी पहिए मोटर को घुमाते हैं, तो मोटर के अंदर बिजली पैदा होने लगती है। यह पैदा हुई एसी बिजली वापस इन्वर्टर के जरिए डीसी में बदलती है और सीधे बैटरी पैक में जाकर स्टोर हो जाती है। क्योंकि मोटर बिजली पैदा करने के लिए बहुत भारी ताकत लगाती है, इसलिए गाड़ी के पहियों पर एक तरह का खिंचाव पैदा होता है और गाड़ी की गति बिना ब्रेक पैड का इस्तेमाल किए ही अपने आप कम होने लगती है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) जैसी संस्थाएं इस तकनीक की कड़ी जांच करती हैं ताकि बैटरी पैक में अचानक से तेज करंट जाने पर कोई सुरक्षा का खतरा पैदा न हो। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बैटरी को ठंडा रखने के लिए गाड़ी का लिक्विड कूलिंग सिस्टम भी तेजी से काम करता है ताकि बैटरी की उम्र पर कोई बुरा असर न पड़े।
शहर के ट्रैफिक और हाईवे का असल अनुभव

इस तकनीक का असली फायदा लेबोरेटरी के टेस्ट में नहीं बल्कि भोपाल, कानपुर या दिल्ली जैसे बड़े शहरों के भारी ट्रैफिक में देखने को मिलता है। मान लीजिए आप दिल्ली के बंपर टू बंपर ट्रैफिक में गाड़ी चला रहे हैं। यहां आपको हर कुछ सेकंड में अपनी गाड़ी रोकनी पड़ती है और फिर आगे बढ़ानी पड़ती है। एक पेट्रोल कार में यह स्थिति सबसे ज्यादा ईंधन की खपत करती है क्योंकि इंजन लगातार चलता रहता है और बार बार ब्रेक लगाने से आपकी ऊर्जा और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक कार में यही रुकने और चलने की स्थिति आपके लिए फायदेमंद बन जाती है। जब आप ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने के लिए अपना पैर एक्सीलरेटर से हटाते हैं, तो रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तुरंत एक्टिव हो जाती है और आपकी कार धीमी होने लगती है। इस दौरान जो ऊर्जा पैदा होती है, वह आपकी बैटरी को वापस चार्ज कर देती है।
शहर के भारी ट्रैफिक में अगर आप सही तरीके से इस सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं, तो आपकी गाड़ी की कुल रेंज 10 से 15 प्रतिशत तक आसानी से बढ़ सकती है। यानी अगर आपकी कार की क्लेम की गई रेंज 300 km है, तो शहर में आपको 30 से 40 km की अतिरिक्त फ्री रेंज सिर्फ इस ब्रेकिंग तकनीक से मिल सकती है। इसके अलावा आज के समय में कई प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों में वन पेडल ड्राइविंग का बेहतरीन फीचर भी आता है। इसमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग इतनी मजबूत और सटीक होती है कि आपको गाड़ी रोकने के लिए ब्रेक पेडल दबाने की जरूरत ही महसूस नहीं होती। आप सिर्फ एक्सीलरेटर से पैर हटाते हैं और गाड़ी अपने आप एक सुरक्षित दूरी पर जाकर रुक जाती है।
हालांकि जब आप शहर से बाहर निकलकर एक खुले हाईवे पर जाते हैं, तो इसका गणित पूरी तरह से बदल जाता है। हाईवे पर आप एक समान रफ्तार जैसे 80 kmph या 100 kmph पर गाड़ी चलाते हैं। वहां आपको बार बार ब्रेक लगाने या गति कम करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसलिए हाईवे पर रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से आपको ज्यादा बैटरी चार्जिंग का फायदा नहीं मिल पाता है। यही एक बड़ा कारण है कि अक्सर रियल वर्ल्ड टेस्टिंग में यह देखा जाता है कि एक इलेक्ट्रिक कार हाईवे की तुलना में शहर के भारी ट्रैफिक में ज्यादा लंबी रेंज निकाल कर देती है।
पारंपरिक ब्रेक VS रीजेनरेटिव ब्रेक का आर्थिक गणित
एक आम और जागरूक ग्राहक के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से उसकी टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप पर क्या सीधा असर पड़ता है। जब आप पेट्रोल कार चलाते हैं, तो आपको हर 20 हजार से 30 हजार km पर ब्रेक पैड और ब्रेक डिस्क बदलने पड़ते हैं। ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर पर इस काम का खर्च कई हजार रुपये आता है। लेकिन इलेक्ट्रिक कार में सामान्य फ्रिक्शन ब्रेक का इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी में, तेज रफ्तार को अचानक रोकने के लिए या गाड़ी को पूरी तरह से रोक कर खड़ी करने के लिए किया जाता है। इस वजह से इलेक्ट्रिक कारों के ब्रेक पैड बहुत कम घिसते हैं और लंबे समय तक चलते हैं, जो सीधे तौर पर आपके हर साल के सर्विसिंग के खर्च को कम करता है।
नीचे दी गई टेबल में हमने एक सामान्य पेट्रोल कार के पारंपरिक ब्रेकिंग सिस्टम और एक आधुनिक इलेक्ट्रिक कार के रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम की बहुत विस्तार से तुलना की है जिससे आप इसके आर्थिक और तकनीकी अंतर को आसानी से समझ सकें:
| फीचर्स और मुख्य मानक | सामान्य फ्रिक्शन ब्रेक (पेट्रोल कार) | रीजेनरेटिव ब्रेक (इलेक्ट्रिक कार) |
| ऊर्जा का आखिर में क्या होता है | शत प्रतिशत ऊर्जा गर्मी और घर्षण के रूप में बर्बाद हो जाती है | गाड़ी की गतिज ऊर्जा बिजली में बदल जाती है और बैटरी चार्ज होती है |
| गाड़ी की रेंज या माइलेज पर सीधा असर | बार बार ब्रेक लगाने से माइलेज बहुत तेजी से गिरने लगता है | शहर के ट्रैफिक में गाड़ी की कुल रेंज 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ जाती है |
| ब्रेक पैड की उम्र और सर्विस का खर्च | ब्रेक पैड बहुत जल्दी घिसते हैं और सर्विस का खर्च काफी ज्यादा होता है | ब्रेक पैड 60 हजार से 70 हजार km तक बहुत ही आसानी से चल जाते हैं |
| ट्रैफिक में चलाने का आपका अनुभव | बार बार पेडल दबाने से झटके लगते हैं और पैर जल्दी थक जाते हैं | वन पेडल ड्राइविंग की सुविधा से सफर बेहद आरामदायक हो जाता है |
| पर्यावरण और हवा पर पड़ने वाला असर | ब्रेक पैड के लगातार घिसने से खतरनाक धूल और प्रदूषण पैदा होता है | यह पूरी तरह से एक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल आधुनिक तकनीक है |
सिस्टम के सही इस्तेमाल का तरीका
एक सीनियर ऑटोमोटिव एक्सपर्ट के तौर पर हम अक्सर यह देखते हैं कि लोग नई इलेक्ट्रिक गाड़ी तो बड़े शौक से खरीद लेते हैं, लेकिन उन्हें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग के सही इस्तेमाल की पूरी जानकारी नहीं होती है और वे इसका पूरा फायदा नहीं उठा पाते। आज बाजार में मौजूद ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों और स्कूटरों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग के अलग अलग लेवल दिए जाते हैं। इन्हें आमतौर पर लो, मीडियम और हाई के रूप में स्क्रीन से सेट किया जा सकता है। हमारा आपको यह सुझाव है कि जब आप पहली बार इलेक्ट्रिक गाड़ी चलाना शुरू करें, तो इस सिस्टम को हमेशा लो या मीडियम सेटिंग पर ही रखें। अगर आप इसे शुरुआत में ही हाई सेटिंग पर रख देंगे, तो जैसे ही आप एक्सीलरेटर छोड़ेंगे, गाड़ी बहुत तेज झटका लेकर रुकेगी। इससे पीछे बैठे परिवार के सदस्यों को मोशन सिकनेस या उल्टी जैसी परेशानी हो सकती है। जब आपको गाड़ी की गति और सिस्टम की आदत पड़ जाए, तब आप धीरे धीरे इसे हाई पर सेट कर सकते हैं ताकि सबसे ज्यादा बैटरी चार्ज हो सके।
एक और बहुत जरूरी बात जो हर ईवी मालिक को जाननी चाहिए, वह यह है कि जब आपकी कार की बैटरी 100 प्रतिशत फुल चार्ज होती है, तो यह रीजेनरेटिव सिस्टम बिल्कुल काम नहीं करता है। बैटरी फुल होने के कारण कार का सॉफ्टवेयर अतिरिक्त बिजली को बैटरी में जाने से रोक देता है ताकि बैटरी ओवरचार्ज होकर खराब न हो जाए। इसलिए घर से निकलने के बाद शुरुआत के कुछ km तक आपको अपनी गाड़ी रोकने के लिए पूरी तरह से सामान्य ब्रेक पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इसके अलावा बहुत ठंडे मौसम में भी जब बैटरी का तापमान कम होता है, तो यह सिस्टम धीमी गति से काम करता है।
सरकार की नई पीएम ई-ड्राइव और पुरानी फेम 3 जैसी नीतियां लगातार इसी बात पर जोर देती हैं कि ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी गाड़ियों को और अधिक ऊर्जा कुशल बनाएं। रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम इसी ऊर्जा कुशलता का सबसे बड़ा और सफल उदाहरण है। यह तकनीक न सिर्फ आपकी बिजली का खर्च बचाती है, बल्कि भारत के पावर ग्रिड पर पड़ने वाले बिजली के भारी बोझ को भी कम करती है क्योंकि गाड़ी अपनी जरूरत की कुछ बिजली खुद ही पैदा कर लेती है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और तकनीक का आने वाला भविष्य
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग कोई लग्जरी या दिखावे का फीचर नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक बहुत बड़ी और बुनियादी जरूरत बन चुका है। जो मध्यम वर्गीय ग्राहक अभी तक रेंज की चिंता के कारण इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने से कतराते थे, उन्हें अब यह पूरी तरह से समझ लेना चाहिए कि आज की स्मार्ट गाड़ियां खुद ही चलते चलते अपनी बैटरी को चार्ज करने में सक्षम हैं। यह तकनीक हर गुजरते दिन के साथ लगातार बेहतर हो रही है। आने वाले कुछ ही सालों में हमें और भी ज्यादा उन्नत और कुशल सिस्टम देखने को मिलेंगे जो बर्बाद होने वाली 90 प्रतिशत तक की गतिज ऊर्जा को वापस इस्तेमाल करने लायक बना देंगे।
आज के समय में जब हर आम इंसान एक ऐसी गाड़ी की तलाश में है जिसका रखरखाव कम हो और जिसे चलाने का खर्च भी ना के बराबर हो, तब यह बेहतरीन तकनीक एक आम कम्यूटर के लिए सबसे बड़ी आर्थिक राहत बनकर सामने आती है। सही जानकारी, थोड़ी सी समझदारी और स्मार्ट ड्राइविंग तकनीक की मदद से आप अपनी इलेक्ट्रिक कार की रेंज को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं और अपनी हर यात्रा को सस्ता, तनावमुक्त, सुरक्षित और पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल बना सकते हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का यह नया युग अब हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुका है और यह तकनीक इस युग का सबसे मजबूत स्तंभ है।










